लर्निंग

मेरी SIP एक साल में 12% नीचे है, जानिए वो बात जो किसी ने पहले नहीं बताई?

शुरुआती सालों में SIP में नुक़सान क्यों दिख सकता है और यह असफलता क्यों नहीं है

एक साल बाद मेरी SIP 12% नीचे चली गई, मैंने यह सबक़ लियाAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः आपकी SIP का नुक़सान में दिखना विश्वासघात जैसा लग सकता है-ख़ासतौर पर तब, जब आपको “अच्छे रिटर्न” का वादा किया गया हो. यह कहानी बताती है कि SIP शुरुआती वर्षों में लाल निशान क्यों दिखा सकता है, रुपये की लागत औसत (Rupee Cost Averaging) होने से असल में क्या फ़ायदा मिलता है और आखिर में SIP काम करेगी या नहीं-यह किस पर निर्भर करता है.

“आपका पोर्टफ़ोलियो 12 प्रतिशत नीचे है.”

फोन पर आए नोटिफिकेशन को देखकर मैं कुछ देर तक घूरता रहा. मुझे यकीन ही नहीं हुआ. मैं एक साल से SIP कर रहा था. पूरे एक साल का अनुशासित, जिम्मेदारी के साथ निवेश. मैंने रुपये की लागत औसत होने पर पर ढेरों लेख पढ़े थे और यह भी कि SIP ही “अमीर बनने” का सबसे भरोसेमंद तरीक़ा है. पॉडकास्ट सुने थे, जहां बताया जाता था कि SIP कैसे ‘जोखिम घटाता है’ और ‘उतार-चढ़ाव को संतुलित करता है’.

किसी ने यह नहीं बताया था कि इसमें सचमुच नुक़सान भी हो सकता है.

मैंने ऐप खोला. स्क्रीन पर लाल रंग में सब कुछ साफ़ दिख रहा था: ₹1.2 लाख निवेश, मौजूदा वैल्यू ₹1.12 लाख. यानी ₹8,000 का नुकसान, जो एक साल में करीब -12 प्रतिशत XIRR के रूप में दिख रहा था.

मैंने अपनी दोस्त स्तुति को फोन किया, जो लंबे समय से निवेश कर रही है.

मैंने घबराहट छुपाते हुए कहा, “मुझे तो लगा था SIP सुरक्षित होते हैं.”

उसने दोहराया, “सुरक्षित? ये तुम्हें किसने बताया?”

“सबने. हर लेख, हर एक्सपर्ट. सब कहते हैं कि SIP जोखिम कम करता है.”

स्तुति ने संभलकर कहा, “SIP जोखिम कम करता है. खत्म नहीं करता. तुमने निवेश कब शुरू किया था?”

“जनवरी 2025.”

फोन पर एक छोटा सा सन्नाटा छा गया. “अच्छा… हां. बस, यही वजह है.”

SIP के चार्ट जो नहीं दिखाते

स्तुति ने मुझे वो बात समझाई, जो उन तमाम उत्साह से भरे लेखों में छूट जाती है: SIP कभी भी पॉज़िटिव रिटर्न की गारंटी नहीं देता. यह बस आपको एक ही समय पर बड़ी रक़म लगाने की ख़राब टाइमिंग से बचाता है.

उसने कहा, “सोचो. तुमने 2025 की शुरुआत में SIP शुरू की. उससे कुछ महीने पहले सेंसेक्स और निफ़्टी ऑल-टाइम हाई पर थे. उसके बाद कई महीनों तक बाज़ार गिरा. 2025 के शुरुआती महीनों में इंडेक्स सितंबर के हाई से काफ़ी नीचे थे. तुम्हारे शुरुआती निवेश महंगे दाम पर यूनिट्स ख़रीद रहे थे. बाद में सस्ती यूनिट्स मिलीं, लेकिन औसत लागत अब भी मौजूदा क़ीमत से ज्यादा हो सकती है.”

वह सही थी. 2024 के पीक से निफ़्टी क़रीब 15 प्रतिशत गिरकर 2025 की शुरुआत तक आ गया था. मेरी SIP महीनों से गिरते बाज़ार में निवेश कर रही थी.

मैंने विरोध करते हुए कहा, “लेकिन मैं तो रुपये की लागत औसत कर रहा हूं. क्या यही इसे ठीक नहीं करता?”

स्तुति ने धैर्य से समझाया, “रुपये की लागत औसत होने से आपको गिरते दामों पर ज़्यादा यूनिट्स ख़रीदने में मदद मिलती है. लेकिन अगर बाज़ार आपकी औसत ख़रीद क़ीमत से नीचे ही बना रहे, तो आप नुक़सान में ही रहेंगे. ये गणित है, जादू नहीं.”

मुझे लगा जैसे किसी ने सच छुपाया हो. हर SIP विज्ञापन में ऊपर जाती हुई साफ़-सुथरी लाइनें दिखती हैं. कोई नहीं बताता कि वह लाइन नीचे भी जा सकती है.

SIP में असल में होती क्या है

समझाने के लिए स्तुति ने एक आसान उदाहरण भेजा.

मान लीजिए आप छह महीनों तक हर महीने ₹10,000 निवेश करते हैं और यूनिट की क़ीमतें इस तरह हैं:

महीना 1: ₹100 प्रति यूनिट (100 यूनिट ख़रीदीं)

महीना 2: ₹90 प्रति यूनिट (क़रीब 111 यूनिट)

महीना 3: ₹80 प्रति यूनिट (125 यूनिट)

महीना 4: ₹75 प्रति यूनिट (क़रीब 133 यूनिट)

महीना 5: ₹70 प्रति यूनिट (क़रीब 143 यूनिट)

महीना 6: ₹85 प्रति यूनिट (क़रीब 118 यूनिट)

कुल निवेश: ₹60,000. कुल यूनिट: 730.

मौजूदा क़ीमत ₹85 होने पर वैल्यू: ₹62,045.

आप ₹2,045 फ़ायदे में हैं. ध्यान दीजिए-क़ीमत शुरुआत से कम है (₹85 बनाम ₹100), फिर भी आप मुनाफ़े में हैं क्योंकि औसत लागत क़रीब ₹83.3 प्रति यूनिट है.

स्तुति ने कहा, “अब सोचो अगर छठे महीने की कीमत ₹75 होती. तब तुम्हारे पास 745 यूनिट होतीं, जिनकी वैल्यू ₹55,875 होती. ₹60,000 लगाने के बाद भी ₹4,125 का नुक़सान. यानी परफेक्ट रुपया लागत औसत के बाद भी नेगेटिव रिटर्न.”

अब बात समझ में आ गई. SIP गिरते बाज़ार में औसत लागत कम करता है, लेकिन अगर बाज़ार नीचे ही रहे, तो पोर्टफ़ोलियो लाल रहेगा.

वह सवाल जो कोई पूछना नहीं चाहता

मैंने पूछा, “तो फिर यह काम कब करता है?”

स्तुति ने सीधा जवाब दिया, “समय. शेयर बाजार अल्पकाल में बहुत उतार-चढ़ाव वाला होता है. लेकिन सात, 10, 15 साल में इसका रुझान ऊपर की ओर रहता है. SIP इसलिए काम करती है क्योंकि यह आपको उतार-चढ़ाव के दौरान निवेशित बनाए रखती है. नुकसान उन्हीं लोगों को होता है जो लाल रंग देखकर रुक जाते हैं.”

मैं सोच में पड़ गया. एक साल का नज़रिया अचानक बहुत छोटा लगने लगा.

मैंने पूछा, “अब मुझे क्या करना चाहिए? मैं 12 प्रतिशत नीचे हूं. क्या रुककर रिकवरी का इंतजार करूं?”

स्तुति ने सख्त लहजे में कहा, “यह सबसे ख़राब फ़ैसला होगा. अभी तुम सस्ती यूनिट्स ख़रीद रहे हो. अगर रुक गए, तो नुक़सान पक्का कर लोगे और रिकवरी मिस कर दोगे. अगले दो साल सब कुछ पलट सकते हैं-लेकिन तभी, जब तुम निवेश जारी रखो.”

यह भी पढ़ेंः आपकी SIP अच्छा रिटर्न नहीं दे रही, तो क्या निवेश जारी रखना चाहिए?

मैं अब क्या कर रहा हूं

मैंने SIP बंद नहीं की. आसान नहीं था. हर महीने खाते से ₹10,000 जाते देखते हुए लगता था कि कहीं बेकार में पैसा तो नहीं डाल रहा.

मैंने अपनी समयसीमा बढ़ा दी. “एक साल” की जगह “एक दशक” सोचने लगा. पोर्टफ़ोलियो को बार-बार देखना बंद किया. सब कुछ ऑटोमेट कर दिया और इसे एक ज़रूरी बिल की तरह मान लिया, जिसे हर महीने चुकाना है.

आज मेरा पोर्टफ़ोलियो हरे रंग में है. ज़्यादा नहीं-सिर्फ़ 1.5 प्रतिशत-लेकिन लाल नहीं है. मंदी के दौरान खरीदी गई यूनिट्स अब असर दिखा रही हैं.

स्तुति सही थी. SIP फेल नहीं हुई थी. मेरी उम्मीदें फेल हुई थीं.

SIP की सच्चाई

काश किसी ने शुरुआत में ही यह साफ़ बता दिया होता: हां, SIP में भी नेगेटिव रिटर्न हो सकता है. अगर आप बाज़ार के पीक पर शुरू करते हैं और छह महीने या एक साल में जांचते हैं, तो नुक़सान दिख सकता है.

SIP इस मायने में “सुरक्षित” नहीं है कि यह मुनाफ़े की गारंटी देती है. यह सिर्फ़ एकमुश्त निवेश के मुकाबले “ज़्यादा सुरक्षित” है क्योंकि यह टाइमिंग रिस्क घटाती है, मार्केट रिस्क नहीं.

इक्विटी अस्थिर है. म्यूचुअल फ़ंड अस्थिर हैं. SIP इस अस्थिरता को संतुलित करती है, खत्म नहीं करता.

SIP की असली ताकत यह नहीं है कि इसमें नुक़सान नहीं हो सकता. इसकी ताकत यह है कि यह नुक़सान के समय भी आपको अनुशासित बनाए रखती है-और वही अनुशासन आखिरकार मुनाफ़े तक ले जाता है.

अगर आप आज SIP शुरू कर रहे हैं, तो यह समझ लें: शुरुआती महीनों में नुक़सान दिख सकता है, ख़ासकर अगर बाज़ार और गिरे. यह असफलता नहीं है. यह इक्विटी का स्वभाव है.

असफलता तब है, जब आप लाल रंग देखकर रुक जाते हैं-क्योंकि वही समय होता है, जब आपकी सस्ती ख़रीदारी करके SIP सबसे अच्छा काम कर रही होती है.

निवेश जारी रखें. समय बढ़ाएं. और याद रखें-SIP सच में तभी फेल होती है, जब आप बीच में छोड़ देते हैं.

अगर आप अपनी SIP की यात्रा की शुरुआत कर रहे हैं या यह सोच रहे हैं कि कौन-से फंड चुनें, तो Value Research Fund Advisor आपकी मदद कर सकता है. यह एक्सपर्ट्स द्वारा चुने गए म्यूचुअल फ़ंड्स की एक शॉर्टलिस्ट देता है, ताकि आपको हर फ़ैसले पर दोबारा शक न करना पड़े.

फ़ंड एडवाइज़र से अभी जुड़ें 

यह भी पढ़ेंः SIP रोकने से नुक़सान नहीं होता? इस निवेशक को ₹17 लाख का झटका लगा

ये लेख पहली बार जनवरी 30, 2026 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

‘मेरे पोर्टफ़ोलियो में 25 फ़ंड हैं. शुरुआत कहां से करूं?’

पढ़ने का समय 5 मिनटउदयप्रकाश

20% रिटर्न, हर महीने ₹1 लाख: क्या ऐसी उम्मीद लगाना सही है?

पढ़ने का समय 6 मिनटअभिषेक राणा

मिडिल ईस्ट में युद्ध और असर आपकी जेब पर

पढ़ने का समय 6 मिनटउदयप्रकाश

इमरजेंसी फ़ंड की समस्या

पढ़ने का समय 5 मिनटअमेय सत्यवादी

क्या आपका म्यूचुअल फ़ंड सच में आपके लिए काम कर रहा है?

पढ़ने का समय 5 मिनटअमेय सत्यवादी

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

गैरज़रूरी जटिलता की बीमारी फिर लौटी

गैरज़रूरी जटिलता की बीमारी फिर लौटी

SEBI का नया कैटेगराइज़ेशन से जुड़ा सर्कुलर पुराने मसलों को ठीक करता है, लेकिन इंडस्ट्री को प्रोडक्ट के लिहाज़ से अगले दौर की भीड़ के लिए नया सामान भी दे देता है

दूसरी कैटेगरी