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इक्विटी फ़ंड में निवेश बढ़ा, गोल्ड ETF की रफ़्तार हुई धीमी

AMFI के आंकड़े दिखाते हैं कि फ़रवरी में इक्विटी फ़ंड में मज़बूत इनफ़्लो रहा, जबकि क़ीमती धातुओं से जुड़े ETF की मांग ठंडी पड़ी है

इक्विटी फ़ंड में इनफ़्लो बढ़ा, जबकि गोल्ड ETF की डिमांड कम हुईAman Singhal/AI-Generated Image

फ़रवरी में इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड में निवेश की रफ़्तार फिर से तेज़ हुई, वहीं जनवरी में आई उछाल के बाद गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज-ट्रेडेड फ़ंड (ETF) में निवेश ठंडा पड़ गया. इस महीने इक्विटी स्कीम में ज़्यादा एलोकेशन दिखा, जबकि गोल्ड ETF में इनफ़्लो तेज़ी से गिरा और सिल्वर ETF में चांदी की क़ीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच नेट आउटफ़्लो दर्ज हुआ.

एसोसिएशन ऑफ़ म्यूचुअल फ़ंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक़, इक्विटी आधारित स्कीम में फ़रवरी में ₹25,978 करोड़ का नेट इनफ़्लो दर्ज हुआ, जो जनवरी के ₹24,029 करोड़ से ज़्यादा है. यह बढ़ोतरी दिखाती है कि ब्रॉडर मार्केट्स में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों ने इक्विटी में पैसा लगाना जारी रखा है.

इस दौरान BSE सेंसेक्स में 1.2 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि BSE मिडकैप और BSE स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 1 प्रतिशत और 0.5 प्रतिशत तक ऊपर बढ़े.

पैसा कहां गया

इक्विटी कैटेगरी में फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड एक बार फिर सबसे आगे रहे और इनमें ₹6,925 करोड़ का निवेश आया. इसके बाद मिड-कैप और स्मॉल-कैप फ़ंड रहे, जिनमें क्रमशः ₹4,003 करोड़ और ₹3,881 करोड़ का इनफ़्लो दर्ज हुआ. इससे साफ़ है कि ग्रोथ-ओरिएंटेड सेगमेंट में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है.

सेक्टोरल और थीमैटिक फ़ंड ने भी महीने के दौरान ₹2,987 करोड़ जुटाए. इसमें फ़रवरी में लॉन्च हुए कुछ न्यू फ़ंड ऑफ़र (NFO) का बड़ा योगदान रहा.

हाइब्रिड स्कीम में भी निवेश अच्छा बना रहा. इस कैटेगरी में कुल ₹11,983 करोड़ का नेट इनफ़्लो आया, जिसमें मल्टी-एसेट एलोकेशन फ़ंड का हिस्सा सबसे ज़्यादा ₹8,476 करोड़ रहा.

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के ज़रिये आने वाला निवेश फ़रवरी में थोड़ा घटकर ₹29,845 करोड़ रहा, जो जनवरी में ₹31,002 करोड़ था. हालांकि यह गिरावट व्यवहारिक बदलाव से ज़्यादा तकनीकी वजहों से जुड़ी मानी जा रही है.

AMFI के मुताबिक़, फ़रवरी में दिनों की संख्या कम होने और 28 तारीख़ शनिवार यानी नॉन-बैंकिंग डे होने की वजह से कई SIP डेबिट प्रोसेस नहीं हो पाए. ऐसे में कुछ ट्रांज़ैक्शन मार्च के आंकड़ों में दिखाई देने की संभावना है.

क़ीमती मेटल ETF की रफ़्तार ठंडी

पैसिव फ़ंड कैटेगरी में गोल्ड ETF का इनफ़्लो तेज़ी से घटकर लगभग ₹5,255 करोड़ रह गया, जबकि जनवरी में यह ₹24,039 करोड़ था. वहीं सिल्वर ETF में ₹826 करोड़ का आउटफ़्लो दर्ज हुआ. इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक़, चांदी की क़ीमतों में उतार-चढ़ाव और साल की शुरुआत में आई तेज़ रैली के बाद मुनाफ़ावसूली इसकी वजह रही.

सिल्वर फ़ंड ने फ़रवरी में औसतन -17 प्रतिशत रिटर्न दिया, जबकि जनवरी 2026 में यह 40.08 प्रतिशत और दिसंबर 2025 में 38.32 प्रतिशत बढ़े थे. वहीं गोल्ड फ़ंड फ़रवरी में औसतन 2.7 प्रतिशत गिरे, जबकि जनवरी में इनमें 22.30 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई थी.

इस बीच हाल ही में शुरू की गई स्पेशलाइज़्ड इन्वेस्टमेंट फ़ंड (SIF) कैटेगरी भी धीरे-धीरे निवेशकों के बीच जगह बना रही है. इस कैटेगरी में एसेट ₹6,564 करोड़ से बढ़कर फ़रवरी में ₹9,711 करोड़ तक पहुंच गए. इसमें लगभग ₹3,127 करोड़ का इनफ़्लो शामिल रहा, जिसमें नए लॉन्च हुए स्ट्रैटेजी फ़ंड से आया निवेश भी शामिल है.

यह भी पढ़ेंः क्या SIP शुरू करने की कोई सबसे सही तारीख़ होती है?

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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