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SIP के ज़रिये हुआ रिकॉर्ड ₹27,000 करोड़ का निवेश, जानें वजह

AMFI के आंकड़ों के अनुसार, जून में नए SIP रजिस्ट्रेशन की संख्या बढ़ी

रिटेल निवेशकों ने जून 2025 में SIP से बनाया रिकॉर्ड!Adobe Stock

जून 2025 में SIP के ज़रिये निवेश का आंकड़ा रिकॉर्ड ₹27,269 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया. ये पिछले साल की तुलना में 30% ज़्यादा है और जून 2021-22 के मुक़ाबले क़रीब 200% की ग्रोथ को दर्शाता है. एसोसिएशन ऑफ़ म्यूचुअल फ़ंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों  से ये बात सामने आई है.

SIP के ज़रिये निवेश में बढ़ोतरी से पता चलता है कि रिटेल निवेशकों का आधार और मैच्योर हो रहा है. महीने-दर-महीने का डेटा इस रफ़्तार को साफ़ दिखाता है:

  •  जून 2025-26: ₹27,269 करोड़
  •  जून 2024-25: ₹21,262 करोड़
  •  जून 2023-24: ₹14,734 करोड़
  •  जून 2022-23: ₹12,276 करोड़
  •  जून 2021-22: ₹9,156 करोड़

इतना ही नहीं, जून 2025 में नए SIP रजिस्ट्रेशन भी तेज़ी से बढ़े और इस महीने में 61.91 लाख नए खाते खोले गए. ये अक्तूबर 2024 के बाद का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है, जो संकेत देता है कि निवेशकों में फिर से अनुशासित निवेश की ओर रुझान बढ़ रहा है.

पहले SIP रजिस्ट्रेशन धीमे क्यों पड़े थे?

  • मुनाफ़ा बुक करने की सोच: शेयर बाज़ार में तेज़ उछाल के बाद कई निवेशकों ने नए SIP रोककर वैल्यूएशन को परखा या मुनाफ़ा बुक कर लिया.
  • टैक्स सीज़न का असर: कुछ निवेशकों ने फ़ाइनेंशियल ईयर के अंत में टैक्स भुगतान के कारण नई SIP टाल दीं.
  • नक़दी संभालकर रखना: कुछ निवेशक अस्थायी तौर पर आर्बिट्राज़ और फ़िक्स्ड-इनकम विकल्पों में चले गए, ताकि ‘वेट-एंड-वॉच’ का सावधानी भरा रुख रख सकें.

लेकिन जून ने माहौल बदल दिया और रिकॉर्ड SIP निवेश दर्ज हुआ.

ये उछाल सिर्फ़ आंकड़ों का खेल नहीं

SIP की कहानी अब सिर्फ़ बढ़ते आकार की नहीं बल्कि बदलते स्ट्रक्चर की भी है. जून 2025 में ₹27,269 करोड़ का रिकॉर्ड इनफ़्लो आया, लेकिन असल बदलाव निवेश के तरीके़ में है.

  • दिशा से ज़्यादा अनुशासन: मार्केट के उतार-चढ़ाव का पीछा करने या बाहर निकलने के बजाय निवेशक अब स्थिरता को चुन रहे हैं.
  • लक्ष्य-आधारित निवेश: कई SIP अब लॉन्ग-टर्म लक्ष्यों जैसे बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट या घर ख़रीदने के लिए हैं, न कि छोटे समय के दांव के लिए. चाहे वो बड़े शहर हों या छोटे क़स्बे, मार्च 2020 के बाद से पांच साल वाली SIP होल्डिंग्स लगभग तीन गुना बढ़ी हैं.
  • सोच में स्थिरता: अब ज़्यादतर निवेशक मानते हैं कि उतार-चढ़ाव कोई कमी नहीं बल्कि SIP की ताक़त है.

कुल मिलाकर, भारतीय रिटेल निवेशक अब मोमेंटम आधारित FOMO से निकलकर ऑटोमेशन के ज़रिए फ़ाइनेंशियल प्लान की ओर बढ़ रहे हैं.

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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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