Nitin Yadav/AI-Generated Image
सारांशः कोविड ने सिर्फ़ मेरी ज़िंदगी ही नहीं बिगाड़ी; इसने मेरी SIP को भी बिगाड़ दिया. जब पराग फ़्लेक्सी कैप फ़ंड 2020 की शुरुआत में 24.6 प्रतिशत गिरा, आर्थिक दबाव के कारण मैंने SIP रोक दी. मज़े की बात ये है कि ऐसा करने से मुझे कागज़ पर ज़्यादा रिटर्न तो मिला, लेकिन लेकिन इससे मेरे पास उससे कम पूंजी बची, जितनी कि अगर मैंने निवेश बनाए रखा होता तो होती. ये कहानी बताती है कि ऐसा कैसे मुमक़िन है.
मुझे आज भी 1 जनवरी 2018 का दिन याद है. नया साल. नए संकल्प. और उनमें से एक मेरी उम्र के हिसाब से काफ़ी समझदारी भरा था: “कुछ भी हो जाए, हर महीने की पहली तारीख़ को ₹10,000 पराग पराग फ़्लेक्सी कैप में निवेश करूंगा.”
दो साल तक, मैं एक योगी की तरह पूरी लगन से इसमें लगा रहा. हर महीने बिना चूके, ₹10,000 निवेश करता रहा. और फिर कोविड आ गया.
जब दुनिया लॉकडाउन में चली गई, तो मेरे फ़ाइनेंस भी लॉकडाउन में चले गए. सैलरी कम हो रही थी, हर जगह अनिश्चितता थी और अचानक मैंने पाया कि मैं अपना SIP जारी नहीं रख पा रहा हूं. 1 जनवरी 2020 से 1 जून 2020 तक मैंने हर क़िस्त रोक दी. छह महीने. शून्य निवेश.
मज़े की बात ये है कि ये वही समय था जब फ़ंड अपनी सबसी बड़े गिरावट के दौर से गुज़र रहा था. जनवरी से मार्च 2020 के बीच ये 24.6 प्रतिशत गिरा. ये बाज़ार की पिछले एक दशक में सबसे बड़ी “सेल” थी. और मैं सिर्फ़ देखता रह गया.
और जुलाई 2020 में जब मैंने फिर से SIP शुरू की, तब तक बाज़ार संभल चुका था. आज, पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे एहसास होता है कि ये एक खट्टा-मीठा ठहराव था. खट्टा इसलिए कि मेरा कॉर्पस जितना होना चाहिए था उससे कम है, और मीठा इसलिए कि मैं बाज़ार में सही समय पर लौट आया.
मान लें, अगर मैंने SIP नहीं रोकी होती?
असल नतीजा समझने के लिए, मैंने कैलकुलेशन की. वही फ़ंड. वही तारीखे़ं. हर महीने ₹10,000. बस एक अंतर: यूनिवर्स A में मैंने एक भी क़िस्त नहीं छोड़ी. यूनिवर्स B (यानी असली ज़िंदगी) में मैंने छह SIP छोड़ीं.
यूनिवर्स A: अगर मैं SIP जारी रखता (1 जनवरी 2018 से 10 दिसंबर 2025)
- कुल निवेश: ₹9.6 लाख (96 क़िस्त × ₹10,000)
- फ़ाइनल कॉर्पस: ₹22,45,555
- रिटर्न (XIRR): 20.9 प्रतिशत
जिन्हें नहीं पता, उनके लिए XIRR ये कैलकुलेट कर सकता है कि अगर हम अलग-अलग समय पर अलग-अलग अमाउंट निवेश करते हैं, जैसा कि हम अपनी SIP में करते हैं, तो हमारा पैसा हर साल कितनी तेज़ी से बढ़ता है.
यूनिवर्स B: जो वास्तव में हुआ (मैंने छह SIP छोड़ीं)
- कुल निवेश: ₹9 लाख (90 क़िस्त × ₹10,000)
- फ़ाइनल कॉर्पस: ₹21,84,497
- XIRR: 22.2 प्रतिशत
तो, असल में, मुझे ज़्यादा रिटर्न मिला (22.2 प्रतिशत Vs 20.9 प्रतिशत), लेकिन मेरा कॉर्पस कम रह गया (₹21.84 लाख Vs ₹22.45 लाख).
पहली नज़र में ये उल्टा लगता है, है ना?
SIP रोकने की असल क़ीमत
कोविड ने सिर्फ़ मेरी क़िस्तें नहीं रोकीं. उसने मुझे बाज़ार के सबसे सस्ते दिनों में ख़रीदारी करने से भी रोक दिया.
जनवरी से मई 2020 तक की वे छह क़िस्तें ठीक उसी समय छूटीं जब फ़ंड सबसे नीचे था: -24.6 प्रतिशत. ये वो महीने थे जब हर ₹10,000 पर सबसे ज़्यादा यूनिट मिल सकती थीं.
उस समय निवेश न करके, मैंने शॉर्ट-टर्म डर से तो बचा लिया, लेकिन लॉन्ग-टर्म क़ीमत चुकाई.
ये वो हिस्सा है जिसके बारे में हम कभी ज़्यादा बात नहीं करते, क्योंकि मार्केट के दबाव के दौरान हमारा व्यवहार उतना ही मायने रखता है जितना कि आप कौन सा फ़ंड चुनते हैं.
भले ही कागज़ पर मेरा रिटर्न अच्छा दिख रहा है, लेकिन मैंने जितनी वेल्थ बनाई है वो कम है.
तो कोविड ने मुझे क्या सिखाया?
आज जब भी बाज़ार डगमगाता है या ख़बरें डरावनी लगती हैं, मैं उन छह महीनों को याद करता हूं. और दो कड़वी सच्चाई सामने आती हैं:
- बाज़ार में बने रहना बाज़ार को टाइम करने से बेहतर है.
- और निरंतरता डर आधारित फै़सलों से हमेशा बेहतर होती है.
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ये लेख पहली बार दिसंबर 15, 2025 को पब्लिश हुआ.
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