
क्या आपको 80 के दशक के आस्ट्रेलिया के क्रिकेटर मर्व ह्यूज की याद है। बडी मूंछ वाला तेज गेंदबाज। क्या आपको पता है कि बड़ी मूछें उसकी इमेज के लिए इतनी अहम थीं कि उन्होंने इसका 3,70,000 आस्ट्रेलियन डॉलर का इन्श्योरेंस कराया था। इन्श्योरेंस कंपनी के लिए यह एक मुनाफे का सौदा रहा होगा क्योंकि तीन दशक बाद भी ह्यूज बड़ी मूंछें रखते हैं।
जब में देखता हूं कि भारत के बाहर लोग किस तरह से हर तरह की अनिश्चितता के खिलाफ इन्श्योरेंस कराते हैं तो मेरे दिमाग में आता है कि भारत में इन्श्योरेंस कल्चर क्यों नहीं है। दुनिया अनिश्चितता से भरी हुई है और ज्यादातर चीजें आगे भी अनिश्चित रहेंगी। हालांकि हमको इन्श्योरेंस का इस्तेमाल करते हुए ज्यादा से ज्यादा अनिश्चितताओं को खत्म करने का प्रयास करना चाहिए। ऐसी ही एक अनिश्चितता होम लोन से जुड़ी हुई है। होम लोन लंबे समय यानी दशकों की अवधि के लिए होते हैं। ऐसे में अगर परिवार के लिए कमाने वाले व्यक्ति की अचानक मौत हो जाती है और परिवार के लोग होम लोन चुका नहीं पाते हैं तो परिवार के सदस्यों को बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है।
एक साधारण टर्म इन्श्योरेंस इस मुश्किल को हल कर सकता है। जब भी कोई व्यक्ति होम लोन ले तो न सिर्फ उसको टर्म इन्श्योरेंस लेना चाहिए बल्कि होम लोन के भुगतान को भी इसमें जुड़वा लेना चाहिए। टर्म इन्श्योरेंस पॉलिसी का प्रीमियम कम होता है। ऐसे में यह आपकी जेब पर खास बोझ नहीं डालेगा।
उदाहरण के लिए 35 साल का एक स्वस्थ व्यक्ति 40 लाख का टर्म इन्श्योरेंस 25 साल के लिए लेता है तो इसके लिए उसये प्रतिमाह लगभग 800 रुपए प्रीमियम देना होगा। होम लोन के इन्श्योरेंस प्रीमियम को होम लोन ईएमआई का हिस्सा मानना चाहिए। मान लेते हैं कि आपकी होम लोन ईएमआई 36,000 रुपए प्रति माह है। तो आपको इन्श्योरेंस के लिए 800 रुपए और रखना चाहिए और आपको होम लोन की ईएमआई 36, 800 रुपए मानना चाहिए।
इसके अलावा एक और समाधान है। कई बार होम लोन लेने वालों को एक खास तरह की होम लोन रीपेमेंट इन्श्योरेंस पॉलिसी लेने की सलाह दी जाती है। यह पॉलिसी इसी मकसद के लिए डिजाइन की गई है। यह एक रेग्युलर टर्म प्लान की तरह काम करती है। इस पॉलिसी में कवर घटने का फीचर होता है जो आपके लिए फायदेमंद होता है। इसमें लाइफ कवर उसी स्तर पर बना नहीं रहता है। यह आपके होम लोन के साथ लिंक होता है और यह हर माह आउटस्टैंडिंग प्रिंसिपल घटने के साथ घटता जाता है।
हालांकि अगर आप वास्तविक लागत और डिटेल की जांच करते हैं तो एक रेग्युलर टर्म इन्श्योरेंस पॉलिसी एक बेहतर विकल्प लगती है। जब आप होम लोन को प्रोटेक्ट करने के लिए टर्म इन्श्योरेंस लें तो आपको कुछ चीजें अलग से करनी चाहिए। आपने जिस बैंक से होम लोन लिया है उसी बैंक से पॉलिसी का असाइनमेंट कराना चाहिए। असाइनमेंट का मतलब है कि अगर होम लोन लेने वाले व्यक्ति की मौत हो जाती है तो पॉलिसी को भुगतान करना होगा। यह भुगतान असाइनी को किया जाएगा। इसका मतलब है कि लोन का भुगतान सीधे इन्श्योरेंस कंपनी करेगी। अगर लोन का भुगतान सामान्य तरीके से किया जाता है तो असानइमेंट खत्म किया जा सकता है और पॉलिसी का लाभार्थी बची हुई अवधि में कोई और नॉमिनी हो सकता है जिसे आप नॉमिनी बनाना चाहें। इसके अलावा लोन के प्रीपेमेंट और एक बैंक से दूसरे बैंक में लोन ट्रासफर कराने जैसी स्थितियों को हैंडल करने के लिए असाइनमेंट प्रॉसेस में जरूरी प्रावधान होते हैं।
इसके अलावा एक और सुविधा के बारे में आपको जानना चाहिए कि टर्म इन्श्योरेंस में यह प्रावधान भी हो सकता है कि लोन का रीपेमेंट एकमुश्त के बजाए ईएमआई में होगा। अब आप होम लोन लेने वाले बैंक और इन्श्योरेंस कंपनी की पॉलिसी के आधार पर डिटेल पता कर सकते हैं। आप अपनी जरूरत के हिसाब से कोई भी तरीका अपना सकते हैं लेकिन आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपका होम लोन पर्याप्त टर्म इन्श्योरेंस से कवर हो।
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ये लेख पहली बार अगस्त 12, 2019 को पब्लिश हुआ.