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सारांशः Lenskart के बढ़े हुए वैल्यूएशन ने बहस की लहरें पैदा कर दी हैं. लेकिन इस उत्साह के पीछे एक तेज़ी से बढ़ता बाज़ार, टेक-आधारित स्केलेबल मॉडल और ऐसा कॉस्ट स्ट्रक्चर है जिसे भविष्य के ऑपरेटिंग लीवरेज को ध्यान में रखकर बनाया गया है. असल सवाल ये नहीं है कि Lenskart का शेयर आज महंगा है या नहीं-बल्कि ये है कि क्या ये अपनी प्रीमियम वैल्यू को सही ठहराने के लिए पर्याप्त तेज़ी से बढ़ सकता है.
हर कोई Lenskart के “बेतुके” वैल्यूएशन की चर्चा कर रहा था. इसका P/E इतना ज़्यादा क्यों है? क्या ये जायज़ है? क्या इन्वेस्टमेंट बैंकर्स और निवेशक इतने अविवेकपूर्ण हैं कि ये क़ीमत उस स्तर तक पहुंच गई?
फिर भी, जब इश्यू खुला, तो ये कई गुना सब्सक्राइब हुआ. बाज़ार में चिंता और उत्साह-दोनों का ये विरोधाभास साफ़ दिखा. लेकिन इस शोर-शराबे के बीच, हम दो बुनियादी सवालों पर लौटना चाहते थे:
- पहला, ऐसी कंपनी के वैल्यूएशन का आकलन कैसे करें जो रिटेल और टेक, दोनों की दुनिया -चश्मे के फ्रेम से लेकर SaaS जैसी स्केलेबिलिटी तक-में कदम रखती है?
- दूसरा, निवेश से पहले Lenskart को समझने, ट्रैक करने और मूल्यांकन करने के लिए किन प्रमुख पहलुओं को देखना चाहिए?
1. रेवेन्यू: असली ‘ख़ुराक’ है ग्रोथ
Lenskart के 260 गुना P/E को अभी भूल जाइए. 20 का P/E भी तब तक समझ में नहीं आएगा, जब तक ग्रोथ न हो. लेकिन Lenskart के मामले में ग्रोथ मौजूद है-और आगे लंबा रास्ता भी है.
Lenskart को एक सामान्य रिटेलर से अलग बनाता है उसका बढ़ता हुआ एड्रेसेबल मार्केट और वो स्थिति जहां ये कंपनी तीनों -बढ़ती हेल्थकेयर जागरूकता, लाइफ़स्टाइल ख़र्च और डिजिटल सहूलियत-के संगम पर खड़ी है.
इसकी ग्रोथ को आगे बढ़ाने वाले कारक स्पष्ट हैं. भारत में ख़ासकर युवा आबादी में रिफ्रैक्टिव एरर्स-निकट दृष्टि, दूर दृष्टि और ऐस्टिग्मैटिज़्म-की प्रचलन दर तेज़ी से बढ़ रही है, जो स्क्रीन पर ज़्यादा समय बिताती है (FY20 से FY25 के बीच 21% से 39% तक बढ़ोतरी). इसके बावजूद प्रिस्क्रिप्शन आईवियर की पैठ भारत में वैश्विक मानकों से काफ़ी कम है. ये एक सेवाओं की कमी वाला अनोखा मार्केट है, जहां ढांचागत समस्याएं मौजूद हैं.
लेंसकार्ट को क्या आगे बढ़ा रहा है?
संगठित क्षेत्र में D2C कंपनियों के तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद है
| क्षेत्र | भारत | दक्षिण-पूर्व एशिया | जापान | मध्य पूर्व |
|---|---|---|---|---|
| रिफ्रैक्टिव एरर्स का प्रचलन (%) फ़ाइनेंशियल ईयर 25 | 53 | 65 | 68 | 40 |
| रिफ्रैक्टिव एरर्स का प्रचलन (%) फ़ाइनेंशियल ईयर 30P | 62 | 70 | 71 | 42 |
| प्रिस्क्रिप्शन चश्मों की पहुंच (%) फ़ाइनेंशियल ईयर 25 | 35 | 40 | 69 | 60 |
| प्रिस्क्रिप्शन चश्मों की पहुंच (%) फ़ाइनेंशियल ईयर 30P | 41 | 44 | 64 | 60 |
| प्रिस्क्रिप्शन चश्मों का संगठित हिस्सा (%) फ़ाइनेंशियल ईयर 25 | 23 | 28-30 | 53 | 55-60 |
| प्रिस्क्रिप्शन चश्मों का संगठित हिस्सा (%) फ़ाइनेंशियल ईयर 30P | 30 | 35-40 | 59 | 67-72 |
| स्रोत: लेंसकार्ट RHP | ||||
इसके अलावा, लाइफ़स्टाइल अपग्रेड्स और फैशन को लेकर सचेत उपभोक्ताओं की वजह से एवरेज सेलिंग प्राइस (ASP) भी बढ़ रहा है. आईवियर अब चुपचाप एक मेडिकल ज़रूरत से लाइफ़स्टाइल कैटेगरी में बदल चुका है. इससे Lenskart को बेहतर डिज़ाइन और ब्रांड वैल्यू के ज़रिए प्राइसिंग पावर मिलती है. साथ ही, संगठित रिटेल और D2C की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जो अब भी अत्यधिक बिखरे हुए असंगठित मार्केट से हिस्सा हासिल कर रही है.
कंपनी के प्रॉस्पेक्टस में बताए गए अनुमानों के अनुसार, D2C आईवियर बाज़ार विश्व स्तर पर तेज़ी से बढ़ेगा:
- भारत में 22–28%
- जापान में 7–10%
- दक्षिण-पूर्व एशिया में 10–15%
- मध्य पूर्व में 15–20%
इन सभी फ़ैक्टर्स को जोड़ें तो Lenskart के पास 20–25% कुल ग्रोथ के लिए पर्याप्त संभावनाएं हैं-वो भी सामान्य परिस्थितियों में. और, यदि कंपनी अपनी टेक-सक्षम ओम्नी-चैनल रणनीति और विस्तृत उत्पाद रेंज के जरिए बेहतर निष्पादन करती है, तो ग्रोथ इन औसतों को भी पीछे छोड़ सकती है.
इसलिए फ़िलहाल सवाल ये नहीं है कि रेवेन्यू में ग्रोथ होगी या नहीं-बल्कि ये है कि कितनी तेज़ होगी.
2. कॉस्ट: स्केल बनाने की कीमत
रिटेल-टेक हाइब्रिड व्यवसायों के लिए प्रॉफिटेबिलिटी एक ही समीकरण पर निर्भर करती है-ख़र्चों में बढ़ोतरी, रेवेन्यू की तुलना में धीमी होनी चाहिए. Lenskart इस संतुलन को अभी स्थापित कर रही है.
कंपनी के P&L का गहराई से विश्लेषण करने पर दिखता है कि रेवेन्यू की तुलना में कर्मचारी लागत, डिप्रिशिएशन और फ़ाइनेंस कॉस्ट (विशेषकर लीज़ रेंटल्स) तेज़ी से बढ़ रहे हैं. पहली नज़र में ये ख़ासकर ऐसी कंपनी के लिए चिंताजनक लग सकता है, जो हाल ही में प्रॉफ़िटेबल हुई है. लेकिन ये फिजूलख़र्ची नहीं हैं-ये सही तरह के निवेश हैं.
Lenskart ने इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और टेक्नोलॉजी पर तेज़ी से खर्च किया है. उसके कई स्टोर पिछले तीन से चार वर्षों में ही खुले हैं-और अभी ब्रेकईवन पर नहीं पहुंचे. सभी रिटेल मॉडलों की तरह, नए स्टोर्स को परिपक्व होने में समय लगता है. फुटफॉल धीरे-धीरे बढ़ता है, शुरुआत में कस्टमर एग्विजिशन कॉस्ट ज़्यादा होती है और स्केल इकोनॉमी तभी आती है जब स्टोर मैच्योर हो जाते हैं.
जैसे-जैसे ये स्टोर स्थिर होंगे, सेम-स्टोर प्रॉफ़िटेबिलिटी और ऑपरेटिंग लीवरेज स्वतः मार्जिन बढ़ाएंगे-वो भी समान अनुपात में लागत में बढ़ोतरी के बिना.
लेंसकार्ट के ग्रोथ इन्वेस्टमेंट
वैरिएबल कॉस्ट कम हो रही हैं, जिससे ग्रॉस मार्जिन में बढ़ोतरी हो रही है
| विवरण | फ़ाइनेंशियल ईयर 23-25 की सालाना ग्रोथ (%) |
|---|---|
| ऑपरेशंस से रेवेन्यू | 33 |
| COGS | 24.9 |
| इम्प्लॉई बेनेफ़िट्स पर ख़र्च | 38.6 |
| फ़ाइनेंस कॉस्ट | 32.4 |
| डेप्रिशिएशन (मूल्यह्रास) | 38.1 |
| अन्य ख़र्च | 22.6 |
| कुल ख़र्च | 28.2 |
साथ ही, कंपनी ने ऑटोमेशन, बैकएंड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सिस्टम पर निवेश किया है-जिससे वॉल्यूम बढ़ने पर प्रति-यूनिट लागत कम होगी.
स्पष्ट रूप से कहें तो Lenskart का मौजूदा कॉस्ट स्ट्रक्चर एक ऐसी कंपनी का है जो आगे की ग्रोथ के लिए निवेश कर रही है-न कि दक्षता की कमी से जूझ रही है. यदि ग्रोथ और उत्पादकता बनी रहे तो आज की ऊंची लागत आने वाले दो-तीन वर्षों में सार्थक मार्जिन विस्तार में बदल सकती है.
निवेशकों के लिए ये जोखिम भी है और अवसर भी. ये याद दिलाने वाला बिंदु भी कि रिटेल-टेक कंपनियों में प्रॉफ़िटेबिलिटी अक्सर देरी से आती है.
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3. वैल्यूएशन: एक असहज विषय
अब तक सब ठीक है. लेकिन वैल्यूएशन वहीं है जहां Lenskart की कहानी उलझती है. कॉमन-साइज़ आधार पर देखें तो ख़र्च, आय के प्रतिशत के रूप में घटते दिखते हैं-जिससे दक्षता में सुधार का संकेत मिलता है. कंपनी ने फ़ाइनेंशियल ईयर 25 में ब्रेकईवन हासिल किया-जो निवेशकों के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण पड़ाव है.
कॉस्ट का बोझ कम करना
अन्य आय को छोड़कर, कंपनी ब्रेक-ईवन स्थिति में है
| आंकड़े % में हैं | FY25 | FY24 | FY23 |
|---|---|---|---|
| ऑपरेशंस से रेवेन्यू | 100 | 100 | 100 |
| COGS | 32.1 | 32.7 | 36.1 |
| इम्प्लॉई बेनेफ़िट्स पर ख़र्च | 20.7 | 20 | 18.9 |
| फ़ाइनेंस कॉस्ट | 2.2 | 2.3 | 2.2 |
| डेप्रिशिएशन (मूल्यह्रास) और एमोर्टाइजेशन ख़र्च | 12 | 12.4 | 11 |
| दूसरे ख़र्च | 32.5 | 34.9 | 38 |
| कुल ख़र्च | 99.5 | 102.2 | 106.3 |
लेकिन इसके आगे वैल्यूएशन को सही ठहराना कठिन है. लगभग ₹70,000 करोड़ के मार्केट कैप के साथ, 50 गुना P/E भी मान लें तो कंपनी को सालाना ₹1,400 करोड़ का प्रॉफ़िट कमाना होगा. इस स्तर तक पहुंचने के लिए अगले 2–3 वर्षों तक 25% से ज़्यादा ग्रोथ और नेट मार्जिन का 8–10% तक विस्तार होना चाहिए-जो एक बढ़ते ब्रांड और निर्माणाधीन स्केल वाले बिज़नेस के लिए काफ़ी कठिन लक्ष्य है.
एक लंबे समय का खेल, जिसमें स्पष्टता ज़रूरी है
Lenskart का वैल्यूएशन आज अव्यावहारिक लग सकता है, लेकिन अक्सर बाज़ार तब ऐसा करता है जब उसे किसी कैटेगरी लीडर में निर्णायक मोड़ दिखता है. परंपरागत रूप से धीमा और अत्यधिक विखंडित रहा आईवियर उद्योग अब एक स्केलेबल कंज्यूमर-टेक कहानी बन रहा है.
कंपनी का ओम्नी-चैनल इकोसिस्टम-2,800+ स्टोर, लाखों ऐप यूजर्स और मज़बूत अंतरराष्ट्रीय विस्तार-इसके आत्मविश्वास और महत्वाकांक्षा को दिखाता है. लेकिन ऊंची उम्मीदें दोधारी तलवार होती हैं. अब बाज़ार Lenskart का मूल्यांकन उसकी इनोवेशन क्षमता से नहीं, बल्कि टिकाऊ प्रॉफ़िटेबिलिटी में ग्रोथ को बदलने की क्षमता से करेगा.
तो क्या 260 का P/E सही है? शायद नहीं. लेकिन यदि Lenskart अच्छा निष्पादन करती है, मार्जिन बढ़ाती है और ग्रोथ बनाए रखती है-तो आने वाले वर्षों में ये वैल्यूएशन उतना अजीब नहीं लगेगा. और, यदि वो चूक गई, तो ये IPO हाइप कंज्यूमर-टेक वैल्यूएशन में अति-उम्मीदों का एक चेतावनी भरा उदाहरण बन सकती है.
फ़िलहाल, एक बात स्पष्ट है-Lenskart की नज़रें केवल फ्रेम और लेंस से कहीं आगे हैं. ये भारत नहीं, बल्कि दुनिया के आईवियर अनुभव को बदलना चाहती है. सवाल ये है कि क्या निवेशक भविष्य में भी उतनी ही स्पष्ट विज़न बनाए रखेंगे.
हाइप से आगे की स्पष्टता चाहिए?
Lenskart का वैल्यूएशन कई कठिन सवाल उठाता है-और ऐसी कहानियां बताता है कि केवल उत्साह में स्टॉक्स चुनना कितना जोखिम भरा हो सकता है.
वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र में हम आपको शोर से बाहर निकालकर उन व्यवसायों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं-जिनकी बुनियाद मज़बूत हो, प्रॉफ़िटेबिलिटी का स्पष्ट रास्ता हो और दीर्घकालिक कंपाउंडिंग की क्षमता हो.
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ये लेख पहली बार नवंबर 17, 2025 को पब्लिश हुआ.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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