
कछुए और खरगोश की कहानी तो आप जानते ही है। खरगोश बहुत तेज दौड़ता है। फिर भी रेस हार गया। हमारे निवेशक भी ऐसे ही हैं। खरगोश की तरह। अति आत्मविश्वास के शिकार।
अब सवाल उठता है कि हमारे ज्यादातर निवेशक ऐसा करते क्यों हैं। बचत और निवेश को लेकर उनकी मानसिकता खरगोश की तरह क्यों है ? कछुए की तरह क्यों नहीं ?
ज्यादातर लोगों को निवेश से जुड़ी बुनियादी बातों के बारे में जानकारी नहीं है। बाजार कैसे काम करता है। कंपाउंडिंग का फायदा कैसे मिलता है। बचत पर महंगाई का असर कैसे होता है। या ऐसे विकल्पों में निवेश करना क्यों जरूरी है जो महंगाई दर से अधिक रिटर्न दे सकें।
दूसरी वजह है अति आत्म विश्वास । आप रिटायरमेंट प्लानिंग को ले लें। अधिकतर कमाने वाले युवा सोचते हैं। अभी तो मेरी उम्र ही क्या है। रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए बहुत समय है। अभी सैलरी कम है। बचत नहीं हो पा रही है। सैलरी बढ़ जाएगी तो ज्यादा बचत और निवेश कर पाएंगे। समय का क्या है। ज्यादा निवेश करके बड़ी रकम बना लेंगे।
लेकिन असल जिंदगी में ऐसा नहीं होता है। निवेश के लिए जो समय गंवा दिया उसकी भरपाई आसान नहीं होती है। समय के साथ सैलरी बढ़ती है। तो जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं। खर्चे बढ़ते हैं। आप निवेश की रकम बढ़ाते हैं। लेकिन आपके पास निवेश के लिए उतना समय नहीं होता है जिसमें कंपाउंडिंग अपना कमाल दिखा सके।
जैसे खरगोश ने नींद टूटने के बाद पूरा जोर लगाया। लेकिन बहुत तेज दौड़ने के बाद भी वह रेस हार गया। उसी तरह से बहुत देर से निवेश शुरू करने पर भी आपके लिए लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाता है। भले ही आप निवेश की रकम बढ़ा दें। आप उतनी रकम नहीं जुटा पाते हैं जो आपकी जरूरतें पूरी कर सके।
ये लेख पहली बार दिसंबर 19, 2019 को पब्लिश हुआ.