
आज देश में ऐसी तमाम सरकारी और निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियां हेल्थ इन्श्यारेंस कवर मुहैया करा रही हैं। अगर इलाज पर आने वाले खर्च पर गौर करें तो पाएंगे हेल्थ इन्श्योरेंस कवर पर चुकाया जाने वाला प्रीमियम बहुत महंगा नहीं है। इसके बावजूद देश की एक बड़ी आबादी के पास हेल्थ इन्श्योरेंस कवर नहीं हैं। इसमें पढ़े लिखे और अच्छे संस्थानों में काम करने वाले लोग भी शामिल हैं।
सवाल उठता है कि ऐसा क्यों हैं। देश की एक बड़ी आबादी जो हेल्थ इन्श्श्योरेंस कवर का प्रीमियम चुका सकती है वह भी इससे दूर क्यों हैं। अगर प्रीमियम पर आने वाले खर्च की बात करें तो जीववन बीमा पॉलिसी काफी लोग खरीदते हैं। ऐसी पारंपरिक जीवन बीमा पॉलिसी जिससे जीवन बीमा कवर भी मिलता है और निवेश की गई रकम पर कुछ रिटर्न भी। तो अगर ये लोग जीवन बीमा पॉलिसी का प्रीमियम चुका सकते हैं तो हेल्थ इन्श्योरेंस कवर का प्रीमियम क्यों नहीं।
यह बात सही है कि हममें से कोई बीमार नहीं होना चाहता है। तो क्या यह मानवीय मानसिकता का मामला है कि हम बीमार होने की कल्पना से भी डरते हैं। क्योंकि आपको हेल्थ इन्श्योरेंस कवर लेने से पहले यह बात तो सोचनी ही पड़ेगी कि आप या आपके परिवार का कोई सदस्या कभी न कभी बीमार हो सकता है। ये बीमारी गंभीर भी हो सकती है। अगर आप इस बात स्वीकार करेंगे तभी आप इस दिशा में आगे बढ़ पाएंगे।
जब आप काम काजी जिंदगी शुरू करते हैं। यानी कमाना शुरू करते हैं। तो बचत और निवेश शुरू करने से पहले यह जरूरी है कि आप एक हेल्थ इन्श्योरेंस कवर खरीदें। इसके बिना आपकी बचत और निवेश का कोई मतलब नहीं है। एक छोटी ही हेल्थ प्रॉब्लम में भी अगर आपको हॉस्पिटल में एडमिट में होना पड़ा तो यह आपकी सारी बचत को एक झटके में खत्म कर सकती है। फिर बचत और निवेश के मोर्चे पर आपको नए सिरे से शुरूआत करनी होगी। और इस अवधि में आपका जो नुकसान होगा। उसकी भरपाई आने वाले समय में करना काफी मुश्किल होगा। तो इस बात पर गौर करें। फिर फैसला करें।
ये लेख पहली बार सितंबर 09, 2020 को पब्लिश हुआ.