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सारांशः SBI लार्ज कैप फ़ंड का 2025 में बेंचमार्क से पीछे रहना पहली नज़र में चिंताजनक लग सकता है. लेकिन असल सवाल यह नहीं है कि यह पीछे क्यों रहा, बल्कि यह है कि क्या इसने वैसा ही व्यवहार किया जैसा एक लार्ज-कैप फ़ंड से उम्मीद की जाती है.
जब कोई लार्ज-कैप फ़ंड अपने बेंचमार्क से पीछे रहता है, तो स्वाभाविक प्रतिक्रिया यही होती है कि “आख़िर ग़लत क्या हुआ?”
हक़ीक़त में, अंडरपरफ़ॉर्मेंस शायद ही कभी इतनी सीधी होती है.
2025 में SBI लार्ज कैप फ़ंड का अपने बेंचमार्क से पीछे रहना न तो कोई रहस्य है और न ही कोई अपवाद. आमतौर पर यह तीन बातों का मिला-जुला नतीजा होता है: फंड ने कहां ज़्यादा ख़रीदने का फैसला किया, कहां जानबूझकर कम ख़रीदा, और वे छोटी लेकिन लगातार बनी रहने वाली स्ट्रक्चरल दिक्कतें जिनका सामना इंडेक्स को नहीं करना पड़ता.
पहला क़दम सही संदर्भ तय करना है. वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन पर, SBI लार्ज कैप फ़ंड के डायरेक्ट प्लान का बेंचमार्क BSE 100 TRI है. फ़ंड का एक साल का रिटर्न 11.68 प्रतिशत दिखता है, एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹55,637 करोड़ है (30 नवंबर 2025 तक) और एक्सपेंस रेशियो 0.79 प्रतिशत है (31 दिसंबर 2025 तक).
ये आंकड़े यह नहीं बताते कि फ़ंड ‘अच्छा’ है या ‘ख़राब’. ये सही सवाल की दिशा दिखाते हैं: फ़ंड ने एक ब्रॉड लार्ज-कैप इंडेक्स के मुक़ाबले कैसा व्यवहार किया और उस व्यवहार से अंतर क्यों पैदा हुआ?
यही वजह है कि यह SBI म्यूचुअल फ़ंड के निवेशकों के लिए एक उपयोगी केस स्टडी बनती है. “यह पीछे क्यों रहा?” पर रुकने के बजाय ज़्यादा उपयोगी सवाल है, “कौन-से एक्टिव फ़ैसले इस अंतर की वजह बने, और क्या ये फ़ैसले उस तरह के हैं, जिसकी उम्मीद एक लार्ज-कैप फ़ंड से की जाती है?”
इंडेक्स एक तय रूल-बुक का पालन करता है. फ़ंड फ़ैसले लेता है.
BSE 100 TRI मार्केट-कैप वेटेड है. जो शेयर बड़े होते हैं, उनमें इसका एक्सपोज़र अपने-आप बढ़ जाता है और जो छोटे होते हैं, उनमें घट जाता है. इसमें कोई कैश नहीं होता और न ही किसी तरह के जजमेंट कॉल लेने पड़ते हैं.
एक एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड अलग तरह से काम करता है. काग़ज़ पर चाहे वह काफ़ी कंज़रवेटिव क्यों न दिखे, उसमें दर्जनों फ़ैसले: सेक्टर टिल्ट, शेयरों का वज़न और टाइमिंग शामिल होते हैं. जिस साल बाज़ार की लीडरशिप सीमित हो या मोमेंटम पर आधारित हो, उस साल ये फ़ैसले बिना कुछ ‘ग़लत’ हुए भी फ़ंड को इंडेक्स से पीछे छोड़ सकते हैं.
वजह 1: कुछ गिने-चुने हैवीवेट्स महंगे साबित हुए
6 जनवरी 2026 तक, SBI लार्ज कैप फ़ंड की सबसे बड़ी होल्डिंग्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज़ (8.17 प्रतिशत), HDFC बैंक (7.37 प्रतिशत), ICICI बैंक (7.24 प्रतिशत), लार्सन एंड टुब्रो (5.41 प्रतिशत) और एशियन पेंट्स (4.29 प्रतिशत) शामिल हैं.
यह कोई कमी नहीं है. लार्ज-कैप फ़ंड से यही उम्मीद की जाती है कि वह बड़े और लिक्विड बिज़नेस रखे. मुद्दा यह है कि जब कुछ ही शेयरों का वेट काफ़ी ज़्यादा होता है, तो बेंचमार्क के मुक़ाबले छोटे-छोटे फ़र्क़ भी जल्दी असर दिखाते हैं.
अगर 2025 की तेज़ी किसी और लार्ज-कैप समूह से आई हो, या उन हिस्सों से आई हो जहां फ़ंड अंडरवेट था, तो इंडेक्स आसानी से आगे निकल सकता है. फ़ंड ने बाज़ार को मोटे तौर पर सही पढ़ा हो, लेकिन वहां चूक गया हो जहां रिटर्न कॉन्संट्रेटेड थे.
वजह 2: मोमेंटम वाले बाज़ार में कंज़रवेटिव रुख़ पीछे रह सकता है
कई लार्ज-कैप फ़ंड जानबूझकर ज़्यादा चर्चित शेयरों से दूर रहते हैं, वैल्यूएशन ज़्यादा लगे तो एक्सपोज़र घटाते हैं या रफ़्तार की बजाय स्थिरता को तरजीह देते हैं. बाज़ार हर साल इस सोच को फ़ायदा नहीं पहुंचाता.
मोमेंटम से चलने वाले दौर में, इंडेक्स को अपने-आप फ़ायदा मिल जाता है क्योंकि वह सिर्फ़ मार्केट कैपिटलाइज़ेशन का पीछा करता है. कोई एक्टिव फ़ंड जो सबसे तेज़ भागते नामों के पीछे भागने से बचता है, या धीरे-धीरे ऐसा करता है, वह लीडरशिप बदलने तक पीछे रह सकता है.
यही वजह है कि एक साल के रिटर्न स्किल का इतना कमज़ोर पैमाना होते हैं. कोई फ़ंड इसलिए पीछे रह सकता है क्योंकि उसने पीछा न करने का फ़ैसला लिया. यह फ़ैसला किसी एक दौर में नुक़सान पहुंचा सकता है और किसी दूसरे दौर में पूंजी बचा सकता है. इसका मतलब साइकल्स के दौरान व्यवहार देखने से समझ में आता है, न कि सिर्फ़ एक साल देखकर.
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वजह 3: स्ट्रक्चरल दिक्कतें तब मायने रखती हैं जब अंतर छोटा हो
यहां दो हल्के लेकिन लगातार बने रहने वाले अवरोध दिखते हैं.
पहला, कॉस्ट. SBI लार्ज कैप फ़ंड के डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो 0.79 प्रतिशत है. एक इंडेक्स इससे काफ़ी कम चार्ज करता है. अगर किसी साल फ़ंड के एक्टिव फ़ैसले सिर्फ़ हल्की सा बढ़त जोड़ पाते हैं, तो फ़ीस उसे ख़त्म कर सकती है.
दूसरा, कैश और नॉन-इक्विटी एक्सपोज़र. 6 जनवरी 2026 तक, पोर्टफ़ोलियो का लगभग 96.75 प्रतिशत इक्विटी में है, करीब 2.90 प्रतिशत कैश और कैश इक्विवेलेंट्स में और 0.35 प्रतिशत डेट में. कैश आमतौर पर लिक्विडिटी के लिए रखा जाता है, लेकिन तेज़ी वाले बाज़ार में इतनी सी हिस्सेदारी भी पूरी तरह निवेशित इंडेक्स के मुक़ाबले परफ़ॉर्मेंस पर दबाव बना देती है.
वजह 4: बड़ा आकार सक्रियता को सीमित करता है
₹55,637 करोड़ के एसेट्स के साथ, SBI लार्ज कैप फ़ंड काफ़ी बड़ा है. लार्ज कैप्स में साइज़ अपने-आप में कोई नुकसान नहीं है, लेकिन यह व्यवहार को ज़रूर प्रभावित करता है. बड़े फ़ंड धीरे चलते हैं और आमतौर पर सबसे ज़्यादा लिक्विड शेयरों के दायरे में रहते हैं. इससे कुछ दौर में वे बंधे हुए लग सकते हैं और कुछ दौर में ज़्यादा बेंचमार्क जैसे.
कई निवेशक चाहते हैं कि बड़ा फ़ंड इंडेक्स जैसा भी चले और उसे मात भी दे. यह उम्मीद हक़ीक़त से दूर है. लार्ज-कैप एक्टिव फ़ंड अक्सर इन दोनों के बीच कहीं ठहरते हैं.
2025 से नतीजा निकालने से पहले क्या जांचें
एक साल को फ़ैसला मानने से पहले, एक साधारण चेकलिस्ट मददगार रहती है.
फ़ंड के रोलिंग रिटर्न देखें, सिर्फ़ एक साल की तस्वीर नहीं. एक साल का अंडरपरफ़ॉर्मेंस आम बात है. अहम यह है कि क्या फ़ंड ज़्यादातर तीन और पांच साल के दौर में भी पीछे रहता है.
पोर्टफ़ोलियो को समझें. अगर कुछ बड़े शेयर ज़्यादातर अंतर की वजह बने हैं, तो वह स्थिति अलग है, बजाय इसके कि पूरी स्टॉक सलेक्शन ही कमज़ोर हो.
स्टाइल और एक्ज़ीक्यूशन को अलग करें. कंज़रवेटिव स्टाइल मोमेंटम वाले बाज़ार में पीछे रहेगा. ख़राब एक्ज़ीक्यूशन बिल्कुल अलग समस्या है.
आख़िर में, फ़ंड से अपनी उम्मीद साफ़ रखें. अगर बेंचमार्क जैसे रिटर्न और बहुत कम उतार-चढ़ाव चाहिए, तो इंडेक्स फ़ंड सबसे साफ़ विकल्प है. अगर एक्टिव मैनेजमेंट चाहिए और कुछ दौर के अंडरपरफ़ॉर्मेंस को सहन किया जा सकता है, तो सिर्फ़ एक साल का अंतर अपने-आप में कोई कार्रवाई का संकेत नहीं होना चाहिए.
यही यहां की असल सीख है. अंडरपरफ़ॉर्मेंस कोई फ़ैसला नहीं है. यह जांचने का संकेत है कि फ़ंड ने वैसा व्यवहार किया या नहीं, जैसी उम्मीद थी, और क्या उसका मूल्यांकन सही समय-सीमा में किया जा रहा है.
अगर यह जानना है कि 2025 में किन लार्ज-कैप फ़ंड्स ने अपने बेंचमार्क को हराया, तो कैटेगरी के फ़ंड मॉनिटर सेक्शन में देखा जा सकता है. यहां हर फ़ंड की लॉन्ग-टर्म और शॉर्ट-टर्म परफ़ॉर्मेंस के साथ-साथ AUM, एक्सपेंस रेशियो, होल्डिंग्स और अन्य अहम मेट्रिक्स की पूरी तस्वीर भी मिलती है.
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