
मंगलवार को भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने ज़्यादा रिस्क लेने की क्षमता वाले निवेशकों के लिए एक नया एसेट क्लास (परिसंपत्ति वर्ग) प्रस्तावित किया. इस क़दम का उद्देश्य म्यूचुअल फ़ंड और पोर्टफ़ोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) के बीच की खाई को कम करना है.
सेबी द्वारा प्रस्तावित नयी एसेट क्लास क्या है?
अपने परामर्श पत्र में, सेबी ने कहा कि नए एसेट क्लास में म्यूचुअल फ़ंड की तरह मिलाजुला कर बनाई गई फ़ंड संरचना (pooled fund structure) होगी, लेकिन PMS की तरह इसका टिकट साइज़ बड़ा होगा. इसका मतलब है, सेबी द्वारा प्रस्तावित नई एसेट क्लास के तहत न्यूनतम निवेश ₹10 लाख होगा. इसके अलावा, सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP), सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP) और सिस्टमैटिक ट्रांसफ़र प्लान (STP) जैसे सिस्टमैटिक प्लान, का विकल्प चुना जा सकेगा.
मार्केट रेग्युलेटर ने कहा, "किसी भी समय निवेशक की कुल निवेशित राशि निवेशक की गतिविधियों, जैसे पैसे निकालना या सिस्टमैटिक ट्रांसफ़र आदि के कारण ₹10 लाख से कम नहीं होनी चाहिए. हालांकि, निवेश के मूल्य में कमी के कारण कुल राशि ₹10 लाख से कम हो सकती है".
इसमें ये भी कहा गया है कि नई एसेट क्लास में केवल सेबी द्वारा निर्देशित 'निवेश रणनीतियां' ही शामिल होंगी. ऐसी कुछ रणनीतियां लॉन्ग-शॉर्ट इक्विटी फ़ंड, इनवर्स एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) या फ़ंड और डेरिवेटिव या डेरिवेटिव रणनीतियां हैं.
नई एसेट क्लास टैक्स के मामले में भी म्यूचुअल फ़ंड जैसा ही होगी, जिसमें निवेशकों को तब तक कोई टैक्स नहीं देना पड़ता जब तक वे अपना निवेश नहीं बेच देते.
अगर इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है, तो ये भारतीय म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री में एक नयी बात होगी. इस प्रस्ताव पर 6 अगस्त 2024 तक सेबी को राय दी जा सकती है.
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