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सारांशः लिस्ट होने के बाद अपने पहले ही साल में LG Electronics India ने IPO निवेशकों को अच्छा मुनाफ़ा दिया है. पर यह मुनाफ़ा जिस वजह से आया, वो वैसी नहीं है जैसा ज़्यादातर शेयरहोल्डर सोचते होंगे. और यही बात उन निवेशकों के सामने एक मुश्किल सवाल खड़ा करती है, जो आज यह शेयर ख़रीदने की सोच रहे हैं.
जिसे IPO में ₹1,140 के इशू प्राइस पर LG Electronics India के शेयर मिले और जिसने अब तक इन्हें बेचा नहीं, वो क़रीब 53% फ़ायदे में है. यानी उसके ₹1 लाख आज लगभग ₹1.53 लाख हो गए हैं. पर जिसने लिस्टिंग वाले दिन जोश में आकर शेयर ख़रीदा, जब यह ₹1,689 पर बंद हुआ था, उसका फ़ायदा सिर्फ़ क़रीब 3% है. कंपनी एक, साल एक, बस ख़रीदने का प्राइस अलग. वैसे दोनों का रिटर्न Nifty से बेहतर रहा, जो इस दौरान गिरा है.
इस लिस्टिंग से कंपनी के हाथ एक रुपया भी नहीं आया, क्योंकि पूरा इशू ऑफ़र फ़ॉर सेल था. कोरिया की पेरेंट कंपनी LG Electronics Inc ने अपनी क़रीब 15% हिस्सेदारी बेची, जिसकी क़ीमत लगभग ₹11,607 करोड़ थी और क़रीब 85% अपने पास रखी. दिलचस्प बात यह है कि पेरेंट कंपनी को ये शेयर औसतन सिर्फ़ ₹1.66 प्रति शेयर में पड़े थे, जबकि इशू प्राइस ₹1,140 था. यानी सारा पैसा पेरेंट कंपनी के पास गया. LG अपनी ग्रोथ के लिए पैसा अपनी कमाई से ही लगा रही है.
कमाई के लिहाज़ से मुश्किल साल
FY26 में मुनाफ़े के मोर्चे पर कंपनी कमज़ोर रही. रेवेन्यू लगभग जस का तस रहा, सिर्फ़ 1% बढ़कर ₹24,605 करोड़. पर नेट प्रॉफ़िट क़रीब 23.5% घटकर ₹1,685 करोड़ रह गया. और EBITDA मार्जिन 12.8% से गिरकर 9.8% पर आ गया.
इसकी कई वजहें रहीं. गर्मी उम्मीद से कम पड़ी, तो AC जैसे सीज़न वाले सामान की मांग घटी. कच्चे माल के प्राइस बढ़े और रुपया कमज़ोर हुआ, तो लागत बढ़ गई. और GST की दरें घटने के आसपास कुछ ग्राहकों ने ख़रीदारी टाल दी. सबसे बुरा हाल दिसंबर तिमाही में रहा, जब EBITDA मार्जिन गिरकर 4.8% रह गया. पर अब हालात सुधरने लगे हैं. जून 2026 की तिमाही में तीनों आंकड़े पिछले साल से बेहतर रहे. रेवेन्यू क़रीब 16% बढ़कर ₹7,233 करोड़ हुआ, नेट प्रॉफ़िट 27% बढ़कर ₹653 करोड़, और EBITDA मार्जिन फिर से 12.5% पर लौट आया.
क्या इतना ऊंचा वैल्यूएशन जायज़ है?
| कंपनी | मार्केट कैप (₹ करोड़) | P/E (गुना) | रेवेन्यू ग्रोथ | EBIT मार्जिन | नेट प्रॉफ़िट ग्रोथ |
|---|---|---|---|---|---|
| LG Electronics India | 1,17,492 | 64.4 | 1.00% | 8.20% | -23.50% |
| Havells India | 70,130 | 42.9 | 3.40% | 7.90% | 14.90% |
| Voltas | 34,743 | 77.3 | -7.60% | 3.60% | -55.70% |
| Whirlpool of India | 10,639 | 42.4 | 1.50% | 3.40% | -18.60% |
| Blue Star | 32,802 | 64.4 | 3.60% | 5.90% | -10.80% |
| रेवेन्यू ग्रोथ, EBIT मार्जिन और नेट प्रॉफ़िट ग्रोथ FY26 के हैं. EBIT यानी ब्याज और टैक्स से पहले की कमाई. P/E पिछले 12 महीनों की कमाई पर है. | |||||
LG के पक्ष में सबसे बड़ी बात यह है कि कामकाज से होने वाले मुनाफ़े में यह अपनी सभी मुक़ाबले वाली कंपनियों से आगे है. इसका 8.2% का EBIT मार्जिन हर दूसरी कंपनी से ज़्यादा है. Voltas का रेवेन्यू जहां घटा, वहीं LG का टिका रहा. और रेफ़्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, टीवी, इन्वर्टर AC, रूम AC और माइक्रोवेव, हर एक में यह बाज़ार में नंबर 1 है. अगर आगे ग्रोथ भी साथ दे, तो इन ख़ूबियों के दम पर इसका महंगा वैल्यूएशन जायज़ ठहराया जा सकता है. पर दूसरी तरफ़, FY26 में इसका नेट प्रॉफ़िट 23.5% घटा, जो Voltas को छोड़कर बाक़ी सबसे ज़्यादा गिरावट है. जबकि Havells का मुनाफ़ा क़रीब 15% बढ़ा, और फिर भी वो कहीं सस्ता, 43 गुना P/E पर मिल रहा है.
पर सबसे चुभने वाली बात ख़ुद इसका P/E है. इशू प्राइस पर LG का P/E क़रीब 35 गुना था. लिस्टिंग वाले दिन के क्लोज़िंग प्राइस पर यह क़रीब 52 गुना हो गया. और आज यह क़रीब 64 गुना है. यानी IPO में शेयर पाने वालों को एक साल में जो फ़ायदा हुआ, वो लगभग पूरा इस वजह से है कि बाज़ार अब इसकी कमाई के लिए ज़्यादा प्राइस दे रहा है, इस वजह से नहीं कि कंपनी का मुनाफ़ा बढ़ा. और जब प्रीमियम सिर्फ़ इसी से बना हो, तो उसे आगे की कमाई से सही साबित करना पड़ता है.
आगे की ग्रोथ कहां से आ सकती है
- पहला ज़रिया है Essential Series. यह सस्ती रेंज अक्टूबर 2025 में लॉन्च हुई, जिसमें वॉशिंग मशीन ₹16,000 से ₹18,000 में और फ़्रिज क़रीब ₹20,000 में मिलते हैं. इसका निशाना छोटे शहरों के वो ग्राहक हैं, जो पहली बार ऐसा सामान ख़रीद रहे हैं. LG के मुताबिक़ जनवरी से जून 2026 के बीच इसकी 5 लाख से ज़्यादा यूनिट बिक चुकी हैं.
- दूसरा ज़रिया है आंध्र प्रदेश के Sri City में बन रहा ₹5,000 करोड़ का प्लांट. कंपनी के ताज़ा अनुमान के मुताबिक़, यहां कंप्रेसर बनना अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तिमाही के आसपास और रूम AC बनना जनवरी-मार्च 2027 के आसपास शुरू होगा. इससे FY29 तक कंपनी की प्रोडक्शन क्षमता लगभग दोगुनी हो जाएगी. यह प्लांट कंपनी अपने पैसे से बना रही है, और इस पर उसे 20 साल वाली कैपिटल सब्सिडी भी मिलेगी.
- तीसरा ज़रिया है प्रीमियम प्रोडक्ट और एक्सपोर्ट. महंगे मॉडल पर मार्जिन ज़्यादा मिलता है. कंपनी अब 60 से ज़्यादा देशों में सामान बेचती है, और एक्सपोर्ट पर उसे देश में बिक्री से बेहतर मार्जिन मिलता है. कंपनी को उम्मीद है कि अगले दो-तीन सालों में उसके रेवेन्यू में एक्सपोर्ट का हिस्सा बढ़कर 6% से 10%, या उससे भी ज़्यादा हो जाएगा.
- चौथा ज़रिया है लोकलाइज़ेशन, यानी पुर्ज़े देश में ही बनाना. FY26 में यह क़रीब 55% था, और अगले तीन-चार सालों में इसे 65% से 70% तक ले जाने का लक्ष्य है. सबसे बड़ी बात, कंपनी कंप्रेसर ख़ुद बनाती है, जो फ़्रिज या AC का सबसे महंगा पुर्ज़ा होता है. लागत का ऐसा फ़ायदा बहुत कम कंपनियों के पास है.
पहले साल के बाद निवेशक क्या समझें
पहला साल पूरा होने पर भी LG की ख़ूबियां अपनी जगह क़ायम हैं. यह बाज़ार में सबसे आगे है, मुक़ाबले की कंपनियों में इसका ऑपरेटिंग मार्जिन सबसे अच्छा है, इस पर लगभग कोई कर्ज़ नहीं है, और कारोबार फिर से रफ़्तार पकड़ रहा है. फिर भी निवेशक इसके लिए कमाई का क़रीब 64 गुना चुका रहे हैं, जो सेक्टर में सबसे ऊंचे P/E में से है. वो भी उस कंपनी के लिए, जो अभी-अभी घटते मुनाफ़े वाले साल से निकली है, और जिसके शेयर की एक साल की बढ़त ज़्यादातर ऊंचे P/E से आई है. दूसरे साल में असली सवाल यही होगा कि क्या कमाई की ग्रोथ, शेयर के प्राइस की बराबरी कर पाएगी. इन बातों पर नज़र रखिए: जून तिमाही में मार्जिन का सुधार टिकता है या नहीं, एक्सपोर्ट और Essential रेंज कितनी तेज़ी से बढ़ते हैं, Sri City का प्लांट वक़्त पर शुरू होता है या नहीं, और पेरेंट कंपनी को जाने वाली रॉयल्टी, जो FY26 में बिक्री का क़रीब 1.9% थी. मुनाफ़ा कम हो या ज़्यादा, यह रक़म कंपनी से बाहर जाती ही है.



