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JioBlackRock Flexi Cap: फ़ंड की 6 अहम बातें, जिन्हें शायद नहीं जानते होंगे आप

आइए जानते हैं

JioBlackRock Flexi Cap Fund: फ़ंड के 6 अनजाने पहलू

सारांशः भारत के सबसे नए फ़ंड हाउसेज में से एक ने अपनी पहली एक्टिव इक्विटी स्कीम लॉन्च की है और ये कोई सामान्य फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड नहीं है. बिना एक्ज़िट लोड का वादा, AI-आधारित स्टॉक सलेक्शन और ग्लोबल-ग्रेड रिस्क प्लेटफ़ॉर्म जैसी बातें इस नए फ़ंड को अलग बनाती हैं.

भारत के सबसे नए म्यूचुअल फ़ंड हाउसेज में से एक JioBlackRock अपना अगला बड़ा क़दम उठाने जा रहा है. इस साल पैसिव इंडेक्स फ़ंड्स की एक सीरीज़ लॉन्च करने के बाद, अब ये अपनी पहली एक्टिव इक्विटी स्कीम JioBlackRock Flexi Cap Fund लाने जा रहा है. इसका NFO आज (23 सितंबर, 2025) से खुल गया है और 7 अक्तूबर, 2025 को बंद होगा.

निवेशकों की दिलचस्पी को देखते हुए, आइए इस नए फ़ंड की 6 दिलचस्प बातों के बारे में जानते हैं:

1. JioBlackRock का पहला एक्टिव इक्विटी फ़ंड

अब तक JioBlackRock पूरी तरह पैसिव प्रोडक्ट्स पर ही केंद्रित रहा है. कंपनी ने आठ इंडेक्स फ़ंड लॉन्च किए थे, जिनमें से चार इक्विटी फ़ंड्स थे. इनमें शामिल हैं:

  • Nifty 50 Index Fund (भारत की 50 सबसे बड़ी कंपनियों को ट्रैक करता है),
  • Nifty Next 50 Index Fund (51 से 100 रैंक वाली कंपनियों को ट्रैक करता है),
  • Nifty Midcap 150 Fund (मिड-कैप इंडेक्स को ट्रैक करता है) और
  • Nifty Smallcap 250 Fund (स्मॉल-कैप इंडेक्स को ट्रैक करता है).

लेकिन इस बार मामला अलग है. इंडेक्स फ़ंड्स में पैसा सीधे बाज़ार की चाल को कॉपी करता है, जबकि एक्टिव फ़ंड में फ़ंड मैनेजर खुद स्टॉक्स चुनता है ताकि बेंचमार्क को मात दी जा सके.

नया JioBlackRock Flexi Cap Fund कंपनी का एक्टिव इक्विटी मैनेजमेंट में पहला क़दम है.

2. फ़ंड REITs और InvITs में निवेश कर सकता है

फ़्लेक्सी-कैप कैटेगरी निवेशकों में सबसे लोकप्रिय है, क्योंकि इसमें बिना रोक-टोक लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप कंपनियों में निवेश किया जा सकता है.

SEBI के नियमों के मुताबिक़, एक फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड को 65–100% पैसा इक्विटी में, 0–35% डेट में और 10% तक REITs और InvITs में लगाना होता है.

अहम बात:

  • REITs (Real Estate Investment Trusts) ऐसे रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स का स्वामित्व रखते हैं और ऑपरेट करते हैं जो इनकम पैदा करते हैं. इनमें ऑफ़िस और मॉल आते हैं.
  • InvITs (Infrastructure Investment Trusts) सड़कें, पावर ट्रांसमिशन लाइन या टेलीकॉम टावर्स जैसे इन्फ़्रास्ट्रक्चर एसेट्स को अपने पास रखते हैं.

इन दोनों के ज़रिए निवेशक को रेंट या टोल की तरह रेगुलर कैश फ़्लो मिलता है, साथ ही मार्केट-लिंक्ड ग्रोथ का फ़ायदा भी.

JioBlackRock Flexi Cap Fund को भी डाइवर्सिफ़िकेशन के लिए इन इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करने का विकल्प मिलेगा.

3. कोई एक्ज़िट लोड नहीं: एक अहम पहल

इस फ़ंड की सबसे ताज़गी भरी ख़ासियत है - इसमें कोई एक्ज़िट लोड नहीं है.

आमतौर पर म्यूचुअल फ़ंड्स जल्दी पैसा निकालने पर (अधिकतर एक साल से पहले) एक्ज़िट लोड लगाते हैं ताकि शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग को रोका जा सके. अभी ज़्यादातर एक्ज़िट लोड तीन तरीक़े से लागू होते हैं:

  • 360 या 365 दिनों से पहले रिडेम्शन पर 1%,
  • 90 दिनों के अंदर 1%, या
  • 180–365 दिनों में निवेश की 10% यूनिट्स से ज़्यादा निकालने पर 1%.

मतलब, जल्दी निकलने पर निवेशक पहले ही शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्स देता है. उस पर एक्ज़िट लोड जोड़ दिया जाए तो डबल झटका.

एक्ज़िट लोड हटाकर, JioBlackRock ऐसा करने वाला दूसरा फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड (Navi के बाद) बन गया है.

4. विदेश में निवेश नहीं होगा

कुछ फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स जैसे Parag Parikh Flexi Cap अपने पोर्टफ़ोलियो का हिस्सा ग्लोबल इक्विटीज़ में लगाते हैं. लेकिन JioBlackRock की ये स्कीम ऐसा नहीं करेगी. इसका पोर्टफ़ोलियो सिर्फ़ भारतीय इक्विटीज़, डेट और घरेलू REITs/InvITs तक सीमित रहेगा.

5. स्टॉक्स चुनने के लिए AI का इस्तेमाल

यहीं पर JioBlackRock अपनी अलग पहचान बनाना चाहता है. फ़ंड इंसानी एक्सपर्टीज़ और टेक्नोलॉजी को मिलाकर पोर्टफ़ोलियो बनाएगा.

सरल शब्दों में:

  • BlackRock अपने सिग्नल्स रिसर्च स्कोर लाता है जो बिग डेटा, AI और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करते हैं. ये हज़ारों डेटा पॉइंट्स को एनालाइज़ करते हैं, जिनमें कंपनी फ़ाइनेंशियल्स, वैल्यूएशन, मार्केट सेंटीमेंट और सोशल मीडिया की बातें तक शामिल हैं.
  • ये सिग्नल्स चार कैटेगरी में बांटे जाते हैं: वैल्यूएशन (स्टॉक सस्ता है या नहीं?), क्वालिटी (बिज़नेस कितना मज़बूत और टिकाऊ है?), सेंटीमेंट (बाज़ार का मूड कैसा है?) और फ़ंडामेंटल मोमेंटम (अर्निंग्स और रेवेन्यू बढ़ रहे हैं या नहीं?).
  • फ़ंड मैनेजर इन इनसाइट्स का इस्तेमाल करके स्टॉक्स शॉर्टलिस्ट करता है, रिस्क मॉनिटर करता है और मार्केट में उतार-चढ़ाव होने पर एक्सपोज़र एडजस्ट करता है.

इसे ऐसे सोचिए जैसे कोई रिसर्च असिस्टेंट हर दिन हर न्यूज़ रिपोर्ट, अर्निंग्स कॉल ट्रांस्क्रिप्ट और एनालिस्ट नोट पढ़कर फ़ंड मैनेजर को सबसे बेहतर मौक़ों की शॉर्टलिस्ट दे रहा हो.

पर्दे के पीछे, पोर्टफ़ोलियो Aladdin पर चलेगा. ये BlackRock का पावरफ़ुल रिस्क और पोर्टफ़ोलियो मैनेजमेंट प्लेटफ़ॉर्म है जिसे दुनिया के बड़े एसेट मैनेजर्स इस्तेमाल करते हैं. ये JioBlackRock को एडवांस्ड एनालिटिक्स और रिस्क कंट्रोल्स देता है, जो कम ही भारतीय AMCs के पास है.

हालांकि, Aladdin भारतीय मार्केट में कितना कामयाब होगा, ये तो वक़्त ही बताएगा.

6. दो नए फ़ंड मैनेजर्स की कमान

इस स्कीम को तन्वी कचेरिया और साहिल चौधरी मिलकर मैनेज करेंगे.

तन्वी एक CFA चार्टरहोल्डर हैं, जो 14 साल का अनुभव रखती हैं और BlackRock Financial Management और Jio Financial Services में काम कर चुकी हैं. अभी वे चार इंडेक्स फ़ंड्स मैनेज करती हैं, लेकिन ये उनका पहला एक्टिवली मैनेज्ड फ़ंड होगा, जहां उनके स्टॉक-पिकिंग स्किल्स की परीक्षा होगी.

उनके को-मैनेजर साहिल चौधरी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड रखते हैं और सूचना एवं संचार तकनीक में अनुभव रखते हैं.

निवेश करना चाहिए या नहीं?

फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स को कई निवेशक पोर्टफ़ोलियो का कोर एलोकेशन मानते हैं क्योंकि इनमें मार्केट-कैप्स के बीच नैचुरल डाइवर्सिफ़िकेशन मिलता है. JioBlackRock का ये ऑफ़रिंग ज़ीरो एक्ज़िट लोड, टेक-इनेबल्ड रिसर्च और ग्लोबल रिस्क मैनेजमेंट प्लेटफ़ॉर्म जैसी नई बातें लेकर आया है.

लेकिन ये एक बिल्कुल नया फ़ंड है, जिसका कोई ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है. इसलिए बेहतर है कि पहले उन फ़ंड्स को प्राथमिकता दी जाए जो कई मार्केट साइकल्स से गुज़र चुके हैं और बुल व बियर दोनों फ़ेज़ में डिलीवर कर चुके हैं.

अगर फिर भी इसमें निवेश करना हो तो पोर्टफ़ोलियो का 5% से ज़्यादा एलोकेशन इसमें न करें और तभी करें जब एक भरोसेमंद फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में अपना कोर एलोकेशन पहले से बना लिया हो.

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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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