Aman Singhal/AI-Generated Image
सारांशः भारत का सबसे पुराना फ्लेक्सी-कैप फ़ंड UTI Flexi Cap Fund काफ़ी समय से अपने बेंचमार्क से पीछे चल रहा है. यहां UTI म्यूचुअल फ़ंड के हेड (इक्विटी) अजय त्यागी इस कमज़ोर प्रदर्शन के पीछे के कारणों पर विस्तार से बात कर रहे हैं.
पिछले एक साल में UTI Flexi Cap Fund ने 4.15 प्रतिशत रिटर्न दिया, जो इसके बेंचमार्क Nifty 500 TRI के 14.18 प्रतिशत रिटर्न से काफ़ी कम है. लेकिन ये कोई एक बार की चूक नहीं है. यह फ़ंड कुछ समय से अपने बेंचमार्क और पीयर्स यानि अपने जैसे दूसरे फ़ंड्स, दोनों से पीछे चल रहा है, जिससे निवेशकों के धैर्य की परीक्षा हो रही है.
UTI म्यूचुअल फ़ंड के हेड (इक्विटी) अजय त्यागी इस लंबे अंतर को ऐसे बाज़ार से जोड़ते हैं, जहां साइक्लिकल और वैल्यू स्टॉक्स का दबदबा रहा, जबकि फ़ंड का झुकाव क्वालिटी-ग्रोथ कंपनियों की ओर है. उनके अनुसार, यह अंतर फ़ंड की निवेश प्रक्रिया में बदलाव का संकेत नहीं है, बल्कि बाज़ार की स्टाइल साइकिल का असर है. उनका कहना है कि फोकस शॉर्ट-टर्म लीडरशिप के पीछे भागने के बजाय निरंतरता बनाए रखने पर है.
जब क्वालिटी पसंद से बाहर हो जाती है
UTI Flexi Cap Fund की हाल की मुश्किलें किसी एक ग़लत दांव से नहीं आई हैं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह का बाज़ार रहा है, उसका असर है. लीडरशिप मेटल्स, ग्लोबल साइक्लिकल और दूसरे वैल्यू-हैवी सेगमेंट्स की ओर शिफ़्ट हो गई, जबकि खपत से जुड़ी और स्थिर कंपाउंडिंग करने वाली कंपनियां पीछे रह गईं.
चूंकि फ़ंड का पोर्टफ़ोलियो अनुमानित कैश फ़्लो, मज़बूत बैलेंस शीट और टिकाऊ कमाई पर आधारित है, इसलिए इसे सस्ते और साइक्लिकल विकल्पों की बाज़ार पसंद के साथ कदम मिलाना मुश्किल रहा.
त्यागी ने कहा, “अंडरपरफ़ॉर्मेंस को बढ़ाने वाले सेक्टर्स हर साल बदल सकते हैं, लेकिन बड़ी तस्वीर एक जैसी रही है: क्वालिटी ने लगातार वैल्यू से कमज़ोर प्रदर्शन किया है. 2025 सहित पिछले चार सालों से यह रुझान बना हुआ है.”
अपने पक्ष को मज़बूत करने के लिए त्यागी लॉन्ग-टर्म फ़ैक्टर डेटा का हवाला देते हैं. भले ही पिछले चार साल इस स्टाइल के लिए असामान्य रूप से कठिन रहे हों, लेकिन पिछले दो दशकों में, ऐतिहासिक तौर पर क्वालिटी स्टॉक्स ने थोड़ा बेहतर रिटर्न और कम उतार-चढ़ाव दिया है.
लंबे समय की इस सुस्ती के बावजूद, फ़ंड की स्ट्रैटेजी कमाई की ग्रोथ पर टिकी हुई है, इस विश्वास के साथ कि अंत में फंडामेंटल्स अपना असर दिखाते हैं.
कमज़ोर प्रदर्शन का असर दूसरे फ़ंड्स पर भी
सुस्त प्रदर्शन सिर्फ़ UTI Flexi Cap Fund तक सीमित नहीं है. मध्यम और लंबे समय में AMC की लार्ज-कैप और मिड-कैप स्कीमें भी पीछे रही हैं.
यहां भी त्यागी इस बात पर ज़ोर देते हैं कि जब बाज़ार किसी स्टाइल के ख़िलाफ़ जाता है, तब तय निवेश रणनीति को छोड़ देना सही रास्ता नहीं होता.
उन्होंने कहा, “हक़ीक़त यह है कि हमारे फ़ंड्स जिस तरह पोज़िशन किए गए हैं, उसमें ऐसे दौर आएंगे जब कुछ स्कीमें दबाव में रहेंगी, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उनकी स्टाइल उस समय पसंद में नहीं है. सिर्फ़ इससे यह नहीं माना जा सकता कि प्रक्रिया में कोई ख़ामी है.”
यह भी पढ़ेंः निफ़्टी स्मॉल कैप 250 क्वालिटी 50 इंडेक्स कितना बेहतर?
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
शिकायतों के लिए संपर्क करें: [email protected]






