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क्‍या निवेशकों को अब भी एसआईपी के जरिए निवेश करना चाहिए ?

धीरेंद्र कुमार बता रहे हैं कि एसआईपी क्‍यों अब भी इक्विटी में निवेश का सबसे बेहतर तरीका है

धीरेंद्र कुमार बता रहे हैं कि एसआईपी क्‍यों अब भी इक्विटी में निवेश का सबसे बेहतर तरीका है

एसआईपी के साथ एक भरोसा जुड़ा है कि अगर निवेशक एसआईपी के जरिए लंबे समय तक निवेश बनाए रखता है तो वह एफडी की तुलना में कहीं ज्‍यादा रिटर्न हासिल कर सकता है। हालांकि कुछ म्‍युचुअल फंड के लिए पिछले पांच साल का एसआईपी रिटर्न निराशाजनक रहा है। यह चिंता की बात है और इसकी वजह से लोग भविष्‍य में एसआईपी में भरोसा खो सकते हैं ?

नवनीत

आपके सवाल में ही आपका जवाब है। ऐसा हो सकता है कि कभी एसआईपी रिटर्न आपकी उम्‍मीदों पर खरा न उतरे। और आज भी यही हो रहा है। हालांकि मुझे अब भी लगता है कि एसआईपी को इस तरह से नहीं देखा जाना चाहिए क्‍योंकि एसआईपी के कई फायदे हैं।

पहला फायदा। एसआईपी खरीद की लागत को औसत करने में मदद करती है। इक्विटी मार्केट स्‍वभाव से ही तेज उतार चढ़ाव वाला होता है इस उतार चढ़ाव का फायदा उठाने के लिए बेहतर तरीका यह है कि आप एसआईपी के जरि मार्केट में प्रवेश करें। जिससे आप बाजार के उच्‍चतम स्‍तर और निचले स्‍तर दोनों में खरीद सकें ओर निवेश की लागत को औसत कर सकें। अगर आप एकमुश्‍त निवेश करते हैं तो हो सकता है कि आप बाजार में ऐसे समय में निवेश करें जब बाजार उच्‍चतम स्‍तर पर हो।

दूसरा फायदा। एसआईपी आपकी इनकम साइकिल के साथ्‍फिट बैठती है। इसके जरिए आप समय के साथ एक बड़ी रकम बना सकते हैं। आप एसआईपी को उस रकम के लिए ईएमआई मान सकते हैं जो आप बनाना चाहते हैं। जिस तरह से लोन के लिए ईएमआई हर माह सैलरी आने पर आपके अकाउंट से कट जाती है उसी तरह से एसआईपी की रकम भी आपके अकाउंट से कट जाती है। अब इस रकम को अगर वैसे ही अकाउंट में छोड़ दिया जाए तो हो सकत है कि यह रकम खर्च हो जाए। लेकिन एसआईपी की रकम सैलरी आते ही कट जाती है। इस तरह से आप पहले बचत करते हैं और फिर खर्च।

अब आते हैं कि एसआईपी रिटर्न पिछले पांच से सात साल के बीच निराशाजनक रहा है। आज इक्विटी मार्केट बहुत अच्‍छी स्थिति में नहीं है। इसका कारण कोरोना महामारी है। इसकी वजह से बाजार में आई गिरावट ने इक्विटी के पिछले सालों के रिटर्न को खत्‍म कर दिया है। हालांकि मुझे अब भी इस बात का भरोसा है कि अगर आप एसआईपी के जरिए पांच से सात साल तक निवेश करते हैं तो आपको फिक्‍स्ड इनकम से ज्‍यादा रिटर्न मिल सकता है। यह सच है कि पहले के सलों की तुलना में इक्विटी रिटर्न में गिरावट आई है। लेकिन फिक्‍स्ड इनकम रिटर्न में भी नाटकीय तौर पर गिरावट आई है। इसका कारण यह कि महंगाई और ब्‍याज दरों में गिरावट आई है। पांच-दस पहले 15 से 18 फीसदी रिटर्न को अच्‍छा रिटर्न माना जाता था। हालांकि आज महंगाई और ब्‍याज दर को देखते हुए 10 से 12 फीसदी रिटर्न अच्‍छा रिटर्न माना जा सकता है। ऐसे में आपको बाजार और ब्‍याज दर के परिदृश्‍य को ध्‍यान में रखते हुए रिटर्न की उम्‍मीदों को कम करना होगा और आप एसआईपी के जरिए निवेश जारी रख सकते हैं।

ये लेख पहली बार नवंबर 11, 2020 को पब्लिश हुआ.

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