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सारांशः जनवरी के फ़ंड फ़्लो के आंकड़े बताते हैं कि बाज़ार में उतार-चढ़ाव आने पर निवेशकों ने कैसी प्रतिक्रिया दी. गोल्ड और सिल्वर अचानक इक्विटी के बराबर पहुंच गए, हाइब्रिड फ़ंड्स को ज़्यादा पसंद किया गया, जबकि SIP निवेश स्थिर बना रहा. क्या बदला और यह बदलाव निवेशकों के मौजूदा व्यवहार के बारे में क्या बताता है?
जनवरी के म्यूचुअल फ़ंड डेटा ने निवेशकों के व्यवहार में एक साफ़ बदलाव दिखाया. गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फ़ंड्स (ETF) में महीने के दौरान ₹24,039 करोड़ का निवेश आया, जो इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड्स में आए ₹24,029 करोड़ के निवेश के लगभग बराबर था. यह क़रीबी बराबरी इस बात का शुरुआती संकेत थी कि हालिया बाज़ार प्रदर्शन के जवाब में निवेशकों ने अपने एलोकेशन में बदलाव किया.
इक्विटी फ़ंड्स में निवेश दिसंबर के ₹28,054 करोड़ से घटा, जो बाज़ार के अलग-अलग हिस्सों में आई तेज़ गिरावट को दिखाता है. जनवरी के दौरान BSE सेंसेक्स में 3.4 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि BSE मिड कैप और BSE स्मॉल कैप इंडेक्स क्रमशः 3.77 प्रतिशत और 6.29 प्रतिशत गिरे. इस माहौल में गोल्ड फ़ंड्स ने महीने के दौरान क़रीब 22.3 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जिससे इक्विटी के कमज़ोर होने से पीली धातु की ओर उनका झुकाव और बढ़ गया.
यह रोटेशन सिर्फ़ गोल्ड तक सीमित नहीं रहा. सिल्वर ETF में भी जनवरी में ₹9,463 करोड़ का मज़बूत निवेश आया, जिसे कैटेगरी में क़रीब 40 प्रतिशत के रिटर्न का सहारा मिला. कुल मिलाकर, क़ीमती धातुओं वाले ETF में आए निवेश ने दिखाया कि साल की शुरुआत में निवेशकों ने एसेट क्लास के बीच प्रदर्शन के फ़र्क पर कितनी तेज़ी से प्रतिक्रिया दी.
इक्विटी के भीतर, फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स का दबदबा बना रहा और इनमें ₹7,672 करोड़ का कुल निवेश आया. इनकी लोकप्रियता अनिश्चित बाज़ार हालात में लचीले इनवेस्टमेंट स्ट्रक्चर की पसंद को दिखाती है. मिड-कैप और स्मॉल-कैप फ़ंड्स में मिलाकर ₹6,127 करोड़ का निवेश आया, जिससे साफ़ है कि हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद रिस्क लेने की इच्छा पूरी तरह ख़त्म नहीं हुई है. इसके उलट, सेक्टोरल और थीमैटिक फ़ंड्स में सिर्फ़ ₹1,043 करोड़ का सीमित निवेश आया, जो संकरे दायरे वाली रणनीतियों को लेकर सतर्क रुख़ दिखाता है.
हाइब्रिड स्कीमों में भी साफ़ बढ़त देखने को मिली. जनवरी में इनमें कुल निवेश बढ़कर ₹17,356 करोड़ हो गया, जो दिसंबर में ₹10,756 करोड़ था. इस कैटेगरी में मल्टी-एसेट एलोकेशन फ़ंड्स सबसे आगे रहे और इनमें ₹10,485 करोड़ का निवेश आया, जो कुल हाइब्रिड निवेश का क़रीब 60 प्रतिशत था. वहीं आर्बिट्राज फ़ंड्स में ₹3,293 करोड़ का निवेश हुआ.
“क़ीमती धातुएं लगातार चमक़ रही हैं. जनवरी में गोल्ड ETF में निवेश दिसंबर के मुक़ाबले दोगुना हो गया है. इसका असर मल्टी-एसेट कैटेगरी में भी दिख रहा है, जहां निवेशकों ने अपने एसेट एलोकेशन में डाइवर्सिटी लाने की कोशिश की है,” टाटा एसेट मैनेजमेंट के चीफ़ बिज़नेस ऑफ़िसर आनंद वर्दराजन ने कहा.
सिस्टमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिए निवेश ₹31,002 करोड़ पर स्थिर रहा, जो बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बावजूद रिटेल निवेशकों की निरंतर भागीदारी को दिखाता है. वहीं डेट फ़ंड्स में ₹74,827 करोड़ का कुल निवेश दर्ज हुआ, जिससे दिसंबर में हुए भारी रिडेम्प्शन की भरपाई हो गई. यह सुधार साल के अंत और एडवांस टैक्स से जुड़े निकासी के बाद संस्थागत लिक्विडिटी के सामान्य होने को दिखाता है. इस बढ़त में शॉर्ट-टर्म और ट्रेज़री से जुड़े फ़ंड्स की बड़ी भूमिका रही.
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