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जाना-पहचाना भटकाव

SEBI ने 2020 में इसी भटकाव को ठीक करने के लिए फ़्लेक्सी-कैप बनाए थे, 6 साल बाद, वही भटकाव वापस आ गया है

SEBI ने 2020 में इसी भटकाव को ठीक करने के लिए फ़्लेक्सी-कैप बनाए थे, 6 साल बाद, वही भटकाव वापस आ गया हैAnand Kumar/AI-Generated Image

सारांशः SEBI ने 2020 में फ़्लेक्सी-कैप कैटेगरी इसीलिए बनाई थी ताकि मल्टी-कैप फ़ंड्स की एक पुरानी समस्या को दूर किया जा सके. छह साल बाद, औसत फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड उसी समस्या जैसा दिखने लगा है जिसे वो बदलने आया था. कैटेगरी बदली. आदत नहीं बदली.

हम इस पर पहले भी बात कर चुके हैं. फ़्लेक्सी-कैप कैटेगरी, जिसे हमारे एनालिस्ट अब लार्ज-कैप जैसी पाते हैं, उसे ख़ुद छह साल पहले रेगुलेटर ने उसी शिकायत के जवाब में बनाया था जो लगभग आज जैसी ही थी.

यह वाक़्या बताता है कि ऐसा होना लगभग तय था और यह दोबारा भी होगा.

2020 में SEBI ने मल्टी-कैप फ़ंड्स की जांच की और नतीजा निकाला कि ये अपने नाम के मुताबिक़ नहीं चल रहे. इन्हें बेचते वक़्त कहा जाता था कि ये कहीं भी जा सकते हैं, लार्ज, मिड और स्मॉल तीनों तरह की कंपनियों में. लेकिन ज़्यादातर ने लार्ज-कैप्स में डेरा जमा लिया और वहीं रह गए. रेगुलेटर के अपने शब्दों में, ये अपने लेबल के प्रति ईमानदार नहीं थे. जवाब वही था जो रेगुलेटरी तरीक़े से होता है: एक नियम कि हर मल्टी-कैप फ़ंड को लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप्स में से हर एक में कम से कम 25 प्रतिशत रक़म रखनी होगी. अब निवेशकों को वो डाइवर्सिफ़िकेशन सच में मिलता है, जिसके बारे में उन्हें लगता था कि वो ख़रीद रहे हैं.

इंडस्ट्री ने एतराज़ किया, लॉबिंग की और उसे एक रास्ता दिया गया जो पीछे मुड़कर देखें तो बड़ा कुछ कह जाता है. SEBI ने अपनी बात पर क़ायम रहने के बजाय एक नई कैटेगरी ही बना दी. फ़्लेक्सी-कैप ने वो पुरानी बेरोकटोक आज़ादी वापस कर दी. ज़्यादातर मल्टी-कैप फ़ंड्स ने यह ऑफ़र क़बूल किया, नाम बदला और पहले की तरह चलते रहे. कई स्कीम्स के लिए असली बदलाव सिर्फ़ फ़ैक्टशीट पर लिखा नाम था.

आज का औसत फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड अपनी रक़म का क़रीब तीन-पांचवां हिस्सा लार्ज-कैप्स में लगाए रखता है. यह आंकड़ा छह सालों में बहुत कम हिला है और इन सालों में एक बड़ी गिरावट, एक रिकवरी और एक से ज़्यादा बुल मार्केट भी आए. 2020 में जो आज़ादी वापस दी गई थी, ज़्यादातर फ़ंड्स ने उसका इस्तेमाल ही नहीं किया. जो रुझान नई कैटेगरी में पीछे छूट जाना था, वो उसी के भीतर फिर से मज़बूत हो गया.

यही असली वजह है कि इस क़िस्से पर आपको वक़्त देना चाहिए. यह फ़्लेक्सी-कैप्स की कहानी नहीं है. यह एक्टिव मैनेजमेंट के भीतर एक ऐसे खिंचाव की तरफ़ इशारा करता है जिसे न किसी नए लेबल ने रोका है, न किसी लिखित नियम ने.

एक मैनेजर जितना बड़ा फ़ंड चलाता है, बेंचमार्क से हटने का करियर रिस्क और जाने-पहचाने लिक्विड विकल्पों में पैसा रखने का सुकून, ये सब मिलकर मैनेजर्स को बड़ी कंपनियों की तरफ़ और उस वक़्त के चलन की तरफ़ खींचते रहते हैं. मैंने यह  पुराने MIPs और बैलेंस्ड फ़ंड्स से लेकर नए फ़ंड्स तक तीन दशकों में हर मल्टी-कैप और मल्टी-एसेट कैटेगरी में देखा है.

आप एक कैटेगरी का नाम बदल सकते हैं. उसके एलोकेशन तय कर सकते हैं. लेकिन फ़ंड मैनेजर में भरोसा नहीं भर सकते.

यहां एक बात साफ़ कर देता हूं. जो नियमित पाठक हैं, वो मेरी सामान्य राय जानते हैं. ज़्यादातर महीनों में, इन पन्नों पर दिए गए एनालिसिस का सबसे समझदारी भरा जवाब यह है कि पढ़ें, बात समझें और अपना पोर्टफ़ोलियो बिल्कुल वैसे ही छोड़ दें. हर नई बात पर कुछ करने की बेचैनी ने किसी भी मार्केट गिरावट से ज़्यादा निवेशकों को नुक़सान पहुंचाया है. वो सलाह अभी भी क़ायम है.

लेकिन बेवजह इधर-उधर पैसा घुमाने और यह जानने में फ़र्क़ है कि आपके पास असल में क्या है, और यह उन कुछ ख़ास मौक़ों में से एक है. पिछले साल के बेस्ट परफ़ॉर्मर की तलाश में एक से दूसरे फ़ंड में कूदना वो आदत है जिसके ख़िलाफ़ मैं चेताता हूं. लेकिन यह नोट करना कि जो फ़ंड आपने लचीलेपन के लिए ख़रीदा था, वो धीरे-धीरे नाम के अलावा एक लार्ज-कैप फ़ंड बन गया है, यह बिल्कुल अलग बात है. जो होल्डिंग आपने चुनी थी, वो अब वही नहीं रही.

इसलिए Mutual Fund Insight की जुलाई 2026 की एडिशन की कवर स्टोरी पढ़ें, यह जानने के लिए कि क्या जांचना है और कौन से विकल्प आपके लिए बेहतर हो सकते हैं. यह इसलिए पढ़ें कि यह क्यों मायने रखता है. इस बार, अनुशासन का तरीक़ा यह है कि कदम उठाएं, रुकें नहीं. लेकिन सोच-समझकर करें, नई रक़म को किसी बेहतर फ़ंड की तरफ़ मोड़कर, न कि सब कुछ एक साथ पलटकर. रुके रहना और राह पर क़ायम रहना आमतौर पर एक ही बात होती है. हमेशा नहीं.

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