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सारांशः SBI Mutual Fund का नया लॉन्च SEBI के SIF स्ट्रक्चर के अंदर इक्विटी, डेट और डेरिवेटिव्स को एक स्ट्रैटेजी में जोड़ता है. कॉलर-बेस्ड अप्रोच और इक्विटी टैक्सेशन के साथ ये फ़ंड स्मूद रिटर्न देने का वादा करता है. पर क्या ये हर निवेशक के लिए सही है? इस आर्टिकल में फ़ंड की पूरी जानकारी है - किसे इसे देखना चाहिए और पोर्टफ़ोलियो में ये कहां फिट बैठता है.
SBI Mutual Fund 1 अक्टूबर 2025 को Magnum Hybrid Long Short Fund लॉन्च करने जा रहा है. ये इसकी पहली स्कीम होगी जो नए स्पेशलाइज़्ड इन्वेस्टमेंट फ़ंड (SIF) स्ट्रक्चर के तहत आएगी. ऑफ़र 15 अक्टूबर तक खुला रहेगा. स्कीम इक्विटी, डेट और डेरिवेटिव्स को ऐसे कॉम्बिनेशन में रखेगी जिससे लो-वॉलेटिलिटी और स्टेडी रिटर्न मिलें. इसका बेंचमार्क Nifty 50 Hybrid Composite Debt 50:50 Index TRI होगा.
यहां देखें फ़ंड क्या ऑफ़र करता है और किसके लिए बना है.
Magnum Hybrid Long Short Fund: पोर्टफ़ोलियो स्ट्रक्चर
Magnum Hybrid Long Short Fund अपने पोर्टफ़ोलियो का बड़ा हिस्सा, लगभग 65-75% इक्विटी में लगाएगा. ये ज़्यादातर टॉप 200 कंपनियों में होगा. इनमें से 100 स्टॉक्स को उनके डेरिवेटिव मार्केट की लिक्विडिटी के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जाएगा. इस इक्विटी एक्सपोज़र का बड़ा हिस्सा (55-75%) हेज किया जाएगा ताकि रिस्क कम हो सके, जबकि 25% तक अनहेंज्ड रखा जा सकता है टैक्टिकल मौक़ों के लिए.
डेट साइड में, 25-35% पोर्टफ़ोलियो हाई-क्वालिटी इंस्ट्रूमेंट्स जैसे गवर्नमेंट सिक्योरिटीज़ और AAA-रेटेड बॉन्ड्स में लगाया जाएगा, ताकि स्थिर इनकम मिल सके. ये ब्याज दर की मूवमेंट्स पर दांव लगाने के बजाय सेफ़ इनकम पर फ़ोकस करेगा. फ़ंड के पास 10% तक REITs (Real Estate Investment Trusts) और InvITs (Infrastructure Investment Trusts) में लगाने का ऑप्शन भी होगा.
कॉलर स्ट्रैटेजी है इसका कोर इंजन
इस स्कीम का असली इंजन है कॉलर स्ट्रैटेजी. इसमें फ़ंड एक साथ पुट ऑप्शंस ख़रीदता है ताकि मार्केट गिरने पर लॉस लिमिट हो और कॉल ऑप्शंस बेचता है ताकि ज़्यादा इनकम बने. असल में, ये नुक़सान और मुनाफ़े इसमें गेन और लॉस दोनों कैप हो जाते हैं.
फ़्लैट मार्केट में ये अप्रोच स्टेडी इनकम बनाने में मदद करती है और बड़े ड्रॉडाउन से बचाती है. इसमें मैक्सिमम अपसाइड पकड़ने से ज़्यादा फ़ोकस एक स्मूद इन्वेस्टमेंट जर्नी और कंट्रोल्ड रिस्क पर है.
स्ट्रक्चर PMS जैसा, टैक्सेशन म्यूचुअल फ़ंड जैसा
फ़ंड में एंट्री बार काफ़ी हाई है - कम से कम ₹10 लाख का इन्वेस्टमेंट ज़रूरी है क्योंकि ये SIF फ्रेमवर्क के तहत आता है. लेकिन टैक्सेशन इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड जैसा ही है. लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन पर 12.5% टैक्स लगता है, सालाना ₹1.25 लाख तक का एक्सेम्प्शन है.
इस वजह से ये ख़ास तौर पर हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और फ़ैमिली ऑफ़िसेज़ के लिए आकर्षक है, जिन्हें PMS जैसी फ़्लेक्सिबिलिटी चाहिए लेकिन टैक्स-एफ़िशिएंसी म्यूचुअल फ़ंड जैसी.
फ़ंड मैनेजर
फ़ंड को गौरव मेहता मैनेज कर रहे हैं, जो SBI Mutual Fund में Head - SIF, Equity हैं. मेहता 2018 में SBI में इक्विटी एनालिस्ट के तौर पर जुड़े, फिर PMS स्ट्रैटेजीज़ को लीड किया और 2021 में CIO - Alternatives (Equity) बने. जुलाई 2025 से वो SIF डिवीज़न को लीड कर रहे हैं. स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट्स और इक्विटी रिसर्च में उनकी विशेषज्ञता उन्हें ऐसे फ़ंड को मैनेज करने के लिए उपयुक्त बनाती है जिसमें डेरिवेटिव्स का बड़ा रोल है.
क्या इसमें निवेश करना चाहिए?
ये कोई वैनिला म्यूचुअल फ़ंड नहीं है. इसकी डेरिवेटिव-ड्रिवन स्ट्रक्चर, हाई मिनिमम इन्वेस्टमेंट और टैक्टिकल अप्रोच इसे उन इन्वेस्टर्स के लिए बेहतर बनाती है जो पहले से ऐसे स्ट्रैटेजीज़ से वाक़िफ़ हैं.
आदर्श रूप से, इसे पोर्टफ़ोलियो का 5-10% से ज़्यादा हिस्सा नहीं बनाना चाहिए और इसे कोर होल्डिंग की बजाय सैटेलाइट एलोकेशन की तरह रखना चाहिए.
तय नहीं कर पा रहे कौन सा फ़ंड पोर्टफ़ोलियो में फिट बैठेगा?
वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र मदद कर सकता है. गोल्स और रिस्क प्रोफ़ाइल के आधार पर क्यूरेटेड फ़ंड रिकमेंडेशंस के साथ ये अच्छी तरह बैलेंस्ड पोर्टफ़ोलियो बनाने में गाइड करता है और तय करने में मदद करता है कि कोई स्पेशलाइज़्ड फ़ंड जैसे Magnum Hybrid Long Short Fund को जगह मिलनी चाहिए या नहीं.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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