SIP सही है

गांव-गांव में एसआईपी

पहले लोग गाय, भैंस और बकरियों में निवेश करके रिटर्न यानी मुनाफा कमाते थे। ये उनकी एसआईपी थी

आज से दो तीन दशक पहले गांवों में लोग गाय भैंस और बकरियां पालते थे। गाय भैंस से उनको न सिर्फ अपनी जरूरतें के लिए दूध और गोबर मिलता बल्कि यह उनकी आय का एक जरिया भी था। गाय और भैंस के बच्‍चे होते थे और किसान इनके बच्‍चों को बेच कर नगद रकम हासिल करते हैं। इससे उनकी छोटी बड़ी जरूरतें पूरी होती थीं। ऐसा ही बकरी पालने वाले भी करते थे। लोग बकरी के बच्‍चे को कम कीमत में खरीद कर पालते थे। ये बच्‍चे बड़े हो जाते थे तो तो पालने वालों को इनकी अच्‍छी कीमत मिलती थी। कुछ लोग अब भी ऐसा करते हैं।

भविष्‍य की जरूरतों के लिए करते थे निवेश

आप कह सकते हैं कि यह बात तो आप भी जानते हैं। इसमें खास बात क्‍या है। तो इसमें एक खास बात है कि भारत में निवेश का कल्‍चर बहुत पुराना है। लोग अपनी लंबी अवधि की जरूरतों को पूरा करने के लिए चीजों में निवेश करते थे। और गई गुना रिटर्न यानी मुनाफा हासिल करते थे। लोग पढ़े लिखे हों या पढे लिखे न हों। वे भविष्‍य के लिए बचत और निवेश करते थे। आप उनकी गाय भैंस या बक‍रियों को आज की एसआईपी कह सकते हैं।

आज की एसआईपी

जिस तरह से हम आज एसआईपी के जरिए थोड़ी थोड़ी रकम निवेश करके लंबी अवधि में बड़ी रकम बनाते हैं उसी तरह से पहले लोग छोटी रकम लगाकर गाय भैंस या बकरियां खरीदते थे। और इनको बेच कर अपनी तमाम जरूरतें पूरी करते थें। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले लोगों की जरूरतें कम थीं। लोग खुद खेत में काम करते थे। खेती पारंपरिक तरीके से होती थी। खाद बीज और बैल सब घर का होता था। यानी खेती में ज्‍यादा निवेश की जरूरत नहीं पड़ती थी। खेती से उनको खाने के लिए अनाज, सब्‍जी और दूसरी चीजें मिल जाती थीं। नगदी की जरूरत बहुत कम होती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है।

बड़ी जरूरतों को पूरा कर सकती है एसआईपी

अब शहर की बात ही क्‍या करें गांव में रहने वालों की जरूरतें भी बहुत बढ़ गईं हैं। खेती अब मशीनों से होती है। खेती करने के लिए रासायनिक उर्वरक, बीज और कीटनाशक सबकुछ बाजार से खरीदना पड़ता है। महंगाई बढ़ गई है। शिक्षा और मेडिकल सुविधाओं पर खर्च बढ़ गया है। इसके अलावा अब रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों के लिए भी बड़ी रकम की जरूरत पड़ती है। अब सरकारी नौकरियों और पेंशन का दौर नहीं रहा है। इन बड़ी जरूरतों को आप एसआईपी के जरिए आसानी से पूरा कर सकते हैं।

छोटी रकम से कर सकते हैं शुरूआत

एसआईपी का फायदा यह है कि आप छोटी छोटी बचत को निवेश करते हुए लंबी अवधि में बड़ी रकम बना सकते हैं। ऐसा नहीं है कि आपके पास बड़ी रकम है तभी आप इसमें निवेश कर सकते हैं। बाद में इनकम बढ़ने पर आप एसआईपी की रकम इसी हिसाब से बढ़ा सकते हैं। याद रखिए आप जितना ज्‍यादा रकम एसआईपी के जरिए निवेश करेंगे आप उतनी ही ज्‍यादा रकम बना पाएंगे। इसके अलावा एसआईपी बाजार के जोखिम को भी कम करती है। एसआईपी में आप हर माह एक तय रकम निवेश करते हैं। ऐसा करने से आपके निवेश की लागत औसत हो जाती है और आपको बाजार में आने वाले उतार चढ़ाव की चिंता नहीं करनी पड़ती है।

महंगाई के असर से भी बचाएगी एसआईपी

सबसे बड़ी बात यह है कि एसआईपी के जरिए इक्विटी फंड में निवेश करके आप ऊंचा रिटर्न हासिल कर सकते हैं। सिर्फ इविक्‍टी ही ऐसी असेट क्‍लास है जो लंबी अवधि में आपके निवेश को न सिर्फ महंगाई के असर से बचा सकती है बल्कि उसको तेजी से बढ़ा सकती है।

ये लेख पहली बार जनवरी 16, 2020 को पब्लिश हुआ.

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