अगर आपकी उम्र 30 साल से कम है तो आप युवा हैं। और अगर आपने नौकरी या अपना बिजनेस शुरू कर दिया है तो आप देश की कामकाजी आबादी का हिस्सा बन चुके हैं। अब आपने कमाना शुरू कर दिया है। आप के सपनों की उड़ान शुरू हो चुकी है। आपको कमाने के साथ भविष्य के लिए भी सोचना होगा। आने वाले समय में बढ़ने वाली जरूरतों और जिम्मेदारियों की परवाह भी करनी होगी। आपको एक अदद फाइनेंशियल प्लान की जरूरत है। यह प्लान जीवन के तमाम उतार चढ़ाव में आपके पैर मजबूती से जमाए रखेगा। इससे आपकी जिंदगी साल दर साल आसान होती चली जाएगी। तो पेश है प्वाइंट का फाइनेंशियल प्लान।
1 -इमरजेंसी फंड
फाइनेंशियल प्लान की शुरूआत सबसे पहले इमरजेंसी फंड बनाने से होती है। आपको सबसे पहले खुद को अचानक पैदा होने वाली स्थिति का सामना करने के लिए तैयार करना होगा। मसलन अचानक नौकरी चली गई या किसी और वजह से आपको अचानक बड़ी रकम की जरूरत पड़ गई तो आप इस रकम का इंतजाम कैसे करेंगे। सबसे पहले आपको अपने छह माह से लेकर एक साल तक के खर्च के लायक रकम इमरजेंसी फंड में जुटानी चाहिए। मान लेते है कि आपका मंथली खर्च 50,000 रुपए है तो आपको शुरूआत में छह माह के खर्च के लायक रकम यानी 3 लाख रुपए इमरजेंसी फंड में डालने चाहिए। शुरूआत में छह माह के खर्च के लायक रकम का इमरजेंसी फंड ठीक है। बाद में इसे बढ़ा कर आप 1 साल के खर्च के लायक रकम तक ले जा सकते हैं। आप इमरजेंसी फंड का पैसा लिक्विड फंड या अल्ट्रा शार्ट ड्यूरेशन फंड में रख सकते हैं। लिक्विड फंड या अल्ट्रा शार्ट ड्यूरेशन फंड में आपको बैंक एफडी के बराबर या इससे बेहतर रिटर्न मिल सकता है। इसके अलावा इन फंडों से जरूरत पड़ने पर कभी भी अपना पैसा आसानी से निकाल सकते हैं।
2-हेल्थ इन्श्योरेंस
इमजरेंसी फंड के बाद फाइनेंशियल प्लान का दूसरा अहम कदम है हेल्थ इन्श्योरेंस। अगर आपके पास हेल्थ इन्श्योरेंस नहीं है और आप बीमार हो गए तो आपकी सारी बचत तो इलाज में चली जाएगी। ऐसे में आपके लिए हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान लेना बहुत जरूरी है। आप अकेले हैं तो इंडीविजुअल हेल्थ प्लान ले सकते हैं और शादीशुदा हैं तो फैमिली फ्लोटर प्लान। 30 साल की उम्र तक बीमारियों का खतरा कम रहता है। ऐसे में युवाओं को हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान सस्ता मिल जाता है। लेकिन यह फायदा आपके साथ हमेशा नहीं रहने वाला है। उम्र बढ़ने के साथ आपके लिए भी इन्श्योरेंस प्लान महंगा होता जाएगा।
3-टर्म प्लान
फाइनेंशियल प्लान में तीसरा अहम कदम है जीवन बीमा। अगर आपकी कमाई से आपके अलावा किसी का खर्च चलता है यानी कोई पैसों के लिए आप पर निर्भर है तो टर्म प्लान जरूर लेना चाहिए। अगर कोई अनहोनी हो जाती है तो टर्म प्लान परिजनों या डिपेंडेंड को एक तय रकम दे देता है। इससे उनके लिए अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी करना काफी हद तक आसान हो जाता है। टर्म प्लान में भी हेल्थ इन्श्योरेंस वाली बात लागू होती है। यानी युवाओं को टर्म प्लान के लिए सालाना कम प्रीमियम चुकाना पड़ता है। 25 से 30 साल के युवा को 50 लाख रुपए कवर वाला टर्म प्लान सालाना 6,000 रुपाए प्रीमियम में मिल सकता है।
बचत और निवेश
इसके बाद बात आती है बचत और निवेश की। इमरजेंसी फंड, हेल्थ इन्श्योरेंस और टर्म प्लान के बाद बारी आती है बचत और निवेश की। इस उम्र में जिम्मेदारियां कम होती हैं। ऐसे में आपके लिए बचत और निवेश करना ज्यादा आसान है। आप अपनी बचत को शार्ट टर्म के लिए और लॉग टर्म के लिए अलग-अलग निवेश कर सकते हैं।
कम अवधि की जरूरतों के लिए निवेश
मान लेते हैं कि आपको अपने काम में सहूलियत के लिए कार खरीदने की जरूरत है। तो आप कार लोन लेने के बजाए रिवर्स ईएमआई का ऑप्शन अपना सकते हैं। रिवर्स ईएमआई का मतलब है कि आप कार लोन की जितनी ईएमआई देंगे उतनी ही रकम एसआईपी में निवेश करना शुरू कर दीजिए। आपके पास तीन या चार साल में कार खरीदने के लायक ठीक ठाक रकम होगी। इस तरह से आप न सिर्फ अपने निवेश पर रिटर्न हासिल करेंगे बल्कि कार लोन पर सालों तक ब्याज चुकाने से भी बच जाएंगे। अपनी शादी के लिए या बहन की शादी के लिए तीन साल बाद पैसों की जरूरत पड़ने वाली है तो इसके लिए भी बैलेंस्ड फंड में एसआईपी शुरू कर सकते हैं। इस तरह से आप अपनी कम अवधि की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं।
लंबी अवधि की जरूरतों के लिए निवेश
इसके बाद आप लंबी अवधि की जरूरतों के लिए निवेश शुरू कर सकते हैं। लंबी अवधि की जरूरतों यानी जिन जरूरतों के लिए आपको कम से कम 10 साल के बाद पैसा चाहिए। इसके लिए आप इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम यानी ईएलएसएस में निवेश शुरू कर सकते हैं। ईएलएसएस में आप सालाना 1.5 लाख रुपए निवेश करके टैक्स छूट का फायदा भी ले सकते हैं। हां, ईएलएसएस में लॉक इन पीरियड तीन साल का है यानी तीन साल तक अपना पैसा नहीं निकाल सकते हैं। ईएलएसएस का पूरा पैसा इक्विटी में निवेश होता है यानी यह आपको अच्छा रिटर्न दिला सकता है। इसके अलावा आप सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी एसआईपी के जरिए भी हर माह थोड़ी थोड़ी रकम इक्विटी में निवेश कर सकते हैं। इस तरह से लंबी अवधि में आप बड़ी रकम बना सकते हैं।
5- दूसरे की लाइफ से नहीं सीख सकते
अगर आप अपनी वित्तीय सेहत को बेहतर रखना चाहते हैं तो इस फाइनेंशियल प्लान पर अमल करना चाहिए। आप दूसरों को देख कर बचत और निवेश के बारे में कुछ खास नहीं सीख सकते हैं। हर आदमी की जरूरतें अलग अलग होती हैं तो बेहतर है कि अपना फाइनेंशियल प्लान बनाएं और इस पर आगे बढ़ें।
ये लेख पहली बार अक्तूबर 22, 2019 को पब्लिश हुआ.