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सारांशः एक रिटायर्ड निवेशक का ज़्यादातर इक्विटी निवेश सीधे शेयरों में है और बाज़ार की अनिश्चितता देखकर वो सब कुछ म्यूचुअल फ़ंड में ले जाना चाहते हैं. धीरेंद्र कुमार कहते हैं कि यहां दरअसल दो अलग फ़ैसले हैं. पहला, पोर्टफ़ोलियो में इक्विटी कितनी हो, ये आपकी आमदनी की ज़रूरत तय करेगी. दूसरा, शेयर या फ़ंड, ये इस पर निर्भर करे कि असल में किसने बेहतर रिटर्न दिया है. जो जीत रहा है, उसी के साथ रहिए.
मैं पिछले साल रिटायर हुआ हूं. मेरे कुल इक्विटी पोर्टफ़ोलियो का 75 प्रतिशत हिस्सा सीधे शेयरों में है और 25 प्रतिशत म्यूचुअल फ़ंड में. बाज़ार का माहौल अभी ठीक नहीं है और लगता है कि ये अनिश्चितता कुछ समय तक बनी रहेगी. ऐसे में क्या मुझे अपने सारे शेयर बेचकर पैसा म्यूचुअल फ़ंड में लगा देना चाहिए?- एन. राममूर्ति
नहीं, ऐसा मत कीजिए. आपके सामने असल में दो अलग-अलग फ़ैसले हैं और दोनों को अलग-अलग देखना होगा.
पहला फ़ैसला: पोर्टफ़ोलियो में इक्विटी कितनी हो
पहला सवाल आपके पूरे पोर्टफ़ोलियो का है. क्या आपको इस पैसे की ज़रूरत है? क्या आने वाले समय में आपको इससे कोई नियमित आमदनी की ज़रूरत होगी? यहां आपकी आमदनी की ज़रूरत ही आपका रास्ता तय करेगी.
अगर ये पैसा कई साल तक निवेशित रहने वाला है, तो इक्विटी में 75 प्रतिशत रखना एक अच्छा और अनुशासित एलोकेशन है. आप 75 प्रतिशत इक्विटी में रखें, या 35, 40 या 50 प्रतिशत फ़िक्स्ड इनकम में, ये पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि आपको कितनी आमदनी चाहिए और आप अपनी जमा-पूंजी का कुछ हिस्सा कब से इस्तेमाल करना शुरू करेंगे.
दूसरा फ़ैसला: सीधे शेयर या म्यूचुअल फ़ंड
दूसरा फ़ैसला ये है कि आप डायरेक्ट इक्विटी में बने रहें या म्यूचुअल फ़ंड में चले जाएं. इसमें Fund Advisor आपकी मदद करता है, भले ही वो खुलकर ऐसा न कहता हो.
Fund Advisor पिछले 20 साल तक के ट्रांज़ैक्शन के साथ आपका पूरा इक्विटी पोर्टफ़ोलियो इंपोर्ट कर सकता है और ये काम वो अच्छे से करता है. यानी जिसने भी शेयरों और इक्विटी फ़ंड, दोनों में पैसा लगाया है, वो अब साफ़-साफ़ देख सकता है कि किसने कितना सालाना रिटर्न दिया. फिर फ़ैसला अंदाज़े से नहीं, आंकड़ों के आधार पर होता है.
जो काम कर रहा है, उसी के साथ रहिए
अगर पिछले पांच या 10 साल में आपके सीधे शेयरों ने बढ़िया प्रदर्शन किया है, तो आपने कमाल का काम किया है. आपने पूरा एक्सपेंस रेशियो बचाया है, जो एक पक्की बचत है. और आपके पास इस बात का सबूत भी है कि आपने उन फ़ंड्स से बेहतर किया, जिन्हें आप शायद चुनते.
असल बात ये है कि पहले अपनी ज़रूरतों के हिसाब से एलोकेशन सही कीजिए और फिर उसी रास्ते पर टिके रहिए जिसने आपके लिए सच में काम किया है. जो घोड़ा जीत रहा है, उसी पर दांव लगाइए.
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वैल्यू रिसर्च Fund Advisor एक SEBI-रजिस्टर्ड एडवाइज़री सर्विस है. ये आपके गोल्स के हिसाब से पर्सनलाइज़्ड म्यूचुअल फ़ंड पोर्टफ़ोलियो बनाती है, आपके मौजूदा निवेश की समीक्षा करती है और कमीशन-फ़्री डायरेक्ट प्लान तक पहुंच देती है.
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ये लेख पहली बार अक्तूबर 16, 2026 को पब्लिश हुआ.


