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अगर आप राजू, श्याम और बबूराव गणपतराव आप्टे के डायलॉग्स बोलते हुए बड़े हुए हैं, तो आप अच्छे से समझते हैं कि “25 दिन में पैसा डबल” का मतलब क्या होता है.
अब, भले ही मुझे ऐसी कोई स्कीम नहीं मिली (या शायद मैं आपको बता नहीं रहा), लेकिन मैं कुछ ऐसे इक्विटी फ़ंड्स के बारे में ज़रूर जानता हूं, जिन्होंने निवेशकों का पैसा सिर्फ़ तीन साल में दोगुना या उससे भी ज़्यादा कर दिया.
दरअसल, ऐसे फ़ंड्स की कमी नहीं है. स्मॉल-कैप फ़ंड्स की दुनिया में ही 17 फ़ंड- एक्टिव और इंडेक्स दोनों- ऐसे हैं, जिन्होंने तीन साल में आपका पैसा दोगुना कर दिया होता. मिड-कैप की दुनिया में भी 23 ऐसे ऊंची उड़ान भरने वाले फ़ंड हैं.
और, बड़े फ़ंड्स को तो एक मिनट के लिए भूल जाइए. सेक्टोरल और थीमैटिक फ़ंड्स की तो लाइन लगी है- इतने सारे कि न गिनने का मन है, न हिसाब करने की हिम्मत-जिन्होंने आपका पैसा इतनी तेज़ी से दोगुना किया कि आप हैरत में पड़ जाएंगे.
तो फिर इंतज़ार क्यों हो रहा है? बस टॉप 10 स्मॉल-कैप, मिड-कैप या सेक्टोरल फ़ंड्स में निवेश कीजिए और देखिए कि आप बैठे-बिठाए ढेर सारी नकदी के ढेर पर होंगे. या शायद, राख के ढेर पर.
राख का ढेर क्यों?
यहां पर पेंच है: इन फ़ंड्स ने अतीत में निवेशकों की वैल्थ दोगुनी की थी. इसका मतलब ये नहीं कि ये आगे भी ऐसा करेंगे. प्रमुख नियम याद रखें: पिछला प्रदर्शन ≠ भविष्य का प्रदर्शन.
दूसरी बात, इक्विटी फ़ंड्स हमेशा ऊपर की ओर नहीं जाते. ये कभी इधर जाते हैं, कभी उधर और कभी-कभी इतना टेढ़ा-मेढ़ा चलते हैं कि कहीं पहुंचते ही नहीं.
उदाहरण के लिए निफ़्टी PSU बैंक को ही लें. हाल के प्रदर्शन को देखें तो लगता है ये कोई यूनिवर्स बॉस हैं. इस इंडेक्स ने तीन साल के मासिक रोलिंग रिटर्न के आधार पर 30 प्रतिशत से ज़्यादा का सालाना रिटर्न दिया. सीधे शब्दों में कहें तो ऐसे फ़ंड्स ने तीन साल में आपका पैसा दोगुना से ज़्यादा कर दिया होता.
लेकिन लंबे समय में देखें तो तस्वीर बदल जाती है. 10 साल के रोलिंग रिटर्न के आधार पर ये इंडेक्स सिर्फ़ 2 प्रतिशत से थोड़ा ज़्यादा बढ़ा. ये भारत की महंगाई दर से भी कम है. जी हां, आपका वडा पाव भी इससे तेज़ी से महंगा हुआ है.
स्मॉल-कैप फ़ंड्स का भी यही हाल है. एक साल दमदार, अगले साल बुरा हाल (हमने कुछ साल पहले इस बारे में बताया था).
लेकिन सिर्फ़ इन दो कैटेगरी की ही बात क्यों करें? सच कहें तो ऐसा कोई हाई-फ्लाइंग इक्विटी फ़ंड नहीं है, जो बुरे दौर से न गुजरा हो.
आपको क्या करना चाहिए?
अब आता है वो बोरिंग (लेकिन ज़रूरी) हिस्सा. लेकिन निवेश में बोरिंग होना बुरा नहीं है.
सीजन के सबसे चर्चित फ़ंड्स के पीछे भागने के बजाय, खुद से सवाल करें: “मैं कितने समय के लिए निवेश कर रहा हूं?”
फिर उसी हिसाब से प्लान बनाएं.
मिसाल के तौर पर:
- एक साल से कम? लिक्विड फ़ंड्स या हाई-इंटरेस्ट सेविंग्स अकाउंट में रहें.
- 1-3 साल? शॉर्ट-ड्यूरेशन डेट फ़ंड्स पर ग़ौर करें.
- 5-7 साल? मल्टी-कैप या फ़्लेक्सी-कैप फ़ड्स पर विचार करें.
- 7 साल से ज़्यादा? अब आप स्मॉल-कैप और मिड-कैप फ़ंड्स के लिए तैयार हैं-लेकिन तभी, अगर आप उतार-चढ़ाव भरे दौर का आसानी से सामना कर सकते हैं.
याद रखें, सबसे बड़ा “पैसा डबल” करने का फंडा हॉट फ़ंड्स के पीछे भागना नहीं है. बाज़ार में समय बिताने से ही आप टिकाऊ तरीक़े से अमीर बनेंगे. ये सिर्फ़ बाबूराव की समझदारी नहीं, ये निवेश का सबसे बड़ा नियम है.
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