बड़े सवाल

रिटायरमेंट के बाद ₹1 लाख महीना पाने के लिए कितने कॉर्पस की ज़रूरत होगी?

आइए, आंकड़ों से समझते हैं!

रिटायरमेंट में हर महीने ₹1 लाख पाने के लिए कितनी कॉर्पस चाहिए?Aditya Roy/AI-Generated Image

हमने एक 60 साल की महिला के लिए हिसाब लगाया -  साधारण ज़रूरतें और एक सीधा सा मक़सद था: अगले 30 सालों तक हर महीने ₹1 लाख की आमदनी. आइए देखें कि उन्हें असल में कितना पैसा चाहिए और क्यों ज़्यादातर भारतीय रिटायरमेंट को बहुत कम आंकते हैं.
(हम इस लेख में एक गिनती वाला जवाब और एक असल ज़िंदगी से जुड़ा जवाब दोनों दे रहे हैं…)

ज़िंदगी भर बजट ऐसे संभाला जैसे मीरा आप्टे किसी रस्सी पर चल रही हों

श्रीमती मीरा आप्टे ने अपनी ज़िंदगी के ज़्यादातर साल पैसों को बेहद ध्यान से ख़र्च किया. उन्होंने अपनी बेटी को अकेले पाला, 35 साल स्कूल में पढ़ाया और चाहे ट्यूशन फ़ीस हो, बेटी का हॉस्टल या पुणे में उसके पहले फ़्लैट की डाउन पेमेंट हो, हर एक रुपये को ध्यान से ख़र्च किया.

अब जब वो 60 की हो चुकी हैं, बेटी विदेश में सेटल हो चुकी है और उनकी ज़िम्मेदारियां भी लगभग पूरी हो चुकी हैं, तो श्रीमती आप्टे आख़िरकार अपने लिए जीना चाहती हैं. वो कहती हैं, "बस इतना कि सुरक्षित महसूस कर सकूं, कभी-कभी घूम सकूं, सुबह एक अच्छी फ़िल्टर कॉफ़ी का आनंद ले सकूं और कभी ऐसा न लगे कि किसी चीज़ से समझौता करना पड़े."

इसका मतलब है: उन्हें हर महीने ₹1 लाख की इनकम की ज़रूरत होगी.
ना कोई दिखावा, ना कोई फ़िज़ूल ख़र्च. बस इज़्ज़त की ज़िंदगी और अपनी आज़ादी.

लेकिन अगले 30 सालों तक इस सपने को टिकाऊ बनाने के लिए कितना पैसा चाहिए?

जवाब है: ₹2.78 करोड़

ज़्यादातर लोग मानते हैं कि ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट कॉर्पस काफ़ी होता है.
लेकिन आज के दौर में, जहां महंगाई धीरे-धीरे हर चीज़ को महंगा बना रही है, इतनी रक़म बहुत दूर तक नहीं चलती.

हमने श्रीमती आप्टे के लिए सही हिसाब लगाया.

मानकर चलें:

  • आज उन्हें हर महीने ₹1 लाख चाहिए
  • महंगाई हर साल 6% की दर से बढ़ेगी
  • उनका पैसा (आधा इक्विटी में और आधा डेट में) टैक्स के बाद 8% की दर से सालाना बढ़ेगा.

इन सब बातों को जोड़ें तो उन्हें रिटायरमेंट के पहले ही दिन ₹2.78 करोड़ की ज़रूरत होगी, ताकि अगले 30 सालों तक हर महीने ₹1 लाख की आमदनी मिलती रहे -  बिना ये डर रहे कि पैसा कभी भी ख़त्म हो जाएगा.

 "मुझे लगा था ₹1 करोड़ काफ़ी होगा..."

श्रीमती आप्टे की ये सोच बहुत आम है. सच तो ये है कि बहुत से लोग रिटायरमेंट के पास आकर ₹1-2 करोड़ को एक सही आंकड़ा मान लेते हैं -  बिना ये जाने कि ये पैसा वक़्त के साथ क्या-क्या दिलाएगी.

यहां बताया गया है कि उनकी ज़िंदगी में बदलाव न होने पर भी उनके ख़र्च कैसे बढ़ेंगे:

साल सालाना ख़र्चा
1 साल ₹12 लाख
10 साल ₹21.5 लाख
20 साल ₹38.5 लाख
30 साल ₹68.5 लाख

ये है कंपाउंडिंग की ताक़त -  लेकिन इस बार आपके ख़िलाफ़ काम कर रही है.

जैसे-जैसे आपका पैसा बढ़ता है, वैसे ही महंगाई भी बढ़ती है. और आपको हर साल ज़्यादा पैसे निकालने पड़ते हैं. इसीलिए रिटायरमेंट की तैयारी सिर्फ़ बचत करने की नहीं, बल्क़ि समझदारी से पैसे निकालने की भी होती है.

ये भी पढ़ेंः मोमेंटम फ़ंड्स: तेज़ लेकिन खतरनाक हैं, तो फिर कितना निवेश करें?

क्या ₹2.78 करोड़ का कॉर्पस काफ़ी है?

ये ₹2.78 करोड़ के अनुमान ये माना गया है कि श्रीमती आप्टे:

  • कोई बड़ा एकमुश्त ख़र्चा नहीं है
  • उनके पास हेल्थ इंश्योरेंस है
  • वो एक अनुशासित निवेश प्लान पर टिकी रह सकती हैं

लेकिन रिटायरमेंट की राह कभी इतनी सीधी नहीं होती. कुछ भी ऐसा हो सकता है जो पूरे प्लान को बिगाड़ दे:

  • कोई इलाज जो बीमा कवर में नहीं आता
  • उम्र के साथ घर में बदलाव की ज़रूरत
  • बुढ़ापे में किसी देखभाल करने वाले की ज़रूरत
  • किसी पोते या भाई-बहन की मदद करनी पड़े

श्रीमती आप्टे को इन बातों का पूरा अंदाज़ा है.
वो कहती हैं, "एक अकेली औरत होने के नाते, मैं 70 या 80 की उम्र में किसी पर बोझ नहीं बनना चाहती. इसीलिए मैं अभी से सब कुछ अच्छे से तय करना चाहती हूं."

इसीलिए, उन्हें ₹3 करोड़ का टार्गेट रखना चाहिए

₹2.78 करोड़ से उनका रोज़ का ख़र्च तो निकल जाएगा, लेकिन ₹3 करोड़ से उन्हें थोड़ी राहत और भरोसा मिलेगा.

 ₹3 करोड़ की रक़म से वो हर महीने ₹1.1 लाख निकाल सकती हैं, ना कि सिर्फ़ ₹1 लाख जिसकी उन्होंने शुरुआत में योजना बनाई थी.

ये ₹10,000 कोई फ़िजूलख़र्ची के लिए नहीं है बल्क़ि ये एक इमरजेंसी कवर है. वो इस एक्स्ट्रा पैसे को किसी लिक्विड फ़ंड या ऐसे खाते में रख सकती हैं जहां से ज़रूरत पड़ने पर जल्दी निकाला जा सके. अगर ये पैसा 10 सालों तक 5% की दर से भी बढ़े, तो ये इमरजेंसी कॉर्पस ₹15.5 लाख तक पहुंच सकता है, जो किसी भी मुश्किल वक़्त में काम आएगा.

ये भी पढ़ेंः क्या आप आज ₹1 करोड़ के साथ आराम से रिटायर हो सकते हैं?

अगर उनके पास सिर्फ़ ₹1.5 करोड़ हो तो?

अगर उनके पास रिटायरमेंट के समय सिर्फ़ ₹1.5 करोड़ हों, तो भी वो ₹1 लाख महीना पाने की सोच सकती हैं.  लेकिन ये पैसा 30 साल तक नहीं चलेगा. शायद 18 साल तक ही साथ दे.

तब उनके पास दो ही रास्ते बचेंगे:

  • ख़र्च घटाकर ₹50,000 महीना करना
  • अपने पैसे को ज़्यादा रिस्क पर लगाना -  जो कि रिटायर लोगों के लिए सही नहीं होता. रिटायरमेंट में 50% से ज़्यादा इक्विटी में पैसा नहीं लगाना चाहिए.

श्रीमती आप्टे की सीख: रिटायरमेंट कोई एक नंबर नहीं, एक पूरा सफ़र है

उनकी कहानी हमें यही सिखाती है कि रिटायरमेंट का मतलब बड़ी रक़म को हासिल करना नहीं है. ये एक ऐसा सफ़र है जिसमें अपनी ज़िंदगी को इज़्ज़त और इत्मीनान के साथ जीना है.

क्या आप चाहते हैं कि आपका रिटायरमेंट कॉर्पस को कैसे और ज़्यादा काम करने लायक़ बनाया जाए ताकि ये सालाना 8 प्रतिशत की दर से बढ़े और आपको हर महीने ₹1 लाख रुपये की स्थिर कमाई मिले?

वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र के बारे में जानें. हमारा ‘पोर्टफ़ोलियो प्लानर’ सही एसेट मिक्स बनाने में मदद करता है, जबकि 'एनालिस्ट्स चॉइस' आपको सबसे भरोसेमंद फ़ंड्स की ओर इशारा करता है.

चाहे आप रिटायर हो चुके हों या उसकी तैयारी में हों, हमने ये टूल इसीलिए बनाए हैं -  ताकि आप समझदारी से निवेश करें और चैन की नींद लें.

वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र को अभी सब्सक्राइब करें

ये भी पढ़ेंः SIP सही है, लेकिन ये स्ट्रैटेजी देगी और ज़्यादा रिटर्न

ये लेख पहली बार जुलाई 23, 2025 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

20% रिटर्न, हर महीने ₹1 लाख: क्या ऐसी उम्मीद लगाना सही है?

पढ़ने का समय 6 मिनटअभिषेक राणा

मिडिल ईस्ट में युद्ध और असर आपकी जेब पर

पढ़ने का समय 6 मिनटउदयप्रकाश

‘मेरे पोर्टफ़ोलियो में 25 फ़ंड हैं. शुरुआत कहां से करूं?’

पढ़ने का समय 5 मिनटउदयप्रकाश

इमरजेंसी फ़ंड की समस्या

पढ़ने का समय 5 मिनटअमेय सत्यवादी

क्या आपका म्यूचुअल फ़ंड सच में आपके लिए काम कर रहा है?

पढ़ने का समय 5 मिनटअमेय सत्यवादी

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

गैरज़रूरी जटिलता की बीमारी फिर लौटी

गैरज़रूरी जटिलता की बीमारी फिर लौटी

SEBI का नया कैटेगराइज़ेशन से जुड़ा सर्कुलर पुराने मसलों को ठीक करता है, लेकिन इंडस्ट्री को प्रोडक्ट के लिहाज़ से अगले दौर की भीड़ के लिए नया सामान भी दे देता है

दूसरी कैटेगरी