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शनिवार की बातचीत

एल्गोरिदम और ऑटोमेशन की दुनिया में, कभी-कभी निवेशकों को सबसे ज़्यादा एक इंसान से बातचीत की ज़रूरत होती है

फ़ंड एडवाइजर लाइव: जहां निवेशकों को असल जवाब मिलते हैंAditya Roy/AI-Generated Image

निवेशक अपने साथ जो सवाल लेकर चलते हैं, उनके बारे में मैंने एक बात नोटिस की है. ये सवाल न तो सुविधाजनक समय पर आते हैं और न ही किसी साफ़-सुथरी कैटेगरी में फिट होते हैं. ये कभी सुबह की सैर के दौरान उभर आते हैं, कभी ब्याज़ दरों से जुड़ी किसी अख़बार की हेडलाइन पढ़ते समय, या फिर सोने से ठीक पहले उस बेचैन पल में, जब बाज़ार में काफ़ी उतार-चढ़ाव रहा हो. ये सवाल शायद ही कभी सर्च रिज़ल्ट्स में दिखते हैं, क्योंकि ये अक्सर बहुत निजी होते हैं या किसी व्यक्ति की अपनी स्थिति से जुड़े होते हैं. “क्या मुझे इस फ़ंड के हालिया कमज़ोर परफ़ॉर्मेंस को लेकर चिंता करनी चाहिए?” “मेरी बेटी की शादी तीन साल में है, क्या मैं सही ट्रैक पर हूं?” “मैं इस नए फ़ंड कैटेगरी के बारे में पढ़ रहा हूं, क्या ये मेरे जैसे किसी व्यक्ति के लिए सही है?”

कई सालों तक ऐसे सवाल या तो बिना जवाब के रह जाते थे या फिर जवाब ग़लत लोगों से मिलते थे. कभी किसी भले इरादे वाले रिश्तेदार से, जिनकी जानकारी पुरानी होती थी, या उससे भी बुरा, किसी ऐसे डिस्ट्रीब्यूटर से, जिसका किसी ख़ास रेकमंडेशन में निजी फ़ायदा जुड़ा होता था. यही वो ख़ाली जगह है, जिसे भरने के लिए Fund Advisor Live तैयार किया गया. और अभी-अभी अपना पहला सेशन होस्ट करने के बाद, मुझे लगता है कि ये निवेश प्लेटफ़ॉर्म्स की दुनिया में सच में कुछ अलग पेश करता है.

अब हर महीने शनिवार को हम एक लाइव वीडियो सेशन होस्ट करते हैं, जहां कोई भी व्यक्ति सीधे हमारी एनालिस्ट टीम और मुझसे अपने सवाल पूछ सकता है. यहां न कोई स्क्रिप्ट होती है, न पहले से तय किए गए बातों के पॉइंट्स और न ही सवाल पूछने की कोई सीमा. अगर कोई यह सोच रहा है कि पिछले छह महीनों से कम परफ़ॉर्म कर रहे फ़ंड के साथ आगे बढ़ना चाहिए या नहीं, तो वो सवाल पूछ सकता है. अगर नए टैक्स नियमों के रिटायरमेंट प्लानिंग पर असर को लेकर उलझन है, तो वो भी पूछा जा सकता है. और अगर किसी फ़ाइनेंशियल फ़ैसले को लेकर नींद उड़ी हुई है और बस एक दूसरी राय चाहिए, तो वो सवाल भी यहां जगह पाता है.

जब हमने पहली बार इस फ़ीचर की कल्पना की थी, तब मैं पूरी तरह आश्वस्त नहीं था कि ये कैसे काम करेगा. क्या निवेशक सच में इसमें शामिल होंगे? क्या सवाल इतने अलग-अलग होंगे कि ग्रुप सेटिंग में उन्हें ठीक से संबोधित करना मुश्किल हो जाएगा? क्या लाइव वीडियो के बावजूद फ़ॉर्मेट कुछ हद तक बेरुख़ा लगेगा? ये सारी शंकाएं पहले ही सेशन में ख़त्म हो गईं. सामने जो आया, वो निवेशकों की ऐसी कम्युनिटी थी, जो सिर्फ़ जानकारी नहीं, बल्कि संदर्भ, भरोसा और वो नज़रिया चाहता था, जो बाज़ारों को दशकों तक देखने और परिवारों को उनकी फ़ाइनेंशियल सफर में मार्गदर्शन देने से मिलता है.

लाइव फ़ॉर्मेट की ख़ूबसूरती और इसे सब्सक्राइबर्स तक सीमित न रखने की वजह यही है कि हर किसी को दूसरों के सवालों से भी फ़ायदा मिलता है. हमारे पहले सेशन में किसी ने रिटायरमेंट के लिए 4 प्रतिशत विद्ड्रॉल रूल के बारे में पूछा. क्यों कहा जाता है कि सालाना 3 से 4 फ़ीसदी निकालने से कॉर्पस व्यक्ति से ज़्यादा समय तक चल सकता है? इसमें एसेट एलोकेशन पर चर्चा हुई, 50/50 इक्विटी-डेट स्प्लिट के महत्व पर बात हुई और इस पर ज़ोर दिया गया कि बाज़ार गिरावट के दौरान लचीलापन क्यों ज़रूरी है. मैंने बताया कि 1992 से 2002 के बीच लगभग एक पूरा दशक भारतीय बाज़ार कैसे लगभग एक ही स्तर पर घूमता रहा और उस दौर में रिटायर्ड लोगों के लिए इसका क्या मतलब था. जिन दर्शकों ने वो ख़ास सवाल नहीं भी पूछा था, वो भी अचानक अपनी रिटायरमेंट स्ट्रैटेजी को नए नज़रिए से देखने लगे.

एक और सवाल 41 साल के एक व्यक्ति से आया, जिनका निवेश डायरेक्ट स्टॉक्स, म्यूचुअल फ़ंड्स, EPF और NPS में फैला हुआ था. उनका सवाल था कि आगे की रिटायरमेंट सेविंग्स म्यूचुअल फ़ंड्स में डालनी चाहिए या NPS में. मेरा जवाब उनके लिए थोड़ा चौंकाने वाला था. किसी सामान्य सलाह देने के बजाय, मैंने सुझाव दिया कि पहले अपने सारे होल्डिंग्स को Fund Advisor के पोर्टफ़ोलियो ट्रैकर में अपलोड करें और परफ़ॉर्मेंस टैब देखें. आंकड़ों को बोलने दें. क्या स्टॉक्स अपने बेंचमार्क से बेहतर कर रहे हैं? क्या म्यूचुअल फ़ंड्स कर रहे हैं? जब ये साफ़ दिख जाएगा, तो इसका जवाब अपने आप सामने आ जाएगा कि कहां ज़्यादा निवेश करना है. यही संदर्भ है. किसी की ख़ास स्थिति को समझे बिना दी गई निवेश सलाह सिर्फ़ शोर होती है.

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इस पहली शनिवार की बातचीत में सबसे ज़्यादा जो बात मुझे महसूस हुई, वो ये थी कि ये आम निवेशक-एडवाइज़र बातचीत से कितनी अलग थी. यहां कुछ ख़रीदने या बेचने का कोई दबाव नहीं था. हम किसी एक फ़ंड की रेकमंडेशन से कोई फ़ायदा नहीं उठाते, न कोई कमीशन है और न ही कोई छिपा हुआ इंसेंटिव. इससे ऐसा माहौल बनता है, जहां सवालों के जवाब ईमानदारी से दिए जा सकते हैं, भले ही वो ईमानदारी असहज क्यों न हो. जब किसी ने PMS सर्विसेज़ के बारे में पूछा, तो मैंने टालमटोल नहीं की. साफ़ कहा कि हम PMS की रेकमंडेशन नहीं करते और इसमें निवेश न करने की सलाह देते हैं. म्यूचुअल फ़ंड्स ज़्यादा रेगुलेटेड हैं, परफ़ॉर्मेंस के मामले में ज़्यादा ट्रांसपेरेंट हैं और टैक्स के लिहाज़ से ऐसे फ़ायदे देते हैं, जिनकी बराबरी PMS नहीं कर सकता. ख़र्च में सिर्फ़ 1 प्रतिशत का अंतर, लॉन्ग-टर्म में कंपाउंड होकर नेटवर्थ में 25 से 30 प्रतिशत का फ़र्क़ पैदा कर देता है. ये कोई छोटी बात नहीं है.

मैंने तीन दशकों से ज़्यादा समय वैल्यू रिसर्च को बनाने में लगाया है और अलग-अलग रूपों में, पब्लिकेशंस, रेडियो और टीवी शोज़, रेटिंग्स और ऑनलाइन टूल्स के ज़रिये, शायद एक लाख से ज़्यादा निवेशक सवालों के जवाब दिए हैं. लेकिन लाइव वीडियो फ़ॉर्मेट में एक ऐसा पहलू है, जिसकी मुझे पहले उम्मीद नहीं थी. जब कोई पूछता है कि रिटायरमेंट के बाद अगर चार या पांच साल तक बाज़ार नीचे रहे तो क्या होगा, तो सवाल के पीछे की चिंता साफ़ महसूस होती है. ये कोई सैद्धांतिक डर नहीं है. ये वो डर है, जो कई रिटायर्ड लोगों को रात में जगाए रखता है. मैंने समझाया कि हमारा Portfolio Planner इसी स्थिति को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है, ताकि रिटायर्ड लोगों को कभी पूरी तरह इक्विटी में न डाला जाए और ऐसा एसेट एलोकेशन बनाया जाए, जो लंबी गिरावट में स्थिरता दे. और फिर मैंने ईमानदारी से कहा, अगर 10 या 20 साल की मंदी आ जाए, तो हम सबके सामने इससे भी बड़ी समस्याएं होंगी. लेकिन सही एसेट एलोकेशन यह सुनिश्चित करता है कि व्यक्ति कभी भी सबसे ख़राब स्थिति के लिए पूरी तरह खुला न रहे.

इस सेशन में कुछ ऐसे सवाल भी सामने आए, जिनकी मैंने कल्पना नहीं की थी. एक दर्शक ने NRIs, ख़ासकर अमेरिका में रहने वालों के लिए निवेश के बारे में पूछा. इससे मुझे एक ऐसी बात साझा करने का मौक़ा मिला, जो बहुत कम लोग जानते हैं. अमेरिकी टैक्स क़ानून, अमेरिका आधारित NRIs के लिए म्यूचुअल फ़ंड निवेश को बेहद नुक़सानदेह बना देता है. वहां IRS अनरियलाइज़्ड गेंस की भी सालाना रिपोर्टिंग और टैक्स की मांग करती है. ये एक अजीब स्थिति है, जो इस ग्रुप के लिए म्यूचुअल फ़ंड्स को लगभग असंभव बना देती है. अगर कोई व्यक्ति अमेरिका में NRI है और भारतीय बाज़ार में निवेश चाहता है, तो ETFs या डायरेक्ट स्टॉक्स ही समझदारी भरे विकल्प हैं. ऐसी व्यावहारिक और ख़ास सलाह आम निवेश गाइड्स में नहीं मिलती, लेकिन किसी को एक बहुत महंगी ग़लती से बचा सकती है.

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बेशक, Fund Advisor Live अपने आप में अकेला नहीं है. ये एक बड़े इकोसिस्टम का हिस्सा है, जिसमें हमारा Portfolio Planner शामिल है, जो व्यक्ति की ज़रूरतों के हिसाब से पर्सनलाइज़्ड निवेश स्ट्रैटेजी बनाता है, Analyst’s Choice लिस्ट है, जो लंबे समय की संभावनाओं वाले फ़ंड्स चुनती है, और Portfolio Analysis टूल है, जो अलग-अलग पैमानों पर निवेश का लगातार एनालेसिस करता है. लेकिन लाइव सेशंस जो जोड़ते हैं, वो है वो इंसानी पहलू, जिसकी कोई जगह नहीं ले सकता. यानी किसी की ख़ास स्थिति को समझकर, उन लोगों के ज़रिये जवाब मिलना, जिन्होंने अपना करियर ही ऐसे सवालों को समझने में लगाया है.

पहला सेशन ख़त्म करते समय किसी ने रिटायरमेंट प्लानिंग पर आख़िरी सलाह मांगी. मेरा जवाब सीधा था. SIPs को ऑटोमेट करें और निवेश को दांत साफ़ करने जैसी आदत बना लें. बिना ज़रूरत के कुछ करने से बचें. लॉन्ग-टर्म एसेट एलोकेशन, ख़र्च की एफ़िशिएंसी और बड़ी ग़लतियों से बचने पर ध्यान दें. रिटायरमेंट प्लानिंग में अनुशासन, चालाकी से कहीं ज़्यादा मायने रखता है.

Fund Advisor Live इसी बारे में है. चालाकी नहीं, बल्कि साफ़ समझ. बेचने के बारे में नहीं, बल्कि समझाने के बारे में. सामान्य सलाह नहीं, बल्कि तीन दशकों के अनुभव से निकली ख़ास गाइडेंस, जो दिखाती है कि भारतीय परिवार असल में निवेश कैसे करते हैं. चाहे कोई म्यूचुअल फ़ंड निवेश में नया हो या सालों से जुड़ा हो, चाहे पोर्टफ़ोलियो छोटा हो या बड़ा, जो सवाल मन में हैं, उनके जवाब ऐसे लोगों से मिलने चाहिए, जो संदर्भ समझते हों और जिनका फ़ोकस सिर्फ़ निवेशक के हित पर हो.

यह बातचीत सभी Value Research Fund Advisor मेंबर्स के लिए खुली है. अगर अब तक जुड़ाव नहीं हुआ है, तो सब्सक्रिप्शन की शुरुआत पहले महीने के लिए सिर्फ़ ₹499 से होती है. इससे Fund Advisor Live के साथ-साथ हमारे पूरे टूल्स सूट, जैसे Portfolio Planner, Analyst’s Choice और Portfolio Analysis तक पहुंच मिलती है. उम्मीद है, आप इससे जुड़ेंगे. 

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