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शॉर्ट-टर्म डेट फ़ंड्स के अच्छे दिन चल रहे हैं. पिछले एक साल में 7 से 8 फ़ीसदी का उनका रिटर्न ठंडी बयार जैसा लगता रहा है. वैसे, अगर किसी भी वक़्त पैसा कैश कराने की इसकी ख़ूबी को भी जोड़ दें, तो फ़िक्स्ड इनकम का ये विकल्प ठंडी फुहार में बदल जाएगा. इसी कैटेगरी के हमारे रेकमेंड किए फ़ंड्स का परफ़ॉर्मेंस भी इससे अलग नहीं रहा. इंडेक्सेशन और टैक्स कम करने के अपने फ़ायदे खोने के बावजूद, ये अभी भी डेट (debt) के दूसरे पारंपरिक विकल्पों के मुक़ाबले बेहतर हाल में हैं. हालांकि, यही मौक़ा अपनी उम्मीदों पर कुछ लगाम कसे रखने का भी है. दरअसल, आगे चल कर भी इनके रिटर्न इसी रेंज में रहने की उम्मीद है. रेट में कटौती के फ़ायदे के लिए पोर्टफ़ोलियो इंजीनियरिंग अपने पिछले अपडेट में, हमने रेट में कटौती की बढ़ती उम्मीद की बात की थी. आज छह महीने बाद, डेट मार्केट (debt market) को अभी भी उसका इंतज़ार है. हालांकि, सभी मानते हैं कि ये मामला "कब" का है न कि "अगर" का. जब भी ब्याज दरों में नरमी आएगी, तो शॉर्ट-ड्यूरेशन फ़ंड्स के निवेशकों के लिए मधुर संगीत होंगे. ऐसा इसलिए, क्योंकि जब भी रेट गिरते हैं, तो मार्केट का फ़ायदा उनके रिटर्न बढ़ा देता है, जिसे बोनस माना जा सकता है. नतीजा, फ़ंड मैनेजर अपने पोर्टफ़ोलियो में
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