Fund Advisor's Note

जब डर तर्कसंगत लगता है

AI का डर असली है, इसलिए पोर्टफ़ोलियो में प्रतिक्रिया संतुलित होनी चाहिए

AI के डर का टेक फ़ंड पर असर: एग्ज़िट करें या निवेश में बने रहें?Aditya Roy/AI-Generated Image

मुझे इस हफ़्ते राजीव टंडन का एक सवाल मिला, जो अक्तूबर 2017 से वैल्यू रिसर्च के मेंबर हैं. वे चिंतित हैं. उनकी दो टेक्नोलॉजी फ़ंड्स, HDFC Technology और Tata Digital India में काफ़ी बड़ी रक़म लगी है और वे जानना चाहते हैं कि नुक़सान बुक करके बाहर निकल जाएं या बने रहें. मेरा अंदाज़ा है कि कई निवेशक मन ही मन यही सवाल पूछ रहे हैं. टेक सेक्टर फ़ंड्स हाल में दबाव में रहे हैं, साल की शुरुआत से अब तक लगभग 14 प्रतिशत नीचे और पिछले एक साल में भी क़रीब इतना ही. और, इसके पीछे जो डर है, वह असली है: अगर AI कोड लिख सकता है, तो उस भारतीय IT सर्विस मॉडल का क्या होगा जिसने दो दशकों में लाखों लोगों को रोज़गार दिया और बड़ी वेल्थ बनाई? मैं इस पर गंभीरता से सोच रहा हूं. अपने हालिया लेख ‘AI की कई दुनिया’ में मैंने कहा था कि हम एक बुनियादी ग़लती कर रहे हैं: हम AI को एक ऐसी ताक़त मान लेते हैं जो हर उद्योग में एक ही रफ़्तार से आगे बढ़ेगी.

ये लेख पहली बार फ़रवरी 24, 2026 को पब्लिश हुआ.

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