आजकल बाजार की चाल कुछ ठीक नहीं चल रही है। बड़ी गिरावट आम हो गई। बीच बीच में कुछ अच्छी खबरों पर बाजार ऊपर भी चढता है। लेकिन फिर लुढ़क जाता है। अब बाजार भी क्या करे। पिछले कुछ महीनों से बाजार के लिए अच्छी खबरें कम और बुरी खबरें ज्यादा आ रहीं है। कभी अर्थव्यवस्था की सुस्ती का मसला तो कभी बैकिंग सेक्टर में एनपीए का रोना। ऐसे में एक दो साल पहले सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए बाजार में निवेश शुरू करने वाले निवेशकों के लिए यह थोड़ा मुश्किल समय है।
हर बड़ी गिरावट पर चेक करते हैं एसआईपी का रिटर्न
आम तौर पर एसआईपी में निवेश लंबी अवधि के लिए किया जाता है। एसआईपी का पूरा फायदा भी लंबी अवधि में ही मिल पाता है। लेकिन नए निवेशक बाजार की हर बड़ी गिरावट पर अपना एसआईपी रिटर्न चेक करते हैं और जब रिटर्न कुछ खास नहीं दिखता है तो बाजार को कोसने लगते हैं। उनको लगता है कि चौबे गए थे छब्बे बनने लेकिन दूबे बन कर लौटे। यानी बाजार में निवेश किया था कि ज्यादा रिटर्न मिलेगा लेकिन यहां तो पूंजी बचाने के ही लाले हैं।
बाजार की गिरावट ही तो बढ़ाएगी एसआईपी का रिटर्न
बाजार में गिरावट के दौर में किसी भी निवेशक के दिमाग में यह बात आ सकती है लेकिन ये सच नहीं है। सच तो ये है कि बाजार की गिरावट ही तो एसआईपी का रिटर्न बढ़ाएगी। जी हां। यह बात 100 फीसदी है। इसके लिए आपको बाजार की चाल का समझना होगा।
मान लेते हैं कि आपने एक साल पहले एसआईपी शुरू की। इसके बाद बाजार में गिरावट का दौर शुरू हो गया। बाजार में गिरावट का मतलब है बाजार सस्ता होना। मान लेते हैं कि आप एसआईपी में हर माह 2,000 रुपए निवेश कर रहे हैं। बाजार की गिरावट में आप इस 2,000 रुपए से पहले की तुलना में ज्यादा यूनिट खरीद पाएंगे। और जब बाजार में तेजी का दौर आएगा तो बाजार महंगा होने के साथ आपकी यह यूनिट भी महंगी हो जाएगी जो आपने गिरावट के दौर में कम कीमत में खरीदी थी। इससे बाजार महंगा होने पर आपकी एसआईपी का रिटर्न बढ़ जाएगा।
गिरावट से घबराएं नहीं इसका फायदा उठाएं
नए निवेशकों को बाजार की गिरावट से घबराने के बजाए इसका फायदा उठाना चाहिए। अब सवाल उठता है कि गिरावट में बाजार का फायदा कैसे उठाएं। तो यह बहुत सरल है। आप गिरावट के दौर में अपना निवेश बढ़ा दें। यानी अगर आप 2,000 रुपए की एसआईपी कर रहे थे तो एसआईपी की रकम बढ़ा 3,000 रुपए या 4,000 रुपए कर दें। इससे आप सस्ते बाजार में ज्यादा यूनिट खरीद पाएंगे। और बाद में बाजार महंगा होने पर आपकी यही सस्ती यूनिट महंगी हो जाएगी और आपकी एसआईपी का रिटर्न बढ़ जाएगा।
न करें निवेश बंद करने की गलती
नए निवेशक अक्सर एक गलती करते हैं। वे बाजार में गिरावट का दौर आने पर एसआईपी बंद कर देते हैं। और फिर बाजार में तेजी का दौर आने पर एसआईपी शुरू करते हैं। लेकिन यह निवेश का गलत तरीका है। बाजार में गिरावट के दौर में एसआईपी बंद करने का मतलब है कि आपने एसआईपी को मुनाफा कमाने का मौका ही नहीं दिया।
एसआईपी में निवेश का मतलब है कि नियमित तौर पर थोड़ी थोड़ी रकम निवेश की जाती है और इस पर मिलने वाले रिटर्न के साथ लंबी अवधि में बड़ी रकम बन जाती है। बाजार में उतार चढ़ाव का दौर चलता रहता है। एसआईपी में नियमित तौर पर निवेश करने से निवेश की लागत औसत हो जाती है। इससे निवेश का जोखिम भी कम हो जाता है।