
हम 33 साल के कामकाजी कपल हैं। हम जानना चाहते हैं कि हमारे होम लोन लेकर घर खरीदना सही रहेगा या हमें दिल्ली में रेंट पर ही रहना चाहिए ? हमारे पास डाउनपेमेंट के लिए पर्याप्त बचत है और हमने एक आवासीय प्लॉट भी खरीद रखा है लेकिन यह शहर से बाहर है।
मिन्सका
अभी हम प्लॉट को अलग रखते हैं और सिर्फ घर खरीदने या रेंट पर रहने पर फोकस करते हैं। आजकल रेंटल यील्ड बहुत कम है ऐसे में रेंट पर रहने में भी कोई नुकसान नहीं है। मैं आपको रेंटल यील्ड का मतलब बताता हूं। अगर आप 1 करोड़ रुपए की कीमत वाला घर खरीदने की योजना बना रहे हैं और वही घर रेंट पर 40,000 रुपए प्रतिमाह पर उपलब्ध है। तो आपको इस घर के लिए सालाना रेंटल 4.8 लाख रुपए देना होगा। 1 करोड़ रुपए पर यह 4.8 लाख रुपए 4.8 फीसदी होगा। यह रेंटल यील्ड काफी अधिक है। आम तौर पर दिल्ली में रेंटल यील्ड 2- 3 फीसदी से अधिक नहीं है।
रेंट पर रहना या अपना घर खरीदना दोनों फैसलों के अपने फायदे और नुकसान हैं। रेंट पर रहने का एक बड़ा नुकसान यह है कि रेंट पर रहते हुए आप वह भावनात्मक सुकून हासिन नहीं कर सकते जो अपने घर में मिलता है। इसके अलावा आपका मकान मालिक आपको कभी भी घर खाली करने को कह सकता है। ऐसे में आपको हर दो या तीन साल में घर बदलना पड़ सकता है। लेकिन अगर आपका मकान मालिक अच्छा है और आप उसे कम से कम महंगाई दर के बराबर रकम हर साल रेंटल के तौर पर मुहैया कराते रहें तो इससे स्थिरता आ सकती है। सबसे आखिर में अगर आप रेंट पर रहते हैं तो एक खतरा पैदा होता है कि आप अपनी बचत को कहीं गलत जगह पर खर्च न कर दें। अगर आप अपनी बचत को लेकर लापरवार हैं तो। तो रेंट पर रहने के ये 3 नुकसान हो सकते हैं।
रेंट पर रहने का फायदा यह है कि जीवन के अगल अलग दौर में लोगों की जरूरतें बदलती रहती हैं। ऐसे में अगर आप रेंट पर रहते हैं तो आप अगल अलग तरह की जरूरतों को पूरा करने के लिए खुद में ज्यादा लचीलापन महसूस करेंगे। वहीं घर खरीद कर आप लंबे समय के लिए होम लोन चुकाने की जरूरत से बंध जाते हैं। इसके अलावा मैंने बहुत से लोगों को देखा है कि वे अपना कैरियर के बारे में इस आधार पर फैसला करते हैं कि उनका घर कहां है। निश्चित तौर पर इसमें बच्चो की एजुकेशन, उनका स्कूल और दूसरी चीजें भी अहम भूमिका निभाती हैं। इस तरह से अपना घर होने पर एक हद तक आपको लचीलेपन से समझौता करना पड़ता है। इसके बाद बारी आती है कि आप अपनी जरूरतों को लेकर कितना लचीला रूख अपना सकते हैं। जीवन के शुरूआती चरण में आप पर बच्चों और माता पिता की जिम्मेदारी होती है। लेकिन बाद में बच्चे बड़े होकर अपनी लाइफ में सेटल हो जाते हैं। तो आपकी जरूरतें काफी कम हो जाती हैं। तो समय के साथ जरूरतें बदलती हैं। और बाद में हो सकता है कि आपको घर की जरूरत पड़े। लेकिन शुरूआत में आपकी जरूरतें अलग तरह की हो सकती हैं। उस समय आपको शायद चार बेडरूम वाले घर की जरूरत हो सकत है या सिर्फ दो बेडरूम वाले घर की।
लेकिन अगर आप घर खरीदने का फैसला करते हैं तो आपको दो बातों पर ध्यान देना चाहिए। पहली बात आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि होम लोन की ईएमआई आपकी मासिक आय के एक तिहाई हिस्से से अधिक न हो। और दूसरी जरूरी बात कि आप नए घर में रहने लगें जिससे आप रेंट बचा सकें। आपको घर खरीदते समय इस बात का ध्यान भी रखना होगा कि किसी के वादे पर पैसे का भुगतान न करें कि छह माह या एक साल में घर रहने लायक हो जाएगा। जब आपको घर की चाभी मिले तभी पैसे का भुगतान करें। इस बात को लेकर किसी पर भी विश्वास न करें।
ये लेख पहली बार दिसंबर 11, 2019 को पब्लिश हुआ.