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सारांश: कॉन्ट्रेरियन निवेश का मतलब बड़े और चौंकाने वाले दांव लगाना नहीं होता. इसका मतलब होता है तब धैर्य रखना, जब बाज़ार का मूड ख़राब हो. यह लेख बताता है कि आज वैल्यू-आधारित सोच कैसे अपनाई जा रही है, जहां उम्मीदें कम हैं, वैल्यूएशन में सुरक्षा दिखती है और कमाई में सुधार धीरे-धीरे असली काम करता है.
कॉन्ट्रेरियन निवेश को अक्सर बाज़ार के उलट बड़े फ़ैसले लेने के तौर पर समझ लिया जाता है. असल में यह तरीका कहीं ज़्यादा संतुलित होता है. इसमें ऐसे बिज़नेस तलाशे जाते हैं, जहां हाल की निराशा ने माहौल को दबा दिया हो, लेकिन बुनियादी हालात स्थिर हो रहे हों और वैल्यूएशन में सुरक्षा की गुंजाइश दिखती हो.
यही स्ट्रक्चर तय करता है कि कोटक म्यूचुअल फ़ंड की सीनियर फ़ंड मैनेजर और इक्विटी रिसर्च की प्रमुख शिबानी कुरियन आज अपने पोर्टफ़ोलियो कैसे बना रही हैं. कुरियन कोटक कॉन्ट्रा फ़ंड के साथ-साथ कोटक फ़ोकस्ड फ़ंड भी संभालती हैं और कई दूसरी इक्विटी स्ट्रैटेजी की देखरेख करती हैं.
मैक्रो अनुमानों पर भरोसा करने की बजाय, कॉन्ट्रा स्ट्रैटेजी वैल्यूएशन अनुशासन और डायवर्सिफ़िकेशन पर टिकी रहती है. पोर्टफ़ोलियो में आम तौर पर 50 से 60 स्टॉक्स होते हैं और इसमें अलग-अलग मार्केट कैप में जाने की आज़ादी रहती है. ज़ोर इस बात पर होता है कि नुक़सान की संभावना सीमित रहे, लेकिन कमाई में सुधार के लिए स्थिति बनी रहे.
“वैल्यूएशन के नज़रिये से यह स्ट्रैटेजी वैल्यू-बायस रखती है, जिससे ख़ासतौर पर बाज़ार में उतार-चढ़ाव के दौरान नीचे की तरफ़ जोखिम काबू में रहता है,” कुरियन ने हमारे साथ बातचीत में कहा. 4 फ़रवरी तक कोटक कॉन्ट्रा फ़ंड ने पिछले एक साल में 12.65 प्रतिशत रिटर्न दिया, जबकि उसका बेंचमार्क निफ़्टी 500 TRI 9.35 प्रतिशत रहा.
फ़ाइनेंशियल्स: एक मुश्किल दौर के बाद रिकवरी
बैंकिंग और फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ इस फ़ंड में सबसे बड़ा ओवरवेट बने हुए हैं. हालांकि आज यह सेक्टर कॉन्ट्रेरियन नहीं लगता, लेकिन जब इसमें निवेश बढ़ाया गया था, तब माहौल कहीं ज़्यादा सतर्क था. फ़ंड का फ़ाइनेंशियल्स में निवेश क़रीब 34 प्रतिशत है, जो कैटेगरी औसत लगभग 32 प्रतिशत से थोड़ा ज़्यादा है. टॉप होल्डिंग्स में HDFC बैंक, ICICI बैंक और स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया शामिल हैं.
“बैंकों ने एक काफ़ी दर्दनाक दौर देखा है, जहां क्रेडिट ग्रोथ कम थी और गिरती ब्याज़ दरों की वजह से मार्जिन पर दबाव था,” कुरियन ने कहा. “अब धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिख रहे हैं. क्रेडिट ग्रोथ और मार्जिन नीचे के स्तर पर ठहरते नज़र आ रहे हैं. जैसे-जैसे रेट-कट साइकल अपने आख़िरी चरण में पहुंचेगा, बैंक कमाई में सुधार के बड़े चालक बन सकते हैं.”
हेल्थकेयर: हॉस्पिटल अलग नज़र आते हैं
हेल्थकेयर, ख़ासतौर पर हॉस्पिटल्स, एक और ऐसा क्षेत्र है जहां कुरियन को वैल्यू दिखती है. वैल्यूएशन अब भी संतुलित हैं और ऑपरेशनल संकेतक लगातार बेहतर हो रहे हैं. कोटक कॉन्ट्रा फ़ंड का हेल्थकेयर में निवेश क़रीब 10 प्रतिशत है, जो कैटेगरी औसत लगभग 5 प्रतिशत से काफ़ी ज़्यादा है.
टेक्नोलॉजी: थीम नहीं, चुनिंदा दांव
टेक्नोलॉजी में निवेश ज़्यादा चुनिंदा है, किसी बड़ी थीम के तहत नहीं. नज़दीकी समय में ग्रोथ की साफ़ तस्वीर थोड़ी धुंधली है और ग्लोबल IT ख़र्च अब भी एक-सा नहीं है. इसके बावजूद बैलेंस शीट मज़बूत हैं, वैल्यूएशन में सुधार आया है और लंबी अवधि की मांग के ड्राइवर अब भी कायम हैं.
कोटक कॉन्ट्रा फ़ंड और कोटक फ़ोकस्ड फ़ंड, दोनों में टेक्नोलॉजी का वज़न काफ़ी ज़्यादा है. यह पूरे सेक्टर पर दांव नहीं, बल्कि कुछ ख़ास मौक़ों पर भरोसा दिखाता है.
सीमेंट: छोटा लेकिन अहम दांव
सीमेंट में निवेश हिस्सा भले ही छोटा हो, लेकिन कॉन्ट्रेरियन सोच से यह अहम है. लंबे समय तक मांग की रफ़्तार धीमी रहने के बाद अब सुधार की उम्मीद है. इनपुट लागत ज़्यादातर काबू में है. ऐसे में वॉल्यूम में हल्की-सी बढ़त भी मार्जिन सुधार में बदल सकती है, जो बेहतर EBITDA प्रति टन में दिखेगा.
एक साझा सूत्र
हर सेक्टर में एक बात समान है. वैल्यूएशन में सहजता और कमाई में सुधार की बेहतर तस्वीर. अभी जो चलन में है, उसके पीछे भागने की बजाय पोर्टफ़ोलियो उन बिज़नेस के इर्द-गिर्द बनाया गया है, जहां उम्मीदें कम हैं लेकिन बुनियादी हालात बेहतर हो रहे हैं.
कुरियन का मानना है कि यही अनुशासन कॉन्ट्रा स्ट्रैटेजी को बाज़ार के अलग-अलग दौर में धैर्यवान और टिकाऊ बनाए रखता है, बिना किसी बड़े या अल्पकालिक दांव पर निर्भर हुए.
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