
सारांशः क्या आप ऐसे HDFC फ़ंड्स खोज रहे हैं जिन्होंने 2025 में अपने बेंचमार्क को पीछे छोड़ा? इस आसान सात-स्टेप की चेकलिस्ट से अपनी लिस्ट तैयार कीजिए.
अगर आपने पहले कभी ‘बेस्ट HDFC म्यूचुअल फ़ंड्स’ सर्च किया है, तो मुमक़िन है कि आप एक आसान और ऑब्जेक्टिव शॉर्टलिस्ट चाहते हों. “कौन-से फ़ंड्स ने अपने बेंचमार्क को हराया?” शुरुआत करने के लिए ये सबसे सीधा सवाल लगता है. या तो किसी फ़ंड ने उस इंडेक्स से बेहतर किया, जिसे उसे ट्रैक करना था, या नहीं किया.
समस्या ये है कि ज़्यादातर रेडी-मेड लिस्ट इसे जितना आसान दिखाती हैं, असल में उतना होता नहीं है. ये चुपचाप डायरेक्ट और रेगुलर प्लान मिला देती हैं, अलग-अलग रिटर्न पीरियड जोड़ देती हैं या फ़ंड्स की तुलना ग़लत इंडेक्स से कर देती हैं. नतीजा ये होता है कि पहली नज़र में प्रदर्शन काफ़ी दमदार लगता है, लेकिन गहराई से देखने पर यह टिकता नहीं है. अगर बेंचमार्क को हराने का मतलब सच में कुछ होना है, तो आपको ऐसा तरीक़ा चाहिए जिसे आप ख़ुद लागू कर सकें, न कि ऐसी लिस्ट जिस पर आंख मूंदकर भरोसा करना पड़े.
यहीं ये सात-स्टेप का तरीक़ा काम आता है. वैल्यू रिसर्च के फ़ंड पेज और टूल्स का इस्तेमाल करके ये दिखाता है कि आप HDFC के सात फ़ंड्स की एक साफ़ शॉर्टलिस्ट कैसे बना सकते हैं. ऐसी लिस्ट जो आपके चुने हुए प्लान टाइप, आपके चुने हुए समय और उस बेंचमार्क के हिसाब से सही हो, जिसे फ़ंड ख़ुद फ़ॉलो करता है.
हर म्यूचुअल फ़ंड स्कीम अपने प्रदर्शन को एक तय बेंचमार्क से मापती है. जैसे, HDFC के डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स आम तौर पर BSE 500 TRI या Nifty 500 TRI जैसे ब्रॉड मार्केट इंडेक्स का इस्तेमाल करते हैं. वहीं कुछ कैटेगरी ज़्यादा ख़ास इंडेक्स पर निर्भर करती हैं, जैसे BSE Large Mid Cap TRI या BSE 150 MidCap TRI.
ये बेंचमार्क कोई सजावटी लेबल नहीं है. यही उस फ़ंड का आधिकारिक पैमाना है, जिसके मुताबिक़ वो अपना काम करता है.
सही तुलना करने के लिए नीचे दी गई तीनों बातें हमेशा एक-सी होनी चाहिए:
- वही प्लान टाइप (डायरेक्ट या रेगुलर)
- वही रिटर्न पीरियड (एक साल, तीन साल, कैलेंडर 2025 वग़ैरह)
- वही सटीक बेंचमार्क जिसे फ़ंड ख़ुद बताता है
इनमें से एक भी चूक गए, तो आप ऐसे बेहतर प्रदर्शन का जश्न मना सकते हैं जो असल में हुआ ही नहीं.
‘2025 में’ का मतलब असल में क्या है?
ज़्यादातर निवेशक इस फ़्रेज़ का इस्तेमाल दो तरीक़ों से करते हैं:
- कैलेंडर-ईयर रिटर्न: जनवरी 2025 के पहले ट्रेडिंग दिन से दिसंबर 2025 की आख़िरी उपलब्ध तारीख़ तक
- ट्रेलिंग ट्वेल्व-मंथ (TTM) रिटर्न: 2025 की किसी ख़ास तारीख़ तक, जैसे दिसंबर के बीच या आख़िर में
दोनों तरीक़े सही हैं. दोनों अलग सवालों का जवाब देते हैं. कैलेंडर-ईयर रिटर्न बताते हैं कि पूरे साल में क्या हुआ. TTM रिटर्न बताते हैं कि पिछले बारह महीनों में क्या हुआ. किसी एक को चुनिए और उसी पर टिके रहिए. दोनों को मिलाने से तस्वीर धुंधली हो जाती है.
अब बिना देर किए, हम आपके सामने सात-स्टेप की वो चेकलिस्ट रखते हैं, जिससे आप जान सकते हैं कि 2025 में किन HDFC म्यूचुअल फ़ंड्स ने अपने बेंचमार्क को हराया.
स्टेप 1: फ़ंड-हाउस सलेक्टर से शुरुआत करें
HDFC म्यूचुअल फ़ंड के पास स्कीमों की लंबी लिस्ट है. अगर आप इधर-उधर सर्च पर निर्भर रहेंगे, तो कुछ फ़ंड छूट सकते हैं या एक ही स्कीम के अलग वर्ज़न दो बार गिन लिए जाएंगे. इसकी जगह वैल्यू रिसर्च के HDFC म्यूचुअल फ़ंड सिलेक्टर का इस्तेमाल करें. इससे पूरा यूनिवर्स एक ही जगह दिख जाता है. आप प्लान टाइप और रिटर्न पीरियड के हिसाब से फ़िल्टर कर सकते हैं, जिससे शुरुआती शॉर्टलिस्ट जल्दी बन जाती है.
यहीं आप एक्टिव फ़ंड्स को इंडेक्स फ़ंड्स और ETF से अलग भी कर लेते हैं. इंडेक्स फ़ंड्स का मक़सद बेंचमार्क को हराना नहीं होता, बल्कि उसे क़रीब-क़रीब फ़ॉलो करना होता है. इन्हें बेंचमार्क-बीटर लिस्ट में शामिल करना शुरुआत से ही ग़लत उम्मीद बना देता है.
स्टेप 2: तुलना लायक़ फ़ंड्स तक ही दायरा सीमित करें
बेंचमार्क की तुलना तब सबसे सही होती है जब फ़ंड का मक़सद साफ़ और स्थिर हो. सात फ़ंड्स की लिस्ट के लिए फ़्लेक्सी-कैप, लार्ज-कैप, लार्ज एंड मिड-कैप, मिड-कैप और ELSS जैसी डाइवर्सिफ़ाइड कैटेगरी से शुरुआत करें. इन कैटेगरी में आम तौर पर बेंचमार्क साफ़ होते हैं और ट्रैक रिकॉर्ड भी लंबा होता है.
थीमैटिक या सेक्टर फ़ंड्स के साथ ज़्यादा सतर्क रहें. ये किसी एक साल शानदार दिख सकते हैं और फिर साइकल पलटते ही सब कुछ वापस दे सकते हैं. बेंचमार्क को हराने पर भी, ज़्यादातर निवेशकों के लिए इनसे मिलने वाला सबक़ अलग होता है.
स्टेप 3: पहले प्लान टाइप तय करें
डायरेक्ट और रेगुलर प्लान में मुख्य फ़र्क़ एक्सपेंस रेशियो का होता है, और ये फ़र्क़ समय के साथ रिटर्न में साफ़ दिखता है. साफ़ तुलना के लिए एक प्लान टाइप चुनिए और सभी सात फ़ंड्स में उसी को लागू कीजिए.
डायरेक्ट प्लान में तुलना आम तौर पर आसान होती है क्योंकि डिस्ट्रीब्यूटर ख़र्च हट जाते हैं. अगर आप रेगुलर प्लान में निवेश करते हैं, तो वो भी ठीक है. बस ये सुनिश्चित करें कि पूरी तुलना रेगुलर प्लान के दायरे में ही रहे.
स्टेप 4: हर फ़ंड पेज पर बेंचमार्क कन्फ़र्म करें
हर शॉर्टलिस्ट किए गए फ़ंड का पेज खोलिए. रिटर्न सेक्शन में आपको फ़ंड के साथ उसका बेंचमार्क भी दिखेगा. उसे नोट कर लीजिए.
ये मानकर न चलें कि एक ही कैटेगरी के सारे फ़ंड एक-सा बेंचमार्क इस्तेमाल करते हैं. जैसे, ये न मानें कि हर फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड को Nifty 50 से ही मापा जाना चाहिए. यही एक स्टेप सबसे आम ग़लती को दूर कर देता है.
स्टेप 5: एक ही समयावधि के रिटर्न की तुलना करें
अब फ़ंड के रिटर्न की तुलना उसके बेंचमार्क के रिटर्न से उसी अवधि और उसी आख़िरी तारीख़ के लिए करें. अगर आप दिसंबर के आख़िर तक के एक-साल के रिटर्न देख रहे हैं, तो बेंचमार्क का रिटर्न भी उसी तारीख़ तक का होना चाहिए.
अगर उस अवधि में फ़ंड बेंचमार्क को हराता है, तो वो योग्य है. अगर नहीं हराता, तो नहीं है, चाहे वो दूसरे फ़ंड्स के मुक़ाबले कैसा भी दिखे.
इस स्टेप तक आते-आते आम तौर पर आपके पास सात से ज़्यादा फ़ंड्स बच जाते हैं. ये अच्छी बात है. इसका मतलब है कि आप कहानी गढ़ने के बजाय डेटा को बोलने दे रहे हैं.
स्टेप 6: दो व्यवहारिक फ़िल्टर से लिस्ट छोटी करें
अब बेंचमार्क-बीटर फ़ंड्स की लिस्ट को ऐसे फ़िल्टर से छोटा करें जो असली पोर्टफ़ोलियो में मायने रखते हैं.
पहला, मल्टी-ईयर व्यवहार देखें. जो फ़ंड एक साल में बेंचमार्क को हराए लेकिन तीन या पांच साल में पीछे रह जाए, वो शायद शॉर्ट-टर्म स्टाइल साइकिल पर सवार हो. ये अपने-आप में ग़लत नहीं है, लेकिन आपको पता होना चाहिए कि आप क्या ख़रीद रहे हैं.
दूसरा, डुप्लिकेशन जांचें. कई निवेशक अनजाने में बहुत मिलते-जुलते पोर्टफ़ोलियो वाले फ़ंड्स रख लेते हैं. वैल्यू रिसर्च के पोर्टफ़ोलियो टूल्स से ओवरलैप देखना आसान है. दो लगभग एक-से फ़ंड रखने से डाइवर्सिफ़िकेशन नहीं बढ़ता, सिर्फ़ जटिलता बढ़ती है.
स्टेप 7: तय करें कि अगर फ़ंड बेंचमार्क को हराना बंद कर दे तो क्या करेंगे
ये सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ किया जाने वाला स्टेप है. निवेशक फ़ंड को लिस्ट में लाने पर ध्यान देते हैं, ये भूल जाते हैं कि वो बाहर भी हो सकता है.
अपने सात नामों पर कदम उठाने से पहले एक रिव्यू नियम तय करें. समझदारी भरा तरीक़ा ये है कि साल में एक बार समीक्षा करें और बदलाव तभी सोचें जब अंडरपरफ़ॉर्मेंस लगातार हो, मायने रखती हो और फ़ंड के व्यवहार में बदलाव के साथ आई हो. इक्विटी निवेश में एक ख़राब साल आम बात है. थोड़े समय की गिरावट के बाद घबराकर स्विच करना अक्सर निवेशकों को रिटर्न-चेज़र बना देता है.
सात स्टेप शुरुआत हैं, फ़ैसला नहीं
आप यहां फ़ंड्स की लिस्ट पाने आए थे, और वो आपको मिल जाएगी, जब आप ऊपर बताए तरीक़े को एक ही तारीख़ पर, एक ही प्लान टाइप में और सही बेंचमार्क के साथ लागू करेंगे. वो शॉर्टलिस्ट किसी भी ऐसी जनरल लिस्ट से कहीं ज़्यादा भरोसेमंद होगी जो ये नहीं बता पाती कि तुलना कब हुई, कैसे हुई और किस बेंचमार्क से हुई.
अगर आप बिना अपना विवेक छोड़े शॉर्टकट चाहते हैं, तो फ़ंड सलेक्टर से शुरुआत करें, फिर अलग-अलग फ़ंड पेज और पोर्टफ़ोलियो टूल्स से बेंचमार्क और ओवरलैप जांचें. 2025 में HDFC म्यूचुअल फ़ंड्स को समझने का ये सबसे व्यावहारिक तरीक़ा है, बिना एक-साल की लीडरबोर्ड के जाल में फंसे.
म्यूचुअल फ़ंड्स पर ऐसी ही गहराई वाली समझ के लिए वैल्यू रिसर्च पढ़ते रहिए.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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