Adobe Stock
जियोपॉलिटिकल टेंशन अक्सर निवेशकों को अपने पोर्टफ़ोलियो पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर करती है. मिडिल ईस्ट में टकराव भड़क गया है, जिसमें इज़राइल ने ईरान पर हमले शुरू कर दिए हैं. इससे निवेशकों की दिलचस्पी फिर से गोल्ड में जग गई है. नतीजतन, गोल्ड की क़ीमतें आज (शुक्रवार, 13 जून) ₹1 लाख के पार पहुंच गई हैं. लेकिन क्या इसका मतलब ये है कि आपको तुरंत गोल्ड फ़ंड्स में निवेश करना चाहिए?
आइए, हालिया ऐतिहासिक संदर्भ और डेटा के आधार पर इसे समझें.
टेंशन के दौर में चमकता है सोना
उतार-चढ़ाव के दौर में सोने को हमेशा से सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है. जब युद्ध के बादल मंडराते हैं या शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव होता है, तो दुनियाभर के निवेशक सोने की ओर रुख करते हैं जिससे इसकी क़ीमतें बढ़ती हैं. पिछले तीन सालों में गोल्ड की क़ीमतों में सालाना 23.09% की शानदार बढ़ोतरी देखी गई है.
पिछले साल भी बुलियन में इसी तरह की तेज़ी देखने को मिली थी, जब मिडिल ईस्ट में सैन्य हमलों की ख़बरों ने ग्लोबल स्टॉक मार्केट को हिला दिया था. इस उतार-चढ़ाव के कारण गोल्ड की क़ीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई थीं. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, मार्च 2024 में गोल्ड की क़ीमत लगभग 66,000 डॉलर प्रति किलो थी, जो महज़ दो महीनों में बढ़कर ₹78,000 डॉलर प्रति किलो तक पहुंच गईं.
क्या अभी गोल्ड फ़ंड्स में निवेश करना सही है?
ये सच है कि हाल के संकटों में सोने ने शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए. पिछले 12 महीनों में गोल्ड की क़ीमतें क़रीब 34% बढ़ चुकी हैं. इसके पीछे कई कारण हैं, जैसे:
- ग्लोबल इक्विटी मार्केट में गिरावट.
- इज़रायल के ईरान पर हमले के बाद तेल आपूर्ति की चिंताओं से कच्चे तेल की क़ीमतों में उछाल.
- बॉन्ड यील्ड में कमी.
- हाल के हफ़्ते और महीनों में अमेरिकी डॉलर का कमज़ोर होना.
इतनी तेज़ बढ़ोतरी के बाद गोल्ड में निवेश करने से आने वाले समय में रिटर्न निराशाजनक हो सकता है. सोने को बड़ा रिटर्न देने वाले निवेश के बजाय एक हेज (जोख़िम कम करने का साधन) के रूप में देखना बेहतर है. आपके पोर्टफ़ोलियो में 5-10% गोल्ड का एलोकेशन वैश्विक उतार-चढ़ाव के समय स्थिरता दे सकता है.
गोल्ड में निवेश कैसे करें?
सोने में निवेश का सबसे आसान तरीक़ा? फ़िज़िकल गोल्ड नहीं, क्योंकि इसमें स्टोरेज और सुरक्षा की चिंताएं हैं. इसके बजाय, नीचे बताए दिए गए दो विकल्प बेहतर हैं:
- गोल्ड म्यूचुअल फ़ंड्स
- गोल्ड ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फ़ंड्स)
ये दोनों एक जैसे लगते हैं और दोनों ही आपको सोने में निवेश करने में मदद करते हैं, लेकिन इनमें कुछ ख़ास अंतर हैं जो आपके रिटर्न पर असर डाल सकता है.
अगर आप गोल्ड म्यूचुअल फ़ंड्स चुनते हैं, तो आप छोटी रक़म से शुरुआत कर सकते हैं और SIP (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) सेट कर सकते हैं. ये निवेशकों के लिए बेहद सुविधाजनक है. लेकिन, इनमें फ़ीस ज़्यादा होती है, क्योंकि आप न सिर्फ़ म्यूचुअल फ़ंड की फ़ीस दे रहे होते हैं, बल्कि उस गोल्ड ETF के लिए भी भुगतान कर रहे हैं जिसमें ये निवेश करता है. इससे आपके रिटर्न का कुछ हिस्सा फ़ीस में चला जाता है.
दूसरी ओर, गोल्ड ETF चलाना सस्ता है, इसलिए आप जो कमाते हैं उसमें से ज़्यादा हिस्सा अपने पास रख सकते हैं. टैक्स के नज़रिए से भी गोल्ड ETF बेहतर हैं, क्योंकि इनमें लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स के लिए होल्डिंग पीरियड कम होता है. हालांकि, गोल्ड ETF में SIP की सुविधा उपलब्ध नहीं है.
हमारा नज़रिया
ख़बरों के आधार पर गोल्ड में निवेश करने की जल्दबाज़ी न करें. लेकिन अगर आपके पोर्टफ़ोलियो में अभी गोल्ड की हिस्सेदारी नहीं है, तो ये 5-10% निवेश करने का सही समय हो सकता है. ये निवेश शॉर्ट-टर्म मुनाफे़ के लिए नहीं, बल्कि आपके पोर्टफ़ोलियो को स्थिरता देने के लिए है.
ये भी पढ़ें: सोना: क्या आपके पोर्टफ़ोलियो में सोने को जगह मिलनी चाहिए?
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
शिकायतों के लिए संपर्क करें: [email protected]



