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म्यूचुअल फ़ंड से अपना पैसा निकालने का सबसे अच्छा तरीक़ा

क्या आपको अपना पैसा एक बार में निकालना चाहिए या धीरे-धीरे (SWP)? आइए, आंकड़ों पर नज़र डालते हैं

म्यूचुअल फंड से अपना पैसा निकालने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?Anand Kumar/AI-Generated Image

आपने सालों तक मेहनत से निवेश किया और म्यूचुअल फ़ंड्स के ज़रिए एक अच्छा-ख़ासा कॉर्पस तैयार किया. लेकिन अब आता है असली सवाल- इस पैसे को निकालने का सही तरीक़ा क्या है? क्या आपको अपने गोल्स के क़रीब पहुंचते ही सारा पैसा एक बार में निकाल लेना चाहिए? या फिर कोई और स्मार्ट तरीक़ा है?

यहीं पर ज़्यादातर निवेशक चूक जाते हैं. एकमुश्त निकासी, यानी सारा पैसा एक साथ निकालना, शायद सबसे आसान लगे, लेकिन इसमें मार्केट टाइमिंग का एक बड़ा जोखिम है. अगर आप उस वक्त पैसा निकालते हैं जब मार्केट नीचे हो, तो आपका कॉर्पस काफ़ी कम हो सकता है.

लेकिन एक बेहतर विकल्प भी है. ये आपके पैसे को मार्केट की अस्थिरता से बचाता है और आपके निवेश को निकालने का एक आसान रास्ता देता है. इसे कहते हैं सिस्टेमैटिक विदड्रॉल प्लान (SWP). जैसे SIP (सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान) आपको धीरे-धीरे मार्केट में निवेश करने में मदद करता है, वैसे ही SWP आपको समझदारी से पैसे निकालने में मदद करता है.

इस आर्टिकल में हम बताएंगे कि SWP क्या है, ये कैसे काम करता है और अस्थिर मार्केट में ये एकमुश्त निकासी (lump sum withdrawals) से क्यों बेहतर है.

SWP क्या है?
सिस्टेमैटिक विदड्रॉल प्लान (SWP) आपको अपने म्यूचुअल फ़ंड निवेश से मासिक, तिमाही या सालाना जैसे नियमित समय पर, एक निश्चित रक़म निकालने की सुविधा देता है. बाक़ी बचा कॉर्पस फ़ंड में निवेशित रहता है और उस पर रिटर्न मिलता रहता है.

इसे SIP का उल्टा समझिए. SIP में आप धीरे-धीरे पैसा निवेश करते हैं. SWP में आप धीरे-धीरे पैसा निकालते हैं. इसके दो बड़े फ़ायदे हैं:

आपका पूरा कॉर्पस एक बार में मार्केट की अस्थिरता का शिकार नहीं होता.
बचा हुआ निवेशित हिस्सा बढ़ता रहता है, जिससे आपको समय के साथ बेहतर रिटर्न मिलता है.

अस्थिर मार्केट में SWP कैसे मदद करता है?
कल्पना करें कि आपने एक म्यूचुअल फ़ंड में ₹10 लाख निवेश किए थे और पांच साल बाद आपको उस पैसे की ज़रूरत थी, ठीक उसी समय मार्केट में तेज़ गिरावट आ जाती है. हमने पिछले कुछ सालों में ऐसी छह घटनाओं को देखा, जब सेंसेक्स अपने हाल के पीक से 15 प्रतिशत से ज़्यादा गिरा.

इस अंतर को दिखाने के लिए, हमने दो निवेशकों की तुलना की:

निवेशक A ने गिरावट के दिन पूरा पैसा (एकमुश्त यानी lumpsum) निकाल लिया.

निवेशक B ने अपनी ज़रूरत से एक साल पहले SWP शुरू किया और एक साल तक हर महीने बराबर यूनिट्स निकाले.

अब देखिए, गिरावट आने तक दोनों के पास कितना पैसा बचा.

SWP vs एकमुश्त निकासी

मार्केट में गिरावट के दौरान कौन रहा फ़ायदे में?

निकासी की तारीख़ एकमुश्त वैल्यू SWP वैल्यू
GFC क्राइसिस के बाद (2011) 11,37,544 16,99,812
युआन डिवैल्युएशन (2016) 12,94,621 19,16,930
कोविड महामारी (2020) 9,21,581 17,36,560
RBI द्वारा ब्याज दर में बढ़ोतरी (2022) 16,53,779 23,03,761
मार्केट की गिरावट (2024) 19,00,310 25,27,221
हाल की मार्केट की गिरावट को छोड़कर, 2010 के बाद की केवल वही घटनाएं ली गईं जब सेंसेक्स में 15 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई.

ये भी पढ़ेंः ₹2,000 की SIP के लिए कौन-सा म्यूचुअल फ़ंड सही है?

अंतर साफ़ दिखता है. हर मामले में, SWP का इस्तेमाल करने वाले निवेशक के पास ज़्यादा कुल वैल्यू रही, जो कभी-कभी ₹3-5 लाख ज़्यादा रही. इसका कारण:

  • SWP निवेशक ने गिरावट के दौरान पूरा पैसा नहीं निकाला. उन्होंने केवल एक हिस्सा निकाला और बाक़ी को निवेशित रहने दिया.
  • जब मार्केट में सुधार हुआ, तो बचा हुआ कॉर्पस बढ़ गया, जिससे एकमुश्त निकासी करने वाला निवेशक चूक गया.
  • धीरे-धीरे निकालने से SWP निवेशक ने मार्केट टाइमिंग के प्रभाव को पूरी तरह कम कर दिया.

यही कारण है कि SWP सिर्फ व्यवस्थित निकासी का तरीक़ा नहीं है. ये एक ऐसी रणनीति है जो आपको:

  • ग़लत टाइमिंग के जोखिम से बचाती है
  • मार्केट में सुधार के दौरान निवेशित रहने देती है
  • सुनिश्चित करती है कि कम समय की अस्थिरता आपके गोल्स को पटरी से न उतारे

जब मार्केट ऊपर-नीचे हो रहा हो, तो आपकी निकासी की रणनीति को भी आपके निवेश प्लान जितना ही अनुशासित होना चाहिए. और, SWP इसके लिए ही बना है.

SWP किसके लिए है?
SWP सिर्फ़ रिटायर्ड लोगों के लिए नहीं है, हालांकि ये रिटायरमेंट इनकम के लिए बहुत प्रभावी है.

ये किसी भी निवेशक के लिए एक व्यावहारिक रणनीति है जो अपने फ़ाइनेंशियल गोल्स के क़रीब पहुंच रहा हो.

अपने गोल्स के हिसाब से SWP की योजना बनाएं. उदाहरण के लिए, अगर ये आपके बच्चे की पढ़ाई के लिए है और इसमें कोई समझौता नहीं हो सकता, तो अपने गोल्स से 18 महीने-2 साल पहले निकासी शुरू करें.

अगर आप रिटायरमेंट की योजना बना रहे हैं, तो SWP आपके सुनहरे सालों के लिए आय का अहम सोर्स होगा. इस मामले में, आप SWP को हमेशा के लिए चला सकते हैं, बशर्ते आप हर साल अपने कॉर्पस का 6 प्रतिशत से ज़्यादा न निकालें.

आखिरी बात
वैल्यू रिसर्च में हमारी फ़िलॉसफ़ी सरल है: सब्र के साथ वैल्थ बनाएं; समझदारी से निकालें.

तो, अगली बार जब आप अपने फ़ाइनेंशियल गोल्स के क़रीब हों, तो सालों की मेहनत को जल्दबाजी में की गई निकासी से बर्बाद न करें. SWP को अपना फ़ाइनेंशियल पैराशूट बनने दें, जो एक सुगम, स्थिर तरीक़ा है जिससे आप अपने गोल्स तक सुरक्षित पहुंच सकें.

ये भी पढ़ेंः लिक्विड फ़ंड और शॉर्ट ड्यूरेशन फ़ंड निवेश के लिए कैसे हैं?

ये लेख पहली बार मई 26, 2025 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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