
ICICI प्रूडेंशियल इक्विटी मिनिमम वैरिएंस फ़ंड 2 दिसंबर, 2024 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा. यहां, हम इस NFO (न्यू फ़ंड ऑफर) पर एक नज़र डालते हैं और देखते हैं कि क्या ये आपके पोर्टफ़ोलियो में जोड़ने के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
ICICI प्रू इक्विटी मिनिमम वैरिएंस फ़ंड NFO: एक नज़र
| फ़ंड | ICICI प्रू इक्विटी मिनिमम वैरिएंस फ़ंड NFO |
| फ़ंड टाइप | एक्टिवली-मैनेज्ड इक्विटी स्कीम |
| NFO पीरियड | 18 नवंबर, 2024 - 2 दिसंबर, 2024 |
| बेंचमार्क | निफ़्टी 50 TRI |
| एग्ज़िट लोड | एलॉटमेंट के 12 महीनों के भीतर निकासी करने पर 1% |
| फ़ंड मैनेजर | वैभव दुसाद और नित्या मिश्रा |
न्यूनतम वैरिएंस स्ट्रैटजी क्या है?
न्यूनतम वैरिएंस स्ट्रैटजी में उन शेयरों को चुना जाता है जिनमें प्राइस मूवमेंट में सबसे कम अंतर होता है. दूसरे शब्दों में, इसमें कम अस्थिर शेयरों को चुना जाता है, जिसका अर्थ ऐसी स्ट्रैटजी से है जिसका उद्देश्य बाज़ार में उतार-चढ़ाव के प्रभावों को कम करना और स्थिर रिटर्न के साथ एक पोर्टफ़ोलियो बनाना है.
ICICI प्रूडेंशियल इक्विटी मिनिमम वैरिएंस फ़ंड की निवेश रणनीति
ये फ़ंड निफ़्टी 50 इंडेक्स में शामिल कंपनियों में निवेश करेगा, जो मार्केट वैल्यू के हिसाब से 50 सबसे बड़ी भारतीय कंपनियों का इंडेक्स है.
ये चयन कई फ़ैक्टर्स पर आधारित होगा, जिनमें शामिल हैं:
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अस्थिरता:
समय के साथ किसी शेयर की क़ीमत में कितना उतार-चढ़ाव होता है.
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गिरावट का जोखिम:
नुक़सान की आशंका.
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अधिकतम गिरावट:
किसी निश्चित अवधि में क़ीमत में सबसे बड़ी गिरावट.
- तेज़ी की संभावना: भविष्य में ग्रोथ की गुंजाइश.
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मिनिमम वैरिएंस स्ट्रैटजी के प्रदर्शन का रिव्यू
SBI इक्विटी मिनिमम वैरिएंस फ़ंड एकमात्र एक्टिव फ़ंड है जिसकी तुलना ICICI प्रूडेंशियल इक्विटी मिनिमम वैरिएंस फ़ंड से की जा सकती है.
भले ही, एक जैसे इन्वेस्टमेंट यूनिवर्स वाला कोई पैसिवली मैनेज्ड फ़ंड नहीं हैं, लेकिन दो निफ़्टी इंडेक्स को ट्रैक करने वाली समान स्ट्रैटजी ज़रूर हैं: निफ़्टी 100 लो वोलैटिलिटी 30 TRI (तीन फ़ंड) और निफ़्टी अल्फ़ा लो वोलैटिलिटी 30 TRI (दो फ़ंड).
इसलिए, चूंकि SBI इक्विटी मिनिमम वैरिएंस फ़ंड एकमात्र तुलना के लायक फ़ंड है, आइए देखते हैं कि मार्केट के विभिन्न चरणों में इसका प्रदर्शन निफ़्टी 50 TRI की तुलना में कैसा है।
हमने पाया कि SBI फ़ंड ज़्यादातर मानकों पर खरा उतरता है
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ये कम अस्थिर है (स्टैंडर्ड डेविएशन रो को देखिए).
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बाज़ार में गिरावट के दौरान ये निफ़्टी 50 TRI से कम गिरता है.
- ये बाज़ार में तेज़ी के दौरान भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है.
वेल्थ तैयार करने का एक टिकाऊ टूल
SBI का मिनिमम वैरिएंस फ़ंड बाज़ार के ज़्यादातर चरणों में सफल रहा है
| निफ़्टी 50 TRI (%) | मिनिमम वैरिएंस फ़ंड (%) | |
|---|---|---|
| स्टैंडर्ड डेविएशन | 18.6 | 15.9 |
| मार्केट कंसोलिडेशन (मार्च 2019-फ़रवरी 2020) | 5.4 | 3.9 |
| कोविड क्रैश (फ़रवरी 2020-मार्च 2020) | -30.1 | -23.6 |
| कोविड के बाद तेज़ी (मार्च 2020-अक्तूबर 2021) | 75.1 | 68.6 |
| अस्थिर बाज़ार (अक्तूबर 2021-मार्च 2023) | -4.8 | -2.1 |
| हाल ही में तेज़ी (मार्च 2023-सितंबर 2024) | 35.0 | 41.3 |
| लॉन्च के बाद से रिटर्न | 14.7 | 15.8 |
| लॉन्च डेट के बाद से 19 नवंबर, 2024 तक स्टैंडर्ड डेविएशन | ||
ICICI प्रूडेंशियल इक्विटी मिनिमम वैरिएंस फ़ंड के मैनेजर
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वैभव दुसाद:
वे चार
म्यूचुअल फ़ंड्स
का सफलतापूर्वक प्रबंधन कर रहे हैं, जिनमें ICICI प्रू ब्लूचिप और ICICI प्रू फ़ोकस्ड इक्विटी फ़ंड जैसे प्रमुख फ़ंड शामिल हैं.
- नित्या मिश्रा: MBA की डिग्री हासिल कर चुकीं नित्या मिश्रा 2018 से फ़ंड हाउस के साथ हैं और ICICI प्रूडेंशियल एनर्जी ऑपर्च्युनिटीज़ फ़ंड का प्रबंधन करती हैं.
वैभव दुसाद का ट्रैक रिकॉर्ड भरोसा दिलाता है
| स्कीम | जब से प्रबंधन संभाल रहे हैं | प्रबंधन के बाद से रिटर्न (%) | बेंचमार्क रिटर्न (%) | कैटेगरी एवरेज रिटर्न (%) | कैटेगरी रैंक |
|---|---|---|---|---|---|
| ICICI प्रू ब्लूचिप | 16 जनवरी, 2021 | 19.8 | 15.6 | 16.9 | 3/28 |
| ICICI प्रू फ़ोकस्ड इक्विटी | 8 अगस्त, 2022 | 26.8 | 19.1 | 20.7 | 11/65 |
| ICICI प्रू इनोवेशन | 10 अप्रैल, 2022 | 42.2 | 29.2 | 33.5 | 5/39 |
| ICICI प्रू टेक्नोलॉजी | 2 मई, 2020 | 36.9 | 25.9 | 33.2 | 1/5 |
| 19 नवंबर, 2024 तक | |||||
ICICI प्रू इक्विटी मिनिमम वैरिएंस फ़ंड: क्या निवेश करना चाहिए?
ICICI प्रूडेंशियल इक्विटी मिनिमम वैरिएंस फ़ंड बाज़ार में गिरावट के दौरान स्थिरता प्रदान करता है और उसका उद्देश्य एक्टिव मैनेजमेंट के ज़रिये बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न हासिल करना है.
यही वजह है कि ये फ़ंड जोखिम से बचने वाले निवेशकों के लिए आकर्षक नज़र आता है जो बेंचमार्क के साथ प्रतिस्पर्धी रिटर्न चाहते हैं.
हालांकि, निफ़्टी 50 शेयरों पर ध्यान केंद्रित करने का मतलब सीमित डायवर्सिफ़िकेशन है. दूसरा अहम बात, फ़ंड का प्रदर्शन मैनेजर्स की स्ट्रैटजी को प्रभावी ढंग से लागू करने की क्षमता पर बहुत ज़्यादा निर्भर करता है. एक्टिव मैनेजमेंट की ऊंची कॉस्ट पर भी विचार किया जाना चाहिए. ये बात ख़ासकर तब और अहम हो जाती है, जब पैसिव लो वॉलेटिलिटी फ़ंड जैसे समान निवेश स्ट्रैटजी वाले सस्ते पैसिव फ़ंड उपलब्ध हों.
आखिरी, लेकिन सबसे अहम बात ये है कि चूंकि ये एक नया फ़ंड है, इसलिए इसका मूल्यांकन करने के लिए कोई ऐतिहासिक प्रदर्शन मौजूद नहीं है.
हमारी राय
ज़्यादातर निवेशकों के लिए, दमदार ट्रैक रिकॉर्ड वाले स्थापित फ़ंडों के साथ बने रहना ज़्यादा सुरक्षित विकल्प है.
लेकिन अगर आप मिनिमम वैरिएंस की अवधारणा को समझते हैं और लार्ज-कैप स्थिरता में दिलचस्पी रखते हैं, तो इस फ़ंड पर ग़ौर किया जा सकता है. अन्यथा, बड़े स्तर पर डायवर्सिफ़िकेशन और टिकाऊ रिटर्न के लिए फ़्लेक्सी-कैप या हाइब्रिड फ़ंड पर विचार करें.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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