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गोल्ड पिछले तीन सालों से शानदार प्रदर्शन कर रहा है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक़, इस दौरान सोने की क़ीमत में 104.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, यानी क़रीब 27 प्रतिशत सालाना रिटर्न. इस तेज़ी की वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ती जिओ-पॉलिटिकल टेंशन और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच ट्रेड को लेकर टकराव जैसी वैश्विक स्तर पर मौजूद चिंताएं हैं.
ऐसे अनिश्चित दौर में गोल्ड अपनी सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की स्थिति फिर से हासिल करता है. भारतीय निवेशकों के लिए ये न केवल एक जोखिम से बचाव का ज़रिया है, बल्कि अब ये एक डाइवर्सिफ़ाइड पोर्टफ़ोलियो में शामिल करने लायक प्रमुख एसेट के रूप में उभर रहा है.
तो, अगर आप आज गोल्ड में निवेश करना चाहते हैं, तो सही समय के साथ-साथ निवेश का सही तरीक़ा चुनना भी उतना ही ज़रूरी है.
1. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स (SGB)
लंबे समय के निवेशकों के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) हमेशा से गोल्ड का सबसे अच्छा विकल्प रहे हैं.
ये 2.5 प्रतिशत सालाना ब्याज देते हैं, मैच्योरिटी तक होल्ड करने पर कोई कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं लगता और इन्हें भारत सरकार का समर्थन हासिल है. अगर आप कम से कम आठ साल तक निवेश बनाए रखने के लिए तैयार हैं, तो ये अक्सर सबसे समझदारी भरा गोल्ड इन्वेस्टमेंट रहा है.
हालांकि, SGB पहले सबसे अच्छा विकल्प थे. यहां ‘थे’ शब्द पर ध्यान देना ज़रूरी है.
ऐसा क्यों? असल में, नए इश्यू अब उपलब्ध नहीं हैं और सेकेंडरी मार्केट में ज़्यादातर बॉन्ड प्रीमियम पर ट्रेड करते हैं या उनकी लिक्विडिटी कम है. हो सकता है कि आपको मनचाही सीरीज, मनचाही क़ीमत पर न मिले. इन समस्याओं ने SGBs को कई निवेशकों की पहुंच से बाहर कर दिया है. कम से कम अभी के लिए तो ऐसा ही है.
यही वजह है कि अब समय है अगले सबसे अच्छे विकल्पों पर विचार करने का है, जो गोल्ड ETF और गोल्ड FoF (ऐसे फ़ंड जो अन्य फ़ंड्स में निवेश करते हैं) हो सकते हैं.
2. गोल्ड FoF
गोल्ड फ़ंड ऑफ फ़ंड्स (FoF) ऐसे म्यूचुअल फ़ंड हैं जो गोल्ड ETF में निवेश करते हैं. इन्हें ख़रीदना आसान है और इसके लिए डीमैट खाते की ज़रूरत नहीं होती. आप इनमें SIP शुरू कर सकते हैं, ऑनलाइन यूनिट रिडीम कर सकते हैं और इन्हें किसी दूसरे म्यूचुअल फ़ंड की तरह मैनेज कर सकते हैं.
लेकिन सहूलियत की क़ीमत चुकानी पड़ती है. गोल्ड FoF अपने ऊपर एक अतिरिक्त एक्सपेंस रेशियो वसूलते हैं, जो ETF की फ़ीस के अतिरिक्त होता है. उदाहरण के लिए:
- अगर ETF 0.50 प्रतिशत चार्ज लेता है, तो FoF उस पर 0.1 प्रतिशत से 0.65 प्रतिशत तक अतिरिक्त चार्ज ले सकता है (जून 2025 तक).
- ख़ासकर अगर आप लंबे समय के लिए निवेश कर रहे हैं तो समय के साथ ये अतिरिक्त कॉस्ट आपके रिटर्न को कम कर सकती है.
तो, अगर आप कॉस्ट की तुलना में सहूलियत को महत्व नहीं देते, तो आपको कहीं और देखना चाहिए.
3. गोल्ड ETF
गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फ़ंड्स (ETF) गोल्ड में निवेश का एक ज़्यादा किफायती तरीक़ा है.
ये गोल्ड की घरेलू क़ीमतों को ट्रैक करते हैं, SEBI द्वारा रेगुलेटेड होते हैं और आपके डीमैट खाते के जरिए स्टॉक एक्सचेंज पर ख़रीदे-बेचे जा सकते हैं. ज़्यादातर ETF का एक्सपेंस रेशियो केवल 0.31 प्रतिशत से 0.73 प्रतिशत होता है, जो उन्हें आज उपलब्ध सबसे कम कॉस्ट वाला सोने से जुड़ा निवेश विकल्प बनाता है (सिवाय इसके कि आप थोक में फिजिकल गोल्ड ख़रीदें, जिसमें स्टोरेज और प्योरिटी की अपनी समस्याएं हैं).
आप इनमें एकमुश्त निवेश कर सकते हैं, इनके NAV को रोजाना ट्रैक कर सकते हैं और मार्केट के घंटों के दौरान इन्हें बेच सकते हैं. बड़े ETF में लिक्विडिटी आम तौर पर अच्छी होती है और ये उन लोगों के लिए आदर्श हैं जो पहले से ही ब्रोकर के ज़रिए इक्विटी या म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करते हैं.
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ETF में ट्रैकिंग एरर की अहमियत
एक्सपेंस रेशियो कॉस्ट का सबसे स्पष्ट मापदंड है, लेकिन ख़ासकर ETF के लिए ट्रैकिंग एरर भी उतना ही अहम है.
ट्रैकिंग एरर आपको बताता है कि ETF गोल्ड की क़ीमत को कितनी बारीकी से फ़ॉलो करता है. ट्रैकिंग एरर जितना कम होगा, ETF उतना ही बेहतर काम कर रहा है. भले ही गोल्ड की क़ीमत में तेज़ी आए, लेकिन अगर ट्रैकिंग एरर ज़्यादा है, तो ETF ख़राब फंड मैनेजमेंट, टाइमिंग में पिछड़ने या आंतरिक कॉस्ट्स की वजह से कम रिटर्न दे सकता है.
अब जब हम एक्सपेंस रेशियो और ट्रैकिंग एरर की अहमियत को समझ चुके हैं, तो आइए पिछले एक और तीन सालों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले गोल्ड ETF पर ग़ौर करते हैं.
बीते एक साल के 4 टॉप परफॉर्मिंग गोल्ड ETF
| स्कीम | प्रदर्शन (%) | एक्सपेंस रेशियो (%) | ट्रैकिंग एरर* (%) |
| टाटा गोल्ड ETF | 35.28 | 0.38 | 0.41 |
| UTI गोल्ड ETF | 35.22 | 0.48 | 0.14 |
| LIC MF गोल्ड ETF | 34.82 | 0.41 | 0.21 |
| ICICI प्रू गोल्ड ETF | 34.73 | 0.5 | 0.22 |
| स्रोत: इन-हाउस डेटा और AMFI | |||
बीते तीन साल के 4 टॉप परफॉर्मिंग गोल्ड ETF
| स्कीम | प्रदर्शन (%) | एक्सपेंस रेशियो (%) | ट्रैकिंग एरर* (%) | |
| LIC MF गोल्ड ETF | 24.15 | 0.41 | 0.21 | |
| UTI गोल्ड ETF | 24.01 | 0.48 | 0.14 | |
| इन्वेस्को इंडिया गोल्ड ETF | 23.67 | 0.55 | 0.22 | |
| ICICI प्रू गोल्ड ETF | 23.61 | 0.5 | 0.22 | |
| स्रोत: इन-हाउस डेटा और AMFI | ||||
लिक्विडिटी: छिपे हुए, लेकिन दमदार
ETF की बात करें, जिसमें गोल्ड ETF भी शामिल हैं, तो ज़्यादातर निवेशक एक्सपेंस रेशियो और पिछले रिटर्न जैसी चीज़ों पर ध्यान देते हैं. लेकिन जैसा कि वैल्यू रिसर्च ने अक्सर बताया है, लिक्विडिटी उतनी ही अहम है, शायद उससे भी ज़्यादा अहम है.
एक ज़्यादा लिक्विडिटी वाले ETF का मतलब है कि आप बिना ज़रूरत से ज़्यादा क़ीमत चुकाए यूनिट्स को आसानी से ख़रीद-बेच सकते हैं. लेकिन जब लिक्विडिटी कम होती है, तो आपको ज़्यादा बिड-आस्क स्प्रेड (बाइंग और सेलिंग प्राइस की रेंज) का सामना करना पड़ सकता है. इसका मतलब है कि आपको अपना निवेश कम क़ीमत पर बेचना पड़ सकता है.
साफ़ है कि सबसे अच्छा ETF भी कम लिक्विडिटी की वजह से निराश कर सकता है.
इसलिए, गोल्ड ETF में निवेश करने से पहले हमेशा इसके एवरेज डेली ट्रेडिंग वॉल्यूम पर ध्यान दें.
अफसोस की बात है कि ये डेटा हमेशा आसानी से उपलब्ध नहीं होता. इसके लिए अक्सर NSE या BSE की वेबसाइट्स पर खोजबीन करनी पड़ती है.
लेकिन अगर आप NSE और BSE के डेटा में खुद खोजबीन नहीं करना चाहते या लिक्विडिटी को मैन्युअल रूप से ट्रैक नहीं करना चाहते, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र के हमारे एनालिस्ट्स ने आपके लिए ये काम पहले ही कर लिया है. उन्होंने कई क्राइटीरिया के आधार पर लगभग आधा दर्जन गोल्ड ETF को ‘बाई’ की सलाह दी है, जिनमें शामिल हैं:
- एक्सपेंस रेशियो
- ट्रैकिंग एरर
- लिक्विडिटी
- लंबे समय का प्रदर्शन
असल में, गोल्ड जैसे चमकदार बाज़ार में, सिर्फ़ सोना ख़रीदना ही काफ़ी नहीं है, बल्कि इसे समझदारी से ख़रीदना ज़रूरी है.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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