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सारांशः मल्टीबैगर खोजना स्मॉल-कैप निवेश की तरह किसी जादुई फ़ॉर्मूले जैसा लगता है, लेकिन असलियत इससे कहीं ज़्यादा गहरी है. बेहतरीन स्मॉल-कैप फ़ंड भी कभी-कभी ही सोना लगते हैं. हमारी एनालेसिस बताती है कि पिछले तीन साल में किन फ़ंड्स ने सबसे ज़्यादा 3x स्टॉक्स खोजे और ये क्यों हमेशा सबसे ऊंचे रिटर्न में तब्दील नहीं हो सके.
रोहित शर्मा को ‘हिटमैन’ यूं ही नहीं कहा जाता. जब वो शॉट खेलने का फ़ैसला करते हैं, तो गेंद अक्सर बाउंड्री के पार दिखती है. फिर भी अपने बेहतरीन दौर में भी उन्हें एक छक्का लगाने में औसतन 18 गेंदें लगीं. फ़ुटबॉल में, आधुनिक दौर के आइकन लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो हर छह शॉट में क़रीब एक गोल करते हैं. मतलब, सबसे शीर्ष खिलाड़ी भी हर बार सोने पर निशाना नहीं लगा पाते.
निवेश भी इसी तरह का है. खेल की तरह इसमें दोबारा मौक़ा नहीं मिलता. ये सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप उस ख़ास पल में कैसे रिएक्ट करते हैं. अभ्यास किया जा सकता है, तैयारी हो सकती है, सीखना जारी रह सकता है, लेकिन जब असली वक़्त आता है, तो सहज - लेकिन प्रशिक्षित - प्रतिक्रिया ही काम करती है. इसी वजह से छक्का, गोल या कोई जैकपॉट-जैसा स्टॉक रोज़-रोज़ नहीं मिलता.
यही बात तब बिल्कुल साफ़ हो जाती है जब स्मॉल-कैप फ़ंड्स का अध्ययन किया जाए. सबसे मज़बूत फ़ंड, अपनी पूरी तैयारी और रिसर्च के बावजूद, गिने-चुने मौक़ों पर ही बड़ा फ़ायदा पकड़ पाते हैं. पहले निप्पॉन इंडिया स्मॉल-कैप को देखें. पिछले तीन साल में फ़ंड ने लगभग 361 स्टॉक्स रखे. इनमें से 26 ने कम से कम 200% एब्सोल्यूट रिटर्न दिया. लगभग 7% का हिट-रेट मामूली लग सकता है, लेकिन खेल की संभावनाओं के हिसाब से देखें तो ये बाउंड्री लगाते रोहित शर्मा से भी बेहतर है.
इसके बाद ITI और फ़्रैंकलिन आते हैं. ITI स्मॉल-कैप, जो तीन साल का दूसरा सबसे अच्छा परफ़ॉर्मर है, ने 224 स्टॉक्स में से 18 तीन-बैगर खोजे. लेकिन सबसे प्रभावशाली रिकॉर्ड फ़्रैंकलिन इंडिया के स्मॉल-कैप फ़ंड का रहा. तीन साल में अपनी 152 होल्डिंग्स में से इसने 17 स्टॉक्स को 3x से ऊपर जाते देखा, यानी 11% से ज़्यादा का हिट-रेट. दूसरे प्रमुख फ़ंड्स में सिर्फ़ HDFC स्मॉल-कैप ने 11.5% का स्ट्राइक-रेट दिखाया.
दिलचस्प बात ये है कि पिछले तीन साल का टॉप फ़ंड बंधन स्मॉल-कैप, अलग कहानी बताता है. फ़ंड ने 386 स्टॉक्स रखे, जिनमें से सिर्फ़ 13 मल्टीबैगर बने. संख्या के लिहाज़ से ये एक्सिस, HDFC और DSP के बराबर है. लेकिन बंधन की सफलता फ्रीक्वेंसी से ज़्यादा उसके स्तर (magnitude) पर टिकी है, जिस पर हम आगे बात करेंगे.
स्मॉल-कैप फ़ंड्स जिन्होंने खोजे सबसे ज़्यादा मल्टीबैगर
मल्टीबैगर से हमारा मतलब उन स्टॉक्स से है जो पिछले तीन सालों में कम से कम 3 गुना बढ़े हैं
| स्कीम | मल्टीबैगर स्टॉक्स की संख्या |
|---|---|
| Nippon India Small Cap | 26 |
| ITI Small Cap | 18 |
| Franklin India Small Cap | 17 |
| HSBC Small Cap | 14 |
| Axis Small Cap | 13 |
| HDFC Small Cap | 13 |
| DSP Small Cap | 13 |
| Bandhan Small Cap | 13 |
| ABSL Small Cap | 11 |
| UTI Small Cap | 10 |
| Canara Robeco Small Cap | 10 |
| Edelweiss Small Cap | 9 |
| Kotak Small Cap | 9 |
| ICICI Pru Smallcap | 9 |
| Union Small Cap | 9 |
| PGIM India Small Cap | 8 |
| Mahindra Manulife Small Cap | 8 |
| Invesco India Smallcap | 8 |
| Sundaram Small Cap | 8 |
| Bank of India Small Cap | 7 |
| Quant Small Cap | 7 |
| LIC MF Small Cap | 5 |
| SBI Small Cap | 4 |
| Baroda BNP Paribas Small Cap | 3 |
| Tata Small Cap | 2 |
| Motilal Oswal Small Cap | 1 |
| नोट: समय अक्टूबर 2020 और अक्टूबर 2025 के बीच का लिया गया है. ये सभी रेगुलर प्लान हैं. | |
मल्टीबैगर का तूफान
पिछले तीन साल में जहां ब्रॉडर मार्केट 15.2% बढ़ा, वहीं स्मॉल-कैप्स एक अलग ऊंचाई पर थे, ख़ासकर 2023 और 2024 में. निफ़्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स ने 2023 और 2024 में सालाना 37.6% रिटर्न दिया. इसलिए ये चौंकाने वाली बात नहीं है कि 255 स्टॉक्स, जिनमें ज़्यादातर स्मॉल-कैप थे, तीन साल में 3x (200% एब्सोल्यूट रिटर्न) से ज़्यादा बढ़े.
ऐसे माहौल में, टॉप-परफ़ॉर्मिंग फ़ंड्स के बड़े ड्राइवर्स वही नाम रहे जिनसे निवेशक पहले से परिचित हैं. केन्स टेक्नोलॉजी सबसे ज़्यादा योगदान देने वाला रहा, जिसने इसी पोर्टफ़ोलियो के भीतर 11x रिटर्न दिया. तीन साल के दूसरे बेस्ट फ़ंड ITI स्मॉल-कैप को आइनॉक्स विंड के 10x उछाल का फ़ायदा मिला, जबकि तीसरे सबसे तेज़ फ़ंड इन्वेस्को इंडिया ने मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया के लगभग 7x उछाल का फ़ायदा उठाया.
पूरे उद्योग में, कुछ चुनिंदा स्टॉक्स ने रिटर्न का बड़ा हिस्सा हासिल किया. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ़ इंडिया 14 स्मॉल-कैप फ़ंड्स के पोर्टफ़ोलियो में मौजूद था और इसने 36 महीनों में 10x रिटर्न दिया, जबकि हितैची एनर्जी 8 स्मॉल-कैप फ़ंड के पोर्टफ़ोलियो में नज़र आया.
सबसे बड़े मल्टीबैगर
पांच सबसे बड़े स्मॉल-कैप फंड्स के पास मौजूद सबसे प्रमुख मल्टीबैगर स्टॉक
| स्मॉल-कैप फ़ंड | मल्टीबैगर स्टॉक्स | हिट रेशियो (%) | प्रमुख मल्टीबैगर शेयर | कॉर्पस (करोड़ ₹) |
|---|---|---|---|---|
| Nippon India | 26 | 7 | Apar Industries (Grew 9x) | Kaynes Tech (9.2x) | 68,969 |
| HDFC | 13 | 11.5 | Apar Industries (10.5x) | Gabriel India (8.8x) | 38,412 |
| SBI | 4 | 4.6 | GE Vernova (18.6x) | 36,945 |
| Quant | 7 | 2.6 | Anand Rathi Wealth (7.1x) | 30,504 |
| Axis | 13 | 6.7 | Anand Rathi Wealth (12.5x) | 27,066 |
क्या ज़्यादा मल्टीबैगर का मतलब अच्छा रिटर्न है?
आश्चर्यजनक रूप से, नहीं. मोटे तौर पर पर देखने पर लगता है कि जिसमें ज़्यादा मल्टीबैगर होंगे, वो फ़ंड ज़रूर अव्वल होगा. लेकिन डेटा इस सहज लगने वाली सोच की पुष्टि नहीं करता. उदाहरण के लिए, फ़्रैंकलिन के पास 17 स्टॉक्स थे जो 200% से ज़्यादा बढ़े और HDFC का हिट-रेट भी बंधन से कहीं बेहतर था. फिर भी, फ़्रैंकलिन और HDFC दोनों बंधन के तीन-साल के 30.6% सालाना रिटर्न से काफ़ी पीछे रह गए.
हालांकि, ये फ़र्क़ रहस्यमय नहीं है. मामला रिटर्न बनने के तरीक़े पर टिकता है. पहला कारण ये कि कई बार फ़ंड अपने विजेताओं को बहुत छोटे एलोकेशन में रखते हैं. दर्जन भर 3x स्टॉक्स भी असर नहीं दिखाते अगर हर एक का वज़न सिर्फ़ 0.3% हो.
दूसरा, बड़े पोर्टफ़ोलियो अक्सर ज़्यादा घाटे वाले स्टॉक्स भी उठाते हैं. हर तेज़ उछाल वाले स्टॉक के पीछे दो ऐसे हो सकते हैं जो चुपचाप औसत को नीचे खींचते हों. इसलिए हिट-रेट अपने आप में पर्याप्त संकेत नहीं है, जब तक ये न देखा जाए कि “मिसेज़” (चूक) ने क्या किया. और आख़िर में, स्मॉल-कैप्स में फ़्रीक्वेंसी से ज़्यादा मायने रखता है प्रभाव. एक अकेला विनर (जैसे केन्स टेक्नोलॉजी) कई 3x स्टॉक्स पर भारी पड़ सकता है. ये पावर-लॉ मार्केट (बड़ा ट्रेड वॉल्यूम कैसे क़ीमतों को प्रभावित करता) का गणित है. सरल शब्दों में, कुछ बाहरी फ़ैक्टर्स ही पूरी तस्वीर बदल देते हैं.
इसी वजह से असली कहानी सिर्फ़ ये नहीं है कि कोई फ़ंड कितने मल्टीबैगर रखता है, बल्कि ये है कि क्या वो सही समय तक सही वेट में सही स्टॉक्स रख पाता है.
तो कौन-सा स्मॉल-कैप फ़ंड आपके लिए बेस्ट है?
तो कौन-से स्मॉल-कैप फ़ंड आपके लिए बेहतर हो सकते हैं? इसका जवाब सिर्फ़ अतीत के रिटर्न में नहीं छिपा है. ये ज़्यादा आपके रिस्क-टॉलरेंस, समय-सीमा और बाज़ार गिरने पर टिके रहने की क्षमता पर निर्भर करता है. यही जगह है जहां वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र मदद करता है. ये हेडलाइन परफ़ॉर्मेंस से आगे बढ़कर गिरावट से सुरक्षा, निरंतरता, पोर्टफ़ोलियो क्वालिटी और फ़ंड-मैनेजर के व्यवहार तक को देखता है. लक्ष्य सबसे हॉट स्मॉल-कैप फ़ंड खोजना नहीं, बल्कि वो फ़ंड पहचानना है जिसके साथ निवेशक पूरे मार्केट साइकिल के दौरान आसानी से बने रह सकें. असल में स्मॉल-कैप्स में अनुशासन, ड्रामे से कहीं ज़्यादा मायने रखता है.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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