
"वैल्थ के अपने फ़ायदे हैं, और न होने के नुक़सान भी, हालांकि अक्सर इसका उलटा बताया जाता है, मगर उसे शायद ही कोई मानता हो. लेकिन, इसमें कोई शक़ नहीं कि वैल्थ समझदारी का बहुत बड़ा दुश्मन है. ग़रीब आदमी हमेशा अपनी समस्या और उसके हल को लेकर एक समझ रखता है, कि उसके पास पैसा काफ़ी नहीं है और उसे ज़्यादा की ज़रूरत है. वहीं, अमीर इंसान बहुत तरह की बीमारियां पाल लेगा या उनकी कल्पना करेगा और उनके हल को लेकर दुविधा में रहेगा. इसके अलावा, जब तक वो अपने धन के साथ जीना नहीं सीख जाता, तब तक उसके पास इसे ग़लत उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने या ख़ुद को मूर्ख दिखाने की आदत देखी जाती है."
ये जॉन केनेथ गैलब्रेथ की किताब 'द एफ़्लुएंट सोसाइटी' का पहला पैराग्राफ़ है. ये महान किताब आधी सदी पहले लिखी गई थी. इस शुरुआत के बाद किताब एक अलग दिशा ले लेती है, लेकिन अमीरों की 'कई तरह की बीमारियों' पर लिखी इन शुरुआती पंक्तियों में गैलब्रेथ की बात दुनिया की बहुत सी समस्याओं की व्याख्या कर सकती हैं. मेरी नज़र में, धन का होना लोगों के निवेश के तरीक़े और बचत के तरीक़े जो बेहतर नतीजे देते हैं.
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बचत और निवेश के उत्पादों को वर्गीकृत करने के कई तरीक़े हैं, लेकिन मैं एक बिल्कुल नया तरीक़ा सुझाना चाहूंगा: वे जो अमीरों की अकड़ के हिसाब से बनाए गए हैं और वे जो असल में काम के हैं. वास्तव में, कपड़ों से लेकर कारों और खाने-पीने तक लगभग हर चीज़ को वर्गीकृत करने के लिए ये शायद दूसरा तरीक़ा अच्छा होगा, लेकिन मैं अभी सिर्फ़ निवेश के संदर्भ में ही बात करूंगा.
पैसे वालों के लिए डिज़ाइन किए गए निवेशों के पीछे बुनियादी विचार है कि ये निवेश उन्हें रिटर्न और सुरक्षा देने वाली आम चीज़ों से बढ़ कर होने चाहिए. ऐसे निवेश, जो सिर्फ़ एक निश्चित स्तर का रिटर्न और उसके मुताबिक़ ज़्यादा या कम सुरक्षा देते हैं, वो तो आम लोगों के लिए होते हैं. पैसे वालों के पास कुछ ख़ास होना चाहिए जो दूसरों के पास नहीं हो. उनके पास कोई ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो उनकी अपनी ज़रूरतों को पूरा करे, हरेक व्यक्ति की अपनी अनूठी ज़रूरत के हिसाब से रणनीति बनाए और फिर उस रणनीति को मैनेज करे.
वास्तव में, निवेश के संदर्भ में, पैसे वालों को लेकर एकमात्र अंतर ये होता है कि उनके पास ज़्यादा धन होता है, इसलिए दूसरे लोगों के पास उसमें से अपने लिए कुछ पाने की कोशिश करने के ज़्यादा कारण होते हैं (मेरा मतलब धन पाने से है). ज़ाहिर है, ऐसा सबसे सही तरीक़े से उन्हीं उत्पादों और सेवाओं से हो सकता है जो कुछ एक्स्ट्रा करते हों. दुर्भाग्य से, बहुत से अमीर या तो इस बात को कभी नहीं जान पाते या बहुत देर से समझ पाते हैं. इसी कमज़ोरी से निपटने का तरीक़ा यहां बताया गया है.
आप अमीर न होने का दिखावा करें (मुझे लगता है कि ये मुश्किल हो सकता है, लेकिन इसे आज़मा कर देखें). अपनी कुल संपत्ति से कुछ ज़ीरो हटाएं, और फिर देखें कि आपको क्या सलाह दी जाती है. तो, अगर आपके पास ₹10 करोड़ हैं और आपको ₹50 लाख निवेश करने की ज़रूरत है, तो अपने एडवाइज़र के सामने दिखावा करें कि आपकी पूंजी मात्र ₹10 लाख है और आपको ₹50,000 निवेश करने की ज़रूरत है. और फिर, ₹50 लाख के साथ वही करें जो आपको ₹50,000 के साथ करने के लिए कहा जा रहा है.
इसे ज़रूर आज़माएं. आपके पास समझदारी भरी सलाह पाने और बेहतर विकल्प चुनने का बेहतरीन मौक़ा होगा. और कौन जानता है, शायद ये कार और कपड़ों के लिए भी काम करे.
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