AI-generated image
मान लीजिए, आप निफ़्टी 50 इंडेक्स फ़ंड में निवेश करना चाहते हैं. आपको दो विकल्प मिलते हैं — दोनों एक ही इंडेक्स को ट्रैक करते हैं और उससे जुड़े 50 स्टॉक्स में निवेश करते हैं. लेकिन एक फ़ंड का NAV ₹167.10 है, जबकि दूसरे का सिर्फ ₹10.01 है.
आप रुककर सोचते हैं: अगर दोनों एक ही इंडेक्स में निवेश कर रहे हैं, तो एक इतना “महंगा” क्यों है? आइए, इस भ्रम को दूर करते हैं.
पहले जानिए, NAV क्या होता है?
NAV यानी नेट एसेट वैल्यू, म्यूचुअल फ़ंड की एक यूनिट की क़ीमत होती है. ये बताता है कि ट्रेडिंग के दिन के अंत में प्रत्येक यूनिट की क़ीमत कितनी है. NAV की कैल्कुलेशन फ़ंड के पास मौजूद सभी स्टॉक्स और अन्य एसेट्स के कुल मूल्य को लेकर की जाती है, जिसमें से सभी ख़र्च या देनदारी घटाई जाती है, और फिर इसे फ़ंड की कुल यूनिट्स की संख्या से विभाजित किया जाता है.
तो, अगर कुल निवेश मूल्य ₹100 करोड़ है और एक करोड़ यूनिट्स हैं, तो NAV ₹100 प्रति यूनिट होगा. ये वैल्यू हर दिन फ़ंड के निवेश के प्रदर्शन के आधार पर बदलती रहती है.
NAV में इतना अंतर क्यों? इसका जवाब है समय
आइए, उन दो निफ़्टी 50 इंडेक्स फ़ंड्स की बात करते हैं. एक का NAV लगभग ₹167.10, जबकि दूसरे का सिर्फ़ ₹10.01 है. ये अंतर बड़ा लग सकता है — लेकिन कारण बहुत सीधा है: दोनों फ़ंड एक ही समय पर शुरू नहीं हुए.
जिस फ़ंड का NAV ज़्यादा है, वो भारत का सबसे पुराना निफ़्टी 50 इंडेक्स फ़ंड है, जो मार्च 2000 में शुरू हुआ था. तब से ये फ़ंड 25 साल से ज़्यादा समय से बाज़ार में निवेश कर रहा है. इन वर्षों में, इसका निवेश बढ़ा, उसने रिइन्वेस्ट यानी पुनर्निवेश किया और उसे कम्पाउंडिंग का फ़ायदा मिला. जैसे-जैसे निवेश का पूल बढ़ता गया, वैसे-वैसे इसका NAV भी बढ़ता गया. आज ये ₹167.10 पर है (5 मई, 2025 तक).
दूसरी ओर, कम NAV वाला फ़ंड सबसे नया निफ़्टी 50 इंडेक्स फ़ंड है, जो अक्तूबर 2024 में लॉन्च हुआ. ये बाज़ार में सिर्फ़ कुछ महीनों से है. जाहिर है, इसे बढ़ने का ज़्यादा समय नहीं मिला. इसलिए इसका NAV अभी भी शुरुआती क़ीमत के क़रीब यानी वर्तमान में ₹10.01 है.
इसे इस तरह समझें: दो लोग सेविंग प्लान शुरू करते हैं. एक ने 25 साल पहले शुरुआत की और निवेश करता रहा. दूसरे ने पिछले साल निवेश शुरू किया. भले ही दोनों एक ही तरह से बचत करें, लेकिन जिसने पहले शुरुआत की उसका कॉर्पस बहुत बड़ा होगा — न कि इसलिए कि उसने ज्यादा एग्रेसिव होकर बचत की, बल्कि इसलिए कि उसने ज़्यादा समय तक निवेश किया.
म्यूचुअल फ़ंड के NAV के साथ भी यही बात है. फ़ंड जितना पुराना, उतना ही उसके पास बढ़ने का समय होता है — और यही कारण है कि उसका NAV ज़्यादा होता है. बस इतनी सी बात है.
ये भी पढ़ेंः ब्याज दर में गिरावट के दौर के लिए सबसे अच्छा फिक्स्ड-इनकम म्यूचुअल फंड कौन सा है?
क्या कम NAV का मतलब सस्ता या बेहतर है?
बिल्कुल नहीं. कम NAV का मतलब ये नहीं कि फ़ंड सस्ता है या बेहतर डील है. ये सिर्फ़ इतना बताता है कि फ़ंड हाल में लॉन्च हुआ है.
मान लीजिए, आप दोनों फ़ंड्स में ₹10,000 निवेश करते हैं.
पुराने फ़ंड (जिसका NAV ₹167.10 है) में आपको कम यूनिट्स मिलेंगी, जो लगभग 59.8 यूनिट होंगी.
नए फ़ंड (जिसका NAV ₹10.01 है) में आपको ज्यादा यूनिट्स मिलेंगी, जो लगभग 999.0 यूनिट होंगी.
लेकिन इससे आपके पैसे की ग्रोथ पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. जो बात मायने रखती है, वो ये है कि फ़ंड इंडेक्स को कितनी अच्छी तरह ट्रैक करता है. उदाहरण के लिए, निफ़्टी 50 इंडेक्स ने मार्च 2025 में लगभग 6.3 फ़ीसदी और 2025 में अब तक (YTD) 3.7 फ़ीसदी की बढ़त हासिल की है. अगर दोनों फ़ंड्स ने इंडेक्स को सटीक रूप से ट्रैक किया, तो आपका निवेश दोनों में से किसी भी फ़ंड में समान प्रतिशत बढ़ेगा, चाहे NAV कितना हो या आपके पास कितनी भी यूनिट्स हों.
फ़ायदे की कैल्कुलेशन आपकी निवेश की गई रक़म पर होती है, न कि यूनिट्स की संख्या पर. इसलिए, चाहे आपको 59 यूनिट्स मिलें या 999, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता — अगर इंडेक्स में 6.3 फ़ीसदी की बढ़त होती है, तो आपके ₹10,000 बढ़कर ₹10,630 हो जाएंगे. बात इतनी सीधी है.
आखिरी बात
इंडेक्स फ़ंड चुनते समय, NAV के ज़्यादा या कम होने से प्रभावित न हों. NAV के आधार पर कोई फ़ंड बेहतर या ख़राब नहीं होता.
जो वास्तव में मायने रखता है, वो ये है कि फ़ंड इंडेक्स को कितनी बारीकी से ट्रैक करता है और कितनी कुशलता से ऐसा करता है. लेकिन ये बात किसी और दिन के लिए. अभी के लिए, बस इतना याद रखें: NAV सिर्फ एक आंकड़ा है— इसके आधार पर कोई फैसला मत कीजिए.
निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फ़ंड की ओर से निवेशक शिक्षा और जागरूकता पहल
म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए उपयोगी जानकारी: सभी म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों को एक बार KYC (नो योर कस्टमर) प्रक्रिया से गुजरना होता है. निवेशकों को केवल SEBI की वेबसाइट पर ‘इंटरमीडियरीज/मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस’ के तहत सत्यापित रजिस्टर्ड म्यूचुअल फ़ंड्स के साथ ही लेनदेन करना चाहिए. अपनी शिकायतों के समाधान के लिए, कृपया www.scores.gov.in पर जाएं. KYC, विभिन्न डिटेल्स में बदलाव और शिकायतों के समाधान के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए, कृपया mf.nipponindiaim.com/InvestorEducation/what-to-know-when-investing पर विजिट करें.
म्यूचुअल फंड निवेश बाज़ार जोखिमों के अधीन हैं, कृपया सभी योजना संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें.
ये भी पढ़ेंः कौन से म्यूचुअल फ़ंड दे सकते हैं 26% से ज़्यादा रिटर्न?
ये लेख पहली बार मई 13, 2025 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
शिकायतों के लिए संपर्क करें: [email protected]


