फंड वायर

क्या आपके पोर्टफ़ोलियो में वैल्यू फ़ंड होना चाहिए?

आइए पता करते हैं

आइए पता करते हैं

सारांशः क्या आपके पास कोई वैल्यू फ़ंड होना चाहिए? यह जानने के लिए इस एनालेसिस को पढ़ें और देखें कि डेटा उनके लॉन्ग-टर्म फ़ायदे, उनके निराशाजनक दौर और एक डाइवर्सिफ़ाइड पोर्टफ़ोलियो में उनकी भूमिका के बारे में क्या कहता है.

यह एक ऐसा सवाल है जो किसी को भी सोच में डाल दे: जब आप फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में निवेश कर सकते हैं तो वैल्यू फ़ंड में क्यों करें? दोनों को किसी भी मार्केट-कैप सेगमेंट में कोई भी स्टॉक चुनने की लगभग एक जैसी आज़ादी है. यानि दोनों के पास एक बड़ा मैदान है और दोनों मार्केट के हालात के हिसाब से स्टॉक चुनते हैं.

पहली नज़र में ऐसा लग सकता है कि वैल्यू फ़ंड किसी ब्रॉड-बेस्ड कैटेगरी से बहुत अलग नहीं हैं. और इसीलिए इन्हें पोर्टफ़ोलियो में रखना ज़्यादा मायने नहीं रखता.

लेकिन ब्रॉडर मार्केट के मुक़ाबले इनके रिटर्न और आउटपरफ़ॉर्मेंस की हिस्ट्री कुछ और ही कहती है. देखते हैं कैसे.

वैल्यू फ़ंड सिर्फ़ एक और फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड नहीं है

वैल्यू फ़ंड वैल्यू स्टाइल ऑफ़ इन्वेस्टिंग पर चलते हैं. आसान शब्दों में, फ़ंड मैनेजर ऐसे स्टॉक चुनते हैं जो साइज़ या मार्केट कैटेगरी से परे उनकी असली वैल्यू से कम क़ीमत पर मिल रहे हों. ये ऐसी कंपनियां हो सकती हैं जो मुश्क़िल दौर से गुज़र रही हों, ऐसे सेक्टर से हो सकती हैं जो फ़ैशन से बाहर हो गए हों या ऐसे बिज़नेस हो सकते हैं जो इतने बोरिंग हों कि किसी की नज़र न पड़े.

सोच सीधी है. ये स्टॉक जितनी क़ीमत पर ट्रेड हो रहे हैं उससे ज़्यादा के हक़दार हैं और देर-सबेर मार्केट इस बात को समझेगा.

यही नज़रिया वैल्यू फ़ंड को फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड से अलग बनाता है, भले ही दोनों मार्केट में कहीं भी निवेश कर सकते हों. यह फ़र्क़ उनकी होल्डिंग्स में और समय के साथ उनके रिटर्न में भी दिखता है.

फ़र्क़ कहां दिखने लगता है

एक औसत वैल्यू फ़ंड अपनी होल्डिंग का सिर्फ़ 33% औसत फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड के साथ शेयर करता है. यानी उसके पास जो हर तीन में से दो स्टॉक हैं वो एक आम फ़्लेक्सी-कैप में नहीं मिलते.

इसका मतलब है कि अगर आप पोर्टफ़ोलियो में वैल्यू फ़ंड रखते हैं तो आपको फ़्लेक्सी-कैप जैसे किसी ब्रॉड-बेस्ड फ़ंड की तरह असल डाइवर्सिफ़िकेशन मिलती है. यह डाइवर्सिफ़िकेशन उनके रिटर्न में भी नज़र आता है.

औसत वैल्यू फ़ंड ने 2013 से अब तक के सभी संभावित पांच साल के होल्डिंग पीरियड में क़रीब 50% बार Nifty 500 यानी ब्रॉडर मार्केट को पीछे छोड़ा है. औसत फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड ने यह एक चौथाई से भी कम बार किया.

वैल्यू फ़ंड ने सभी पांच साल के पीरियड में औसत सालाना रिटर्न भी 15.7% दिया जबकि फ़्लेक्सी-कैप का 14.4% रहा. तीन साल के होल्डिंग पीरियड पर यह फ़र्क़ और बड़ा हो जाता है. नीचे दी गई टेबल देखें:

ब्रॉडर कैटेगरी से आगे

औसत वैल्यू फ़ंड 3 और 5 साल दोनों रोलिंग पीरियड में आगे रहा

समय अवधि एवरेज वैल्यू फ़ंड एवरेज फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड
3 साल का औसत रोलिंग रिटर्न (% सालाना) 16.3 14.8
5 साल का औसत रोलिंग रिटर्न (% सालाना) 15.7 14.4
डेटा कैटेगरी औसत पर आधारित; जनवरी 2013 से मार्च 2026 की अवधि के लिए.

लॉन्ग-टर्म बढ़त है, लेकिन सफ़र आसान नहीं

इस लॉन्ग-टर्म बढ़त का मतलब यह नहीं कि वैल्यू फ़ंड हर बार जीतते हैं. असल में ये कई-कई साल पीछे रह सकते हैं.

इसे और साफ़ देखने के लिए हमने अप्रैल 2019 से जून 2023 के बीच ख़त्म होने वाले हर पांच साल के रोलिंग रिटर्न देखे. ये वो दौर था जब महामारी की गिरावट के बाद मार्केट ग्रोथ और मोमेंटम के चलते तेज़ी से चला. यानी इस दौरान हर तारीख़ पिछले पांच साल में मिले सालाना रिटर्न को कैप्चर करती है.

इन सभी डेटा पॉइंट में, औसत फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड ने 10.9% सालाना रिटर्न दिया जबकि औसत वैल्यू फ़ंड 9.4% पर रहा. कागज़ पर 1.5 पर्सेंटेज पॉइंट का यह फ़र्क़ बड़ा नहीं लगता लेकिन कई सालों में यह निवेशक का धैर्य तोड़ने के लिए काफ़ी है.

यही वजह है कि वैल्यू इन्वेस्टिंग सबके लिए नहीं है. स्टाइल लीडरशिप कभी एक जगह नहीं टिकती. कुछ दौर ऐसे आते हैं जब वो स्टॉक फिर से चर्चा में आते हैं, जो सस्ते हों और जिनकी अनदेखी की जा रही हो. ऐसे में वैल्यू फ़ंड अच्छा करते हैं. लेकिन लंबे दौर ऐसे भी आते हैं जब निवेशक तेज़ ग्रोथ और मज़बूत मोमेंटम के पीछे भागते हैं और उन दौर में वैल्यू फ़ंड सुस्त और निराशाजनक लग सकते हैं.

यह कैटेगरी की कोई कमज़ोरी नहीं है. यह इस स्ट्रैटेजी का तरीक़ा है. वैल्यू फ़ंड उन गलत क़ीमत पर बिक रहे बिज़नेस को मार्केट द्वारा पहचाने जाने का इंतज़ार करते हैं और यह ज़्यादातर निवेशकों की उम्मीद से काफ़ी ज़्यादा वक़्त ले सकता है.

तो क्या आपको वैल्यू फ़ंड रखना चाहिए?

2013 से पांच साल के रोलिंग डेटा बताते हैं कि लॉन्ग-टर्म में औसत वैल्यू फ़ंड ने औसत फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड से बेहतर किया है. लेकिन यह फ़ायदा एक शर्त के साथ आता है: आपको बिना भरोसा गंवाए लंबे अंडरपरफ़ॉर्मेंस के दौर में टिके रहने की तैयारी होनी चाहिए.

इसीलिए वैल्यू फ़ंड कम से कम 7 साल के होराइज़न वाले और बिना घबराए अस्थायी अंडरपरफ़ॉर्मेंस देख सकने वाले निवेशकों के लिए सही हैं.

ये पोर्टफ़ोलियो की नींव नहीं, सैटेलाइट एलोकेशन के तौर पर बेहतर काम करते हैं. आपके इक्विटी एलोकेशन का 10 से 15% हिस्सा काफ़ी है. नींव तो फ़्लेक्सी-कैप या मल्टी-कैप जैसी ब्रॉडर कैटेगरी से ही आनी चाहिए.

अगर आपने वैल्यू फ़ंड जोड़ने का फ़ैसला कर लिया है तो असली मुश्क़िल सवाल यह है: कौन सा? इसके लिए वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र देखें. हमारे एनालिस्ट फ़ंड को शॉर्ट-टर्म रिटर्न से आगे जाकर परखते हैं, पोर्टफ़ोलियो स्ट्रैटेजी, कंसिस्टेंसी, जोख़िम और आपके पूरे पोर्टफ़ोलियो में फ़ंड कितना सही बैठेगा, यह सब देखते हैं. ताकि आप ज़्यादा साफ़ नज़रिए और यक़ीन के साथ चुन सकें.

आज ही फ़ंड एडवाइज़र आज़माएं!

ये भी पढ़ें: मल्टीबैगर का पीछा करने से फ़्लेक्सी-कैप के रिटर्न क्यों नहीं बनते?

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

अब सिर्फ़ एक इंटरनेशनल फ़ंड में ही नई SIP हो सकती है

पढ़ने का समय 7 मिनटआकार रस्तोगी

रोज़ नहीं, साल में एक बार देखें

पढ़ने का समय 3 मिनटधीरेंद्र कुमार down-arrow-icon

SBI Funds Management IPO: AUM नहीं, फ़ी इंजन की क़ीमत लगाइए

पढ़ने का समय 7 मिनटLekisha Katyal

PSU स्टॉक्स की रैली का फ़ायदा उठाने का पैसिव तरीक़ा

पढ़ने का समय 7 मिनटअभिषेक राणा

आपको लगता है आपके पास 3 फ़ंड हैं, हो सकता है आपके पास एक ही हो

पढ़ने का समय 6 मिनटसिद्धांत माधव जोशी

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

रोज़ नहीं, साल में एक बार देखें

रोज़ नहीं, साल में एक बार देखें

अपने पोर्टफ़ोलियो को रोज़ लाल-हरे रंग में देखने के बजाय, साल में सिर्फ़ एक बार ध्यान से देखना काफ़ी है

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी