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पिछले शनिवार को, छह दशकों में पहली बार, बर्कशायर हैथवे की सालाना मीटिंग वॉरेन बफ़े की स्टेज पर मौजूदगी के बिना हुई. चार्ली मंगर का नवंबर 2023 में निधन हो गया था. बफ़े ने पिछले साल के अंत में CEO पद छोड़ दिया. शनिवार को वे दर्शकों में बैठे थे और कभी-कभार फ़्लोर से कोई बात कह देते थे. एक मौक़े पर उन्होंने ख़ुद कहा कि अब यह उनका शो नहीं रहा.
हर मायने में, यह अगली पीढ़ी को कमान सौंपने जैसा था.
ग्रेग एबेल, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में CEO की ज़िम्मेदारी संभाली, उन्होंने अजीत जैन के साथ मिलकर मीटिंग का संचालन किया. सभी के मुताबिक़, यह एक काबिल और कारोबारी अंदाज़ में हुई मीटिंग थी. एबेल ने बर्कशायर के विशाल साम्राज्य में ऑपरेशनल परफ़ॉर्मेंस पर बात की, AI पर चर्चा की और टेक्नोलॉजी के जोख़िम दिखाने के लिए बफ़े का एक डीपफेक वीडियो भी पेश किया. सब कुछ व्यवस्थित, प्रोफ़ेशनल और पूरी तरह साधारण था.
और होना भी यही चाहिए था.
एबेल और जैन ने समझदारी दिखाई और पुरानी चीज़ों को दोहराने की कोशिश नहीं की. दशकों तक बर्कशायर की मीटिंग असल में शेयरहोल्डर्स की मीटिंग थी ही नहीं. वह एक परफ़ॉर्मेंस थी. एक मास्टरक्लास थी. एक सांस्कृतिक आयोजन था. बफ़े और मंगर घंटों स्टेज पर बैठे रहते, डेरिवेटिव्स से लेकर इंसानी फ़ितरत तक हर सवाल का जवाब देते और ऐसी समझ बांटते. ऐसा लगता था कि जैसे इन्वेस्टिंग के दो सबसे तेज़ दिमाग़ों से सीख मिल रही हो. बफ़े की कहानियां और मंगर के दो-टूक जुमले, दोनों का आपसी तालमेल बेमिसाल और बिना रिहर्सल का थिएटर था. कोई भी कॉर्पोरेट इवेंट इसके आसपास भी नहीं था.
नई लीडरशिप ने, बुद्धिमानी से, टिम कुक बनने की कोशिश नहीं की जो स्टीव जॉब्स की जगह ले सके. ऐपल में कुक बेहद कामयाब रहे, लेकिन उन्होंने कभी स्टेज पर जॉब्स बनने की कोशिश नहीं की. उन्हें पता था कि नकल करने से बस तुलना होती है और वो भी नुक़सानदेह. समझदारी इसमें है कि असरदार बनो, मनोरंजक नहीं. एबेल ने भी यही समझा. शनिवार की मीटिंग एक ट्रिलियन-डॉलर कंपनी की असली शेयरहोल्डर्स मीटिंग थी. कोई वैराइटी शो नहीं. मीटिंग आधे से थोड़ा ज़्यादा भरी थी. "Woodstock for Capitalists" का दौर ख़त्म हो गया.
मेरे लिए निजी तौर पर, यह बदलाव देखना किसी ऐसी चीज़ के ख़त्म होने जैसा लगा जिससे मैं अपनी लेखन-ज़िंदगी के बड़े हिस्से में सींचता रहा. मैं बर्कशायर का शेयरहोल्डर नहीं हूं, और कभी था भी नहीं. दुनिया भर के उन ज़्यादातर लोगों की तरह जो पूरे साल ओमाहा की मीटिंग का इंतज़ार करते थे. वो वहां स्टॉक की क़ीमत या कमाई के लिए नहीं जाते थे. वो वहां जाते थे उस समझ के लिए, उस हास्य के लिए और उस सामान्य समझ के लिए जो एक शरारती मुस्कान के साथ परोसी जाती थी. इन सालों में मैंने बफ़े और मंगर की बातों पर आधारित इतने कॉलम लिखे हैं कि उनके प्रति मेरे मन में गहरी कृतज्ञता है कि वे वैसे ही दिखते थे जैसे थे.
वह दौर गया और मैं तो ऐसा ही मानता हूं.
काफ़ी हद तक. लेकिन, एक अफ़सोस ज़रूर है.
इन सभी सालों में मैं कोशिश करके सच में ओमाहा जा सकता था. हज़ारों लोगों के साथ घूम सकता था, See's Candy ख़रीद सकता था और उन उस्तादों को सामने से सुन सकता था. मुझे हमेशा लगा कि वक़्त है. अब जब मौक़ा चला गया, तो काश मैंने उसे भुनाया होता.
यहां एक छोटा-सा निवेश का सबक़ छुपा है, जिसे बफ़े ख़ुद भी सराहते. जो चीज़ आपको ज़रूरी लगे, उस पर अभी काम करो. बाद में नहीं. चाहे SIP शुरू करनी हो, पोर्टफ़ोलियो रिबैलेंस करना हो, या Nebraska में उस शेयरहोल्डर्स मीटिंग में जाना हो जो ज़िंदगी की तालीम भी देती थी, ऐसे मौक़े हमेशा बने नहीं रहते.
बफ़े ने शनिवार को दर्शकों से बोलते हुए बाज़ार की तुलना एक ऐसे चर्च से की जिसमें कैसीनो भी लगा हो. उन्होंने शिकायत की कि बहुत से लोग निवेश करने की जगह जुआ खेल रहे हैं. दर्शकों में बैठे-बैठे भी उस बुज़ुर्ग के पास अभी भी कुछ था, जो सुनने लायक़ हो.
लेकिन अब वह वक़्त गुज़र गया.
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