Aditya Roy/AI-Generated Image
हर कुछ साल में, म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री हमारे सामने एक नया चमकदार प्रोडक्ट लाती है, जो बेहतर रिटर्न देने का वादा करता है. इसका हालिया उदाहरण है स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फ़ंड (SIF), जिसने निवेशकों और वैल्थ मैनेजर्स दोनों में ख़ासा उत्साह पैदा किया है. ये फ़ंड पारंपरिक म्यूचुअल फ़ंड्स और पोर्टफ़ोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज के बीच की खाई को पाटने का दावा करते हैं और म्यूचुअल फ़ंड की रेगुलेटरी सिक्योरिटी के साथ जटिल रणनीतियां पेश करते हैं. मार्केटिंग का असर ज़बरदस्त है. SIFs लॉन्ग-शॉर्ट स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल कर सकते हैं, ख़ास सेक्टर्स में निवेश कर सकते हैं, डेरिवेटिव्स का इस्तेमाल गैर-हेजिंग उद्देश्यों के लिए कर सकते हैं और आम तौर पर वो सब कुछ कर सकते हैं, जो सामान्य म्यूचुअल फ़ंड्स नहीं कर सकते. ₹10 लाख की न्यूनतम निवेश राशि इन्हें एक ख़ास रुतबा देती है और जटिल रणनीतियां बेहतर रिटर्न की संभावना जगाती हैं. हालांकि, निवेश का एक बुनियादी सिद्धांत है, जो इस उत्साह में अक्सर भुला दिया जाता है: ऐसा कोई जादुई फॉर्मूला नहीं है, जो बिना जोखिम के ज़्यादा रिटर्न दे सके. इतनी ही महत्वपूर्ण एक और
ये लेख पहली बार जून 24, 2025 को पब्लिश हुआ.
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