फंड वायर

15 साल के दौरान लगातार सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले 5 मिड-कैप फ़ंड

जिन्होंने ज़्यादातर पांच साल की होल्डिंग पीरियड में निफ़्टी मिड कैप 150 को पछाड़ा

जिन्होंने ज़्यादातर पांच साल की होल्डिंग पीरियड में निफ़्टी मिड कैप 150 को पछाड़ाMukul Ojha/AI-Generated Image

सारांशः सैकड़ों रोलिंग रिटर्न पीरियड. दर्जनों मिड-कैप फ़ंड. लेकिन सिर्फ़ पांच ऐसे टिकाऊ विनर, जिन्होंने ज़्यादातर समय निफ़्टी मिड कैप 150 इंडेक्स को पीछे छोड़ा. जानिए ये बाज़ीग़र कौन-से हैं.

क्या एक्टिव मिड-कैप फ़ंड लगातार अपने बेंचमार्क को हरा पाते हैं?

एक ऐसी दुनिया में, जो एक्टिव और पैसिव निवेशकों में साफ़ बंटी हुई है, यही सवाल बहस के केंद्र में रहता है.

आख़िरकार मिड-कैप स्टॉक्स स्टॉक चुनने वालों के लिए उपजाऊ ज़मीन हैं. थ्योरी के हिसाब से, यहां एक्टिव मैनेजरों को बढ़त मिलनी चाहिए.

लेकिन व्यवहार में ऐसा हमेशा नहीं होता. हर मिड-कैप फ़ंड आउटपरफ़ॉर्म नहीं करता. जो करते हैं, उनमें भी किसी एक शानदार साल से ज़्यादा अहम चीज़ है कंसिस्टेंसी.

कोई फ़ंड कभी-कभी इंडेक्स को हरा दे, तो हो सकता है वह अनुकूल बाज़ार हालात का असर हो. लेकिन जो फ़ंड अलग-अलग मार्केट साइकल में बार-बार ऐसा करे, वही ज़्यादा मायने रखता है.

कंसिस्टेंसी आपकी सफ़लता की संभावना बढ़ाती है. यह दिखाती है कि फ़ंड की स्ट्रैटेजी बुल मार्केट, करेक्शन और रिकवरी तीनों में काम आई है.

परफ़ॉर्मेंस चेक

इसे परखने के लिए हमने 19 फ़रवरी 2011 से 19 फ़रवरी 2026 के बीच, पिछले 15 सालों में रेगुलर मिड-कैप फ़ंड्स के पांच साल के मंथली रोलिंग रिटर्न का एनालेसिस किया. तुलना के लिए निफ़्टी मिड कैप 150 TRI को बेंचमार्क लिया गया.

सरल शब्दों में, इस अवधि के दौरान हर संभव पांच साल के होल्डिंग पीरियड को देखा गया. रिटर्न की कैलकुलेशन फ़रवरी 2011 से शुरू होकर मार्च 2011, अप्रैल 2011 और इसी तरह जनवरी 2026 तक की गई. इससे अलग-अलग बाज़ार हालात के नतीजे सामने आते हैं, सिर्फ़ एक अच्छे दौर के नहीं.

हमारा कंसिस्टेंसी फ़िल्टर साफ़ था. ऐसे फ़ंड जो कम से कम 60 प्रतिशत पांच साल की अवधि में इंडेक्स से बेहतर रहे हों.

60 प्रतिशत क्यों? क्योंकि आधे समय बेंचमार्क को हराना एक्टिव मैनेजमेंट को सही ठहराने के लिए काफ़ी नहीं है. स्पष्ट बहुमत यह दिखाता है कि बढ़त किस्मत नहीं, बल्कि स्ट्रक्चर की मज़बूती से आई है.

सिर्फ़ पांच फ़ंड इस कसौटी पर खरे उतरे. लॉन्च के बाद से उन्होंने कम से कम 60 प्रतिशत पांच साल की रोलिंग अवधि में निफ़्टी मिड कैप 150 को पछाड़ा.

यहां देखें उनकी स्थिति:

5) Kotak Midcap Fund

  • इंडेक्स से बेहतर रहने का प्रतिशत: 60 प्रतिशत
  • एवरेज पांच साल का रोलिंग रिटर्न: 17.63 प्रतिशत बनाम निफ़्टी मिड कैप TRI का 16.29 प्रतिशत
  • 10 साल बाद ₹10,000 मंथली SIP की वैल्यू: ₹32.6 लाख
  • AUM: ₹59,041 करोड़

4) HSBC Midcap Fund

  • इंडेक्स से बेहतर रहने का प्रतिशत: 62 प्रतिशत
  • एवरेज पांच साल का रोलिंग रिटर्न: 16.32 प्रतिशत
  • 10 साल बाद ₹10,000 मंथली SIP की वैल्यू: ₹29.4 लाख
  • AUM: ₹12,175 करोड़

3) HDFC Mid Cap Fund

  • इंडेक्स से बेहतर रहने का प्रतिशत: 62 प्रतिशत
  • एवरेज पांच साल का रोलिंग रिटर्न: 19.44 प्रतिशत
  • 10 साल बाद ₹10,000 मंथली SIP की वैल्यू: ₹34.9 लाख
  • AUM: ₹92,187 करोड़

2) DSP Midcap Fund

  • इंडेक्स से बेहतर रहने का प्रतिशत: 63 प्रतिशत
  • एवरेज पांच साल का रोलिंग रिटर्न: 16.48 प्रतिशत
  • 10 साल बाद ₹10,000 मंथली SIP की वैल्यू: ₹26.6 लाख
  • AUM: ₹19,047 करोड़

1) Edelweiss Mid Cap Fund

  • इंडेक्स से बेहतर रहने का प्रतिशत: 68 प्रतिशत
  • एवरेज पांच साल का रोलिंग रिटर्न: 19.47 प्रतिशत
  • 10 साल बाद ₹10,000 मंथली SIP की वैल्यू: ₹35.3 लाख
  • AUM: ₹13,802 करोड़

आपके लिए क्या अहम है

पहली बात, मिड-कैप में लगातार आउटपरफ़ॉर्मेंस आम नहीं है. पूरे यूनिवर्स में से, यानी पिछले पांच साल में लॉन्च हुए फ़ंड्स को छोड़कर 24 फ़ंड्स में से, सिर्फ़ पांच ने 60 प्रतिशत की बाधा पार की. कुल मिलाकर, सिर्फ़ नौ फ़ंड ऐसे रहे जो आधे से ज़्यादा समय इंडेक्स से बेहतर रहे.

यह दिखाता है कि लगातार अल्फ़ा बनाना कितना कठिन है.

दूसरी बात, मिड-कैप में उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है. गिरावट तेज़ हो सकती है. इसलिए इस कैटेगरी में धैर्य अनिवार्य है. निवेश तभी करना चाहिए, जब लंबी अवधि साथ हो.

संक्षेप में, अगर एक्टिव मिड-कैप फ़ंड चुन रहे हैं, तो पिछले साल के टॉपर के पीछे मत भागिए. अलग-अलग साइकल में बार-बार बेहतर प्रदर्शन का सबूत ढूंढिए. इससे सफ़लता की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है.

बेशक, कंसिस्टेंसी ही सब कुछ नहीं है. रिस्क, पोर्टफ़ोलियो कंसन्ट्रेशन, एक्सपेंस रेशियो और फ़ंड मैनेजर में बदलाव, सब अहम हैं.

यहीं गहरी पड़ताल ज़रूरी हो जाती है.

अगर सिर्फ़ हेडलाइन रिटर्न से आगे बढ़कर फ़ंड्स को कंसिस्टेंसी, रिस्क मैट्रिक्स और पोर्टफ़ोलियो क्वालिटी के आधार पर परखना चाहते हैं, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र यह सब और बहुत कुछ उपलब्ध कराता है, ताकि समझदारी भरे फ़ैसले लिए जा सकें.

क्योंकि मिड-कैप में बढ़त सिर्फ़ एक्टिव बनाम पैसिव चुनने में नहीं, बल्कि सही एक्टिव फ़ंड चुनने में है.

आज ही फ़ंड एडवाइज़र आज़माइए

ये भी पढ़ें: ग़लत समय में बेस्ट फ़ंड भी कुछ नहीं कर सकता, क्या करें निवेशक?

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