
आप सबको पता है कि निवेशकों में एसआईपी की लोकप्रियता बढ़ रही है। और एअसईपी में निवेश पर बात करना मेरा पसंदीदा विषय भी रहा है। आजकल एसआईपी के खिलाफ एक अभियान भी जोरों पर है। इसे आप एसआईपी के ख्रिलाफ दुष्प्रचार भी कह सकते हैं। अगर निवेशक इस दुष्प्रचार के प्रभाव में आ जाते हैं तो यह उनके लिए बड़े नुकसान का सबब बन सकता है। पिछले कुछ सप्ताह के दौरान एसआईपी के बारे में बहुत से लेख आए हैं।
इनमें कहा गया है कि पिछले 5 साल के दौरान कई फंडों में एसआईपी का रिटर्न कुछ खास नहीं रहा है। कुछ लेख में तो यह भी पूछा गया है कि क्या निवेशकों को अपनी एसआईपी बंद कर देनी चाहिए ? हालांकि ज्यादातर लेख में अंत में यही कहा गया है कि एसआईपी बंद नहीं की जानी चाहिए लेकिन ऐसे माहौल में जब बाजार एक दायरे में घूम रहा है, एसआईपी बंद करने या न करने के बारे में चर्चा शुरू करना भी खतरनाक है। यह दिखाता है कि ऐसे लोगों को पता ही नहीं है कि एसआईपी कैसे काम करती है और इसके जरिए निवेश क्यों किया जाता है।
वास्तव में एसआईपी बंद करने के बारे में तब पूछा जाना चाहिए जब बाजार में तेजी का दौर लंबे समय से हो और बाजार बढ़त के रोज नए रिकॉर्ड बना रहा हो। हालांकि तब भी जवाब यही होगा कि एसआईपी कभी भी बंद नहीं की जानी चाहिए।
मौजूदा समय में हम 586 इक्विटी म्युचुअल फंड को ट्रैक कर रहे हैं। अगर इन फंडों के पिछले 5 सालों का ट्रैक रिकॉर्ड देखा जाए तो इनमें से 549 फंडों का एसआईपी रिटर्न पॉजिटिव रहा है।ऐसे समय में जब इक्विटी में निवेश के फायदों पर सवाल उठाए जा रहे हैं और एक नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है तब भी आधे फंडों ने 6.5 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है। एक चौथाई फंडों का रिटर्न 7.5 फीसदी या इससे अधिक रहा है।
इक्विटी मार्केट में उतार चढ़ाव आना आम बात है। पिछले काफी समय से इक्विटी मार्केट एक रेंज या दायरे में ही घूम रहा है यानी एक ठहराव का दौर है। लेकिन मैं इसे किसी आपदा की तरह नहीं देखता। हम सबने 2008-09 में बाजार में आई बड़ी गिरावट का दौर देखा है। उस समय कुछ हफ्तों में लोगों के निवेश की कीमत घट कर आधी रह गई थी। ऐसे में एसआईपी रिटर्न पर उठाए जा रहे सवालों पर मुझे संदेह होता है कि आखिर इन सवालों के जरिए लोग कहना क्या चाह रहे हैं और इनका मकसद क्या है।
ऐसे लोग जो इक्विटी निवेशक के उतार चढ़ाव को समझते हैं वे रोज अखबारों में आने वाली खबरों और तमाम आशंकाओं की परवाह नहीं करते हैं। यह एक तरह का शोरगुल है जिसे निवेशक को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए। हमने पिछले दो दशकों में बाजार के उतार चढ़ाव और प्रदर्शन को करीब से देखा है। इसके आधार पर यह कहना पूरी तरह से सही है कि यह समय निवेश बनाए रखने का है। इस समय आपको अपनी एसआईपी जारी रखनी चाहिए और अगर आप एसआईपी में निवेश की रकम बढ़ा सकें तो और भी अच्छा है।
यह सही है कि अगर हम बाजार में 2008 जैसी बड़ी गिरावट को नजरअंदाज क दें तो पांच सालों में इक्विटी फंडों का एसआईपी रिटर्न कम रहा है। इसका बड़ा कारण यह रहा है कि इस अवधि में इक्विटी बाजार में सुस्ती रही है। या कहें कि इक्विटी की कीमतें बहुत कम बढ़ी हैं। बाजार का एक दायरे में घूमना और तेज गिरावट न आना एसआईपी रिटर्न के लिए अच्छी खबर नहीं लाता है।
वहीं बाजार में तेज गिरावट का दौर आने पर एसआईपी का रिटर्न बढ़ता है। गिरावट के दौर में एसआईपी में जो रकम निवेश की जाती है वही रकम बाजार में तेजी आने पर अच्छा रिटर्न दिलाती है। अगर मैं एसआईपी में पांच साल के लिए निवेश करने जा रहा हूं तो मेरे लिए सबसे अच्छा यह होगा कि चार साल तक बाजार में गिरावट रहे और पांचवे साल में बाजार में तेज उछाल आए।
वहीं बाजार जब एक ही दायरे में घूमता रहे और फिर थोड़ा नीचे चला जाए तो यह रिटर्न के लिहाज से सबसे खराब स्थिति होती है। हम मौजूदा समय में भी कुछ ऐसा ही देख रहे हैं और इसके बावजूद एसआईपी रिटर्न ठीक ठाक हैं। लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे है निवेशकों के लिए निवेश जारी रखना जरूरी है क्योंकि इस समय भविष्य में मिलने वाले ऊंचे रिटर्न की नींव रखी जा रही है।
अगर आप इक्विटी एसआईपी में निवेश कर रहे हैं तो आपको याद रखना चाहिए कि आम तौर पर इक्विटी मार्केट की दिशा ऊपर जाने की होती है लेकिन हम इक्विटी मार्केट के उतार चढ़ाव का अनुमान नहीं लगा सकते हैं। ऐसे में आपको एसआईपी बंद करने और फिर शुरू करने के बारे में सोचना ही नहीं चाहिए। आपको बस एसआईपी में नियमित तौर पर निवेश जारी रखना है। समय के साथ एनएवी बढ़ती और घटती है। बाजार का उतार चढ़ाव यह सुनिश्चित करता है कि एनएवी कम होने पर आप ज्यादा यूनिट खरीदते हैं। बाद में यही यूनिट आपका रिटर्न बढ़ाती हैं। तो यह समय निवेश जारी रखने का है और आपको इन सवालों पर विचार करने की जरूरत ही नहीं है कि क्या एसआईपी आपकी वित्तीस सेहत के लिए अच्छी है या नहीं।
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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