
आमतौर पर मीडिया कवरेज़ से दूर रहने वाला डेट सेगमेंट अब सुर्खियों में आना शुरू हो गया है. चाहे ब्याज़ दरों में कटौती में देरी हो या फिर महंगाई का बरक़रार रहना, अंतरराष्ट्रीय इंडेक्स में भारतीय बांड्स के शामिल होने की उम्मीद हो या 2024 की पहली तिमाही में यील्ड (yields) में बढ़ोतरी, डेट सेगमेंट (debt segment) में काफ़ी कुछ घट रहा है. इसलिए, अपने निवेशकों को मौज़ूदा स्थिति की जानकारी देने के लिए, हमने डेट मैनेजमेंट (debt management) से जुड़े चार दिग्गजों से बात की: HDFC AMC के अनिल बम्बोली, एक्सिस के देवांग शाह, बंधन के सुयश चौधरी और HSBC के श्रीराम रामनाथन. इन विशेषज्ञों की राय जानें: 1. रेट कटौती में देर 2023 तक रेट में कटौती की उम्मीद ज़ोर-शोर से बढ़ती जा रही थीं. 2024 आते-आते, वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ती महंगाई (विशेष रूप से अमेरिका में) के कारण दरों में कटौती का समय री-सेट कर दिया गया है. फ़ंड मैनेजर अभी भी मानते हैं कि रेट चरम पर हैं. हालांकि, रेट में कटौती की संभावना काफ़ी ज़्यादा है. आप पर क्या असर पड़ेगा? वैसे तो दरों में कटौती को लेकर फ़ंड मैनेजर अलग-अलग उम्मीदें लगाकर बैठे हैं, पर वे रणनीतिक रूप से अपने पोर्टफ़ोलियो में लंबी अवधि वाले बांड्स जोड़ रहे हैं. मोटे तौर पर, छोटी अवधि के फ़ंड्स से 7-8 फ़ीसदी रिटर्न मिल चुका है, और दरों में संभावित कटौती से बढ़ने वाली कैपिटल एक तरह से बोनस का काम करेगी. फ़ंड मैनेजरों की राय देवांग शाह: पिछले छह महीनों में दरों में कटौती को लेकर मार्केट की उम्मीदों में नाटकीय बदलाव आया है. पहले, निवेशक कटौती की काफ़ी ज़्यादा उम्मीद कर रहे थे. अब, सेंटीमेंट पूरी तरह से बदल गया है. ब्याज़ दर को लेकर संकेत देने वाले स्वॉप कर्व (Swap curves) भी, भारत में अगले साल दरों में कटौती का संकेत नहीं दे रहे हैं. यहां तक कि अमेरिका में भी, जहां मार्केट को दरों में कटौती की काफ़ी उम्मीद थी, दिसंबर 2024 तक 25 बेसिस पॉइंट की एक मामूली कटौती की ही उम्मीद है. हमारा मानना है कि अगर महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमानित ट्रेंड के हिसाब से जारी रहती है, तो हम अगले 12 महीनों में 50 बेसिस पॉइंट कटौती की उम्मीद कर सकते हैं. हमारी पोर्टफ़ोलियो पोज़िशन इस
ये लेख पहली बार मई 23, 2024 को पब्लिश हुआ.
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