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क्‍या जरूरतें पूरी कर रहा है आपका निवेश

हो सकता है कि आपको औसत से अच्‍छा रिटर्न मिल रहा हो लेकिन लक्ष्‍य पूरा होने पर बन पाएंगे सफल निवेशक

हो सकता है कि आपको औसत से अच्‍छा रिटर्न मिल रहा हो लेकिन लक्ष्‍य पूरा होने पर बन पाएंगे सफल निवेशक

आप कल्‍पना करें कि कोई क्रिकेटर मैदान पर बल्‍लेबाजी के लिए आता है। और 28 रन के स्‍कोर पर हेलमेट उतार कर दर्शकों का अभिवादन करता है जैसे उसने शतक बना लिया हो। आप सोच सकते हैं उसने ऐसा क्‍यों किया ? उसने ऐसा इसलिए किया क्‍योंकि उनका बल्‍लेबाजी औसत 27.6 फीसदी था। उसने इस औसत को पार करने का लक्ष्‍य तय किया था। जब उसने इस औसत को पार कर लिया उसे लगा कि वह सफल रहा है।

यह एक मजाक है। यह क्रिकेट से जुड़ा मजाक नहीं बल्कि निवेश से जुड़ा मजाक है। दुनिया में ऐसा कोई बल्‍लेबाज नहीं करेगा। लेकिन ऐसे बहुत से इन्‍वेस्‍टमेंट मैनेजर है जो इसी तरह से व्‍यवहार करते हैं। उनको लगता है कि अगर उन्‍होंने औसत से ज्‍यादा रिटर्न हासिल क‍र लिया है तो उन्‍होंने अपने कस्‍टमर की जरूरत पूरी कर दी है।

इन्‍वेस्‍टमेंट मैनेजर्स की इस सोच ने निवेशकों या कस्‍टर्स का भी नुकसान किया है। एक बचत करने वाला किस लिए निवेश करता है। क्‍या उसका निवेश इंडेक्‍स के प्रदर्शन से बेहतर या किसी औसत से अधिक रिटर्न हासिल करने के लिए है। बहुत से निवेशक सोचते हैं कि अगर उन्‍होंने औसत रिटर्न से अधिक रिटर्न हासिल कर लिया तो बड़ा काम कर लिया। अगर उनका निवेश फिक्‍स्‍ड इनकम कैटेगरी में है तो उनको लगता है कि एफडी रेट बेंचमार्क है और अगर उनका निवेश इक्विटी में है तो निफ्टी या सेंसेक्‍स रिटर्न से अधिक रिटर्न उनको सफल निवेशक बना देता है।

मीडिया और ज्‍यादातर एनॉलिस्‍ट भी इसी तरह की सोच को बढ़ावा देते हैं। हर साल के अंत में आपको अखबारों, पत्रिकाओं और वेबसाइट में तमाम लेख, टेबल और ग्राफ मिल जाएंगे जिसमें बताया जाता है कि इस पूरे साल में किसने अच्‍छा प्रदर्शन किया। यह चीजें उन निवेशकों के काम की हैं जो हमेशा हर साल की 1 जनवरी को निवेश करते हैं और 31 दिसंबर को अपना निवेश भुना लेते हैं। दूसरे शब्‍दों में कहें तो इस तरह का निवेश किसी काम का नहीं है।
जो निवेशक ऐसे बेंचमार्क के आधार पर निवेश करने का फैसला करते हैं वे उतना बेहतर रिटर्न हासिल नहीं कर पाते हैं। ऐसा करते हुए आप औसत बेंचमार्क से अधिक रिटर्न हासिल कर सकते हैं लेकिन तब भी आप निवेश की दुनिया के बड़े खिलाड़ी नहीं बन पाएंगे। बिल्‍कुल उस क्रिकेटर की तरह जिसका जिक्र लेख की शुरूआत में मैंने किया है।

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