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बुधवार, 28 मई 2025 को भारतीय बाज़ार में गोल्ड की क़ीमतों में मामूली तेज़ी देखने को मिल रही है. MCX पर शुरुआती कारोबार में गोल्ड लगभग ₹250 कमज़ोर होकर खुला, लेकिन कुछ ही देर में ये हरे निशान में आ गया. फ़िलहाल (10.00 बजे) गोल्ड ₹119 की मज़बूती के साथ ₹95262 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है.
वहीं, सिल्वर में भी मज़बूती देखने को मिल रही है, जो ₹474 बढ़कर ₹97,948 प्रति किग्रा के स्तर पर बनी हुई है.
गोल्ड के इंटरनेशनल रेट
गोल्ड के इंटरनेशनल प्राइस बात करें तो वहां कमज़ोरी देखने को मिल रही है. फ़िलहाल गोल्ड 13 डॉलर कमज़ोर होकर 3,296 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर डॉलर और अमेरिकी राजकोषीय परिदृश्य से जुड़ी चिंताओं के कारण एक दिन पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गईं. डॉलर सूचकांक में 0.20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जिससे विदेशी मुद्राओं में सोना सस्ता हो गया और इसकी मांग बढ़ गई.
निवेशकों का ध्यान अब आगामी अमेरिका का मैक्रोइकोनॉमिक रिपोर्टों पर है, जो अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में बदलाव की संभावनाओं से जुड़े संकेत मिलेंगे.
गोल्ड की कीमतों को प्रभावित करने वाले 5 फ़ैक्टर
1. अमेरिकी डॉलर की ताकतः सोने की कीमत का डॉलर के साथ उलटा संबंध होता है. अगर डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की कीमतें आमतौर पर कम हो सकती हैं, क्योंकि यह अन्य मुद्राओं में निवेशकों के लिए महंगा हो जाता है. 2025 में, यूएस फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियां और ट्रम्प प्रशासन की टैरिफ जैसी ट्रेड पॉलिसीज़ डॉलर की ताकत को प्रभावित कर सकती हैं. अगर ब्याज दरें स्थिर रहती हैं या बढ़ती हैं, तो डॉलर मजबूत हो सकता है, जिससे सोने पर दबाव पड़ सकता है.
2. भू-राजनीतिक अनिश्चितता: अमेरिका-चीन ट्रेड टेंशन, यूक्रेन-रूस संघर्ष या मध्य पूर्व में अस्थिरता जैसे भू-राजनीतिक तनाव सोने को एक सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) के रूप में बढ़ावा देते हैं. 2025 में, ट्रम्प के टैरिफ और विदेश नीति से संबंधित अनिश्चितताएं निवेशकों को सोने की ओर आकर्षित कर सकती हैं, जिससे कीमतें बढ़ सकती हैं.
3. मुद्रास्फीति और ब्याज दरें: सोना मुद्रास्फीति के खिलाफ एक हेज माना जाता है. खासकर ट्रम्प की नीतियों (जैसे टैरिफ और टैक्स कट) के कारण अगर मुद्रास्फीति 2025 में बढ़ती है, तो सोने की मांग बढ़ सकती है. हालांकि, अगर फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचा रखता है या बढ़ाता है, तो सोने की अपील कम हो सकती है, क्योंकि यह ब्याज देने वाला एसेट नहीं है.
4. सेंट्रल बैंक की खरीदारी: खासकर चीन और रूस जैसे देशों के सेंट्रल बैंक सोने की खरीदारी को बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि अपने करेंसी रिजर्व में विविधता लाई जा सके और डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके। 2024 में सेंट्रल बैंकों ने 1,000 टन से अधिक सोना खरीदा और 2025 में भी यह रुझान जारी रहने की उम्मीद है, जो सोने की कीमतों को समर्थन दे सकता है.
5. भारत और चीन में उपभोक्ता मांग: भारत और चीन सोने के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार हैं, जो वैश्विक मांग का 60% से अधिक हिस्सा रखते हैं. भारत में शादी और त्योहारों का मौसम (जैसे दशहरा, दिवाली) और चीन में आर्थिक प्रोत्साहन उपभोक्ता मांग को बढ़ा सकते हैं. हालांकि, ऊंची कीमतें और आर्थिक मंदी उपभोक्ता खर्च को कम कर सकती हैं, जिससे मांग प्रभावित हो सकती है.
डिस्क्लेमर: यहां केवल सामान्य जानकारी दी गई है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें. यह समाचार विभिन्न वित्तीय स्रोतों और बाज़ार डेटा पर आधारित है.
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