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नॉमिनेशन को आसान बनाएगा SEBI, हो सकते हैं ये बदलाव

नए प्रस्तावों का मक़सद ऑनबोर्डिंग आसान करना और बेदावा संपत्तियों को कम करना है

नए प्रस्तावों का मक़सद ऑनबोर्डिंग आसान करना और बेदावा संपत्तियों को कम करना हैAman Singhal/AI-Generated Image

सारांशः डीमैट अकाउंट में कोई नॉमिनी नहीं है? SEBI के नए प्रस्ताव के तहत यह अब आसान डिफ़ॉल्ट विकल्प नहीं रहेगा. जानें क्या बदलने जा रहा है और अगर आपके साथ कुछ हो जाए तो आपके परिवार पर इसका क्या असर पड़ेगा.

भारत का पूंजी बाज़ार नियामक अब फ़ाइनेंशियल एसेट्स के लिए लाभार्थी का नाम दर्ज करने के तरीक़े में बदलाव पर विचार कर रहा है. साथ ही, इस पर भी ग़ौर कर रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में लोग अभी भी यह काम क्यों नहीं करते.

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फ़ंड फ़ोलियो के नॉमिनेशन नियमों में बदलाव के लिए एक परामर्श पत्र जारी किया है. इसके दो उद्देश्य हैं: निवेशकों के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाना और उन बिना दावे वाली एसेट्स की बढ़ती संख्या को कम करना, जो तब जमा होती हैं जब अकाउंट होल्डर का निधन बिना किसी नॉमिनी के हो जाता है.

पुरानी व्यवस्था की समस्या

पिछले साल SEBI के नॉमिनेशन सर्कुलर में अच्छे इरादे ज़रूर थे, लेकिन प्रक्रिया काफ़ी उलझी हुई थी. जो निवेशक किसी को नॉमिनेट नहीं करना चाहते थे, उन्हें OTP के ज़रिए अपना फ़ैसला प्रमाणित करना होता था. साथ ही, एक घोषणापत्र भी देना पड़ता था, जो या तो इंटरमीडियरी के दफ़्तर में जाकर हस्ताक्षर के साथ या वीडियो रिकॉर्डिंग के ज़रिए जमा करना होता था.

इंडस्ट्री ने इस पर आपत्ति जताई. वीडियो-आधारित ऑप्ट-आउट के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना, रिकॉर्ड संभालना और उन्हें सुरक्षित तरीक़े से साझा करना बड़े पैमाने पर मुश्किल साबित हुआ. इन अड़चनों की वजह से ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया बाधित होने का जोख़िम था, ख़ासकर ऐसे वक़्त में जब इंटरमीडियरी चाहते हैं कि यह प्रक्रिया बिल्कुल सहज हो.

SEBI का नया प्रस्ताव

SEBI का हालिया प्रस्ताव व्यवहार-आधारित सोच पर टिका है: अब निवेशकों को सक्रिय रूप से नॉमिनेशन करने की ज़रूरत नहीं होगी, बल्कि अकाउंट खोलते वक़्त नॉमिनेशन डिफ़ॉल्ट विकल्प होगा. जो निवेशक इसे छोड़ना चाहते हैं, उन्हें जान-बूझकर ऑप्ट-आउट करना होगा और ऐसा करते वक़्त एक पॉप-अप घोषणा के ज़रिए नॉमिनेशन के फ़ायदों को स्वीकार करना होगा.

नियामक ने नॉमिनी जोड़ने की ज़रूरी जानकारी को भी आसान बनाने का प्रस्ताव दिया है. नई व्यवस्था में सिर्फ़ नॉमिनी का नाम और निवेशक से उनका रिश्ता अनिवार्य होगा. संपर्क विवरण और संपत्ति का हिस्सा वैकल्पिक रहेगा. अगर हिस्सा नहीं बताया गया, तो संपत्ति सभी नॉमिनियों में बराबर बंट जाएगी.

इसके अलावा, जिन मौजूदा अकाउंट में न नॉमिनेशन है, न ऑप्ट-आउट का रिकॉर्ड, और नए अकाउंट जिनमें निवेशक ने ऑप्ट-आउट चुना हो, ऐसे मामलों में इंटरमीडियरी को ईमेल, SMS और प्लेटफ़ॉर्म पर पॉप-अप के ज़रिए निवेशकों को नॉमिनेशन पूरा करने की समय-समय पर याद दिलानी होगी.

नॉमिनियों की संख्या चार तक सीमित

SEBI ने नॉमिनियों की अधिकतम संख्या 10 से घटाकर चार करने का प्रस्ताव दिया है, जो बैंकिंग नियमों के क़रीब है. परामर्श पत्र में कहा गया है कि बहुत कम निवेशक तीन से ज़्यादा नॉमिनी रखते हैं. ऐसे में 10 की सीमा से सिस्टम पर बेवजह बोझ पड़ता था और कोई ख़ास फ़ायदा नहीं होता था.

अक्षमता वाला प्रावधान हटाया जाएगा

जनवरी 2025 के सर्कुलर का एक विवादास्पद प्रावधान यह था कि निवेशक के अक्षम होने की स्थिति में नॉमिनी उनके जीते-जी अकाउंट चला सकते हैं. इंडस्ट्री ने इसे क़ानूनी रूप से अस्पष्ट और लागू करने में मुश्किल बताया. यह भी कहा गया कि परंपरागत रूप से नॉमिनी को निवेशक के जीवनकाल में संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं होता. इस प्रावधान से धोखाधड़ी, दुरुपयोग और क़ानूनी विवादों की आशंका भी जताई गई थी.

SEBI ने इस प्रावधान को हटाने और निवेशकों को मौजूदा पावर ऑफ अटॉर्नी रूट अपनाने की सलाह देने का प्रस्ताव रखा है, जो किसी जीवित अकाउंट होल्डर की तरफ़ से अकाउंट मैनेज करने के लिए ज़्यादा उपयुक्त तरीक़ा है.

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