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क्‍या इक्विटी फंड चुनने में एक्‍सपेंश रेशियो मायने रखता है ?

धीरेंद्र कुमार बता रहे हैं कि फंड चुनने में एक्‍सपेंश रेशियो कितना अहम है

धीरेंद्र कुमार बता रहे हैं कि फंड चुनने में एक्‍सपेंश रेशियो कितना अहम है

क्‍या इक्विटी फंडों में एक्‍सपेंश रेशिया मायने रखता है। क्‍या फंड चुनते समय एक्‍सपेंश रेशियो को भी अहमियत देनी चाहिए ?

फंड में एक्‍सपेंश यानी खर्च हमेशा मायने रखता है क्‍योंकि फंड पर आपको जो रिटर्न मिलता है वह खर्च को काट कर आपको मिलता है। उदाहरण के लिए अगर फंड का खर्च 2 फीसदी है और फंड का रिटर्न 10 फीसदी है तो वास्‍तव में फंड ने 12 फीसदी रिटर्न दिया है लेकिन आपको 10 फीसदी रिटर्न मिल रहा है।

फंडो में एक्‍सपेंश यानी खर्च दो तरह से होता है। रेग्‍युलर प्‍लान का एक्‍सपेंश रेशियो ज्‍यादा होता है और डायरेक्‍ट प्‍लान का एक्‍सपेंश रेशियो हमेशा हम होता है। डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स को मिलने वाला कमीशन ही रेग्‍युलर और डायरेक्‍ट प्‍लान में अंतर पैदा करता है। अगर फंड ज्‍यादा कमीशन दे रहा है तो डायरेक्‍ट प्‍लान सस्‍ता होगा। वहीं अगर फंड कम कमीशन दे रहा है तो रेग्‍युलर और डायरेक्‍ट फंड के एक्‍सपेंश रेशियो यानी खर्च में बहुत मामूली अंतर होगा।

लेकिन ऐसा नहीं है कि इक्विटी फंड चुनने का फैसला आप सिर्फ खर्च के आधार पर करें। बाजार के नियामक सेबी के नियमों के तहत फंड जैसे जैसे बड़ा होता जाता है उसे खर्च या फीस कम करनी होती है। हालांकि फंड का बड़ा होना उसके प्रदर्शन में भी बाधा बनता है। कई बार देखा गया है कि बड़े फंड अच्‍छा प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं। तो आपको सिर्फ खर्च के आधार पर फंड नहीं चुनना चाहिए। खास कर स्‍माल और मिड कैप फंड चुनते हुए इस बात का ध्‍यान खास तौर पर रखना चाहिए। छोटे फंडों के साथ कुछ खास फायदे जुड़े होते हैं। फंड मैनेजर छोटे फंडों को ज्‍यादा असानी से मैनेज कर सकते हैं और उनके पास निवेश के लिए ज्‍यादा विकल्‍प होते हैं।

ये लेख पहली बार अक्तूबर 25, 2019 को पब्लिश हुआ.

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