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अडानी के स्‍टॉक्‍स का मामला हो या मस्‍क के बिटकॉइन का मामला खबर ने कीमतों पर अजीब तरह से असर डाला है

अडानी के स्‍टॉक्‍स का मामला हो या मस्‍क के बिटकॉइन का मामला खबर ने कीमतों पर अजीब तरह से असर डाला है


पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने स्‍टॉक मार्केट का अजीब व्‍यवहार दिखाया है। वास्‍तव में मुझे स्‍टॉक मार्केट के बजाए स्‍टॉक ट्रेडर्स का अजीब व्‍यवहार कहना चाहिए क्‍योंकि यही वास्‍तव में सच है। 14 जून एक खबर आई कि नेशनल स्‍टॉक डिपॉजिटरी लिमिटेड ने तीन फॉरेन पोर्टफोलियो इन्‍वेस्‍टर्स के अकाउंट को फ्रीज कर दिया है। इन इन्‍वेस्‍टर्स ने अडानी ग्रुप की कंपनियों में बड़े पैमाने पर निवेश किया हुआ था। इस खबर के बाद ग्रुप के स्‍टॉक्‍स तेजी से गिरने लगे। हालां‍कि कंपनियों ने इससे इनकार किया। फिर भी गिरावट नहीं थमी। एक दिन बाद एनएसडीएल ने भी इस घटना से इनकार किया। इसके बाद भी स्‍टॉक्‍स में तेज गिरावट जारी रही।

बाहर से इस घटना पर नजर रखने वाला व्‍यक्ति जो इस बात से परिचित नहीं है कि स्‍टॉक ट्रेडर्स की मेंटल मशीनरी कैसे काम करती है असमंजस में पड़ जाएगा। अगर किसी खबर से स्‍टॉक्‍स तेजी से गिरता है तो खबर को गलत बताए जाने पर क्‍या स्‍टॉक्‍स को चढ़ना नहीं चाहिए। न सिर्फ एक तार्किक निवेशक बल्कि अडानी के शेयरों में निवेश करने वाले बहुत से लोग इसी तरह से सोच रहे होंगे। हालांकि कोई भी क्‍या हुआ इसके बारे में एक तार्किक अनुमान लगा सकता है। अडानी ग्रुप के स्‍टॉक्‍स ने पिछले एक साल में 150 से 1000 फीसदी के बीच बढ़त दर्ज की है। बहुत से लोग बड़े रिटर्न के साथ बैठे थे और इन लोगों ने महसूस किया होगा कि वे किनारे पर हैं। एक बार एफपीआई के अकाउंट फ्रीज होने की खबर आई तो इन लोगों ने बाहर निकलने का फैसला कर लिया। ऐसा काफी तेजी से हुआ क्‍योंकि यहां पर भगदड़ मच गई और भगदड़ को रोकना आसान नहीं होता।

यहां एक और दिलचस्‍प मामला है। यह बिटकॉइन के बारे में है। और हम सब जानते हैं कि कोई भी बिटकॉइन की ट्रेडिंग करने वालों पर तर्कसंगत होने आरोप नहीं लगा सकता। लेकिन यह एक सही उदाहरण है। 13 मई को एलन मस्‍क ने ट्वीट किया कि टेस्‍ला अब अपनी कार के लिए बिटकॉइन को पेमेंट के तौर पर स्‍वीकार नहीं करेगी। मस्‍क ने इसके लिए बिटकॉइन में अधिक ऊर्जा के इस्‍तेमाल की वजह से पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं को जिम्‍मेदार बताया। मस्‍क के ट्वीट के बाद बिटकॉइन की कीमतों में तेजी से गिरावट आई। इस बयान का काफी अधिक असर हुआ क्‍योंकि मस्‍क और उनकी कंपनी क्रिप्‍टोकरेंसी के बड़े प्रशंसक थे।

इसके बाद 14 जून को मस्‍क ने ट्वीट किया कि जब बिटकॉइन ऊर्जा की खपत कम करने लगेगा तो टेस्‍ला इसे फिर से स्‍वीकार करना शुरू कर देगी। इसके जवाब में बिटकॉइन की कीमतों में बड़ा उछाल आया। यहां दिलचस्‍प बात यह है कि दोनों बयानों में कोई विरोधाभास नहीं था। दोनों बयान एक ही तरह का इरादा जाहिर कर रहे थे फिर इन बयानों का असर ठीक उलटा हुआ। अब हम इस बात में नहीं जाते हैं कि क्‍या मस्‍क जानबूझ कर बिटकॉइन की कीमतों से छेड़छाड़ कर रहे थे क्‍योंकि मुद्दे के लिहाज से इसका कोई मतलब नहीं है। अहम बात यह है कि अडानी मामले की तरह सभी तरह की खबरों के लिए बड़ी और ऐसी प्रतिक्रिया हो सकती है जो तर्कसंगत न हो।

ऐसा क्‍यों हुआ ? इसका जवाब बहुत साफ है। बहुत से ऐसे निवेशक हैं जिनको अपने निवेश पर बिल्‍कुल भी भरोसा नहीं है। वे यह भी नहीं जानते कि उन्‍होंने यह निवेश क्‍यों खरीदा है। उनको नहीं पता कि क्‍या यह निवेश किसी काम का है वे सिर्फ धारा के साथ आगे जा रहे हैं। ऐसे निवेशक किसी भी तरह की खबर पर बहुत तेजी से गैर तर्कसंगत तरीके से प्रतिक्रिया देते हैं। हालांकि उनके नजरिए से जो वे कर रहे हैं वह गैर तर्कसंगत नहीं है। उनको यह पता नहीं है कि उनके निवेश की वास्‍तविक कीमत क्‍या है और भविष्‍य में इस निवेश की कीमत क्‍या होगी। ऐसे में उनके नजरिए से इस तरह से व्‍यवहार करना पूरी तरह से तार्किक है।

निश्चित तौर पर हर व्‍यक्ति सारी रिसर्च खुद नहीं कर सकता। वैसे यह जरूरी नहीं है कि हर व्‍यक्ति को सभी चीजों की समझ हो। लेकिन कंपनियों की वास्‍तविकता के आधार पर जानकारी और इन्‍वेस्‍टमेंट आईडिया और प्रॉसेस के सोर्स के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

अगर निवेशकों ने यह किया होता तो उनको पता होता कि अडानी स्‍टॉक या किसी और चीज की वास्‍तविक कीमत क्‍या है। ऐसे में वे एक खबर या एलन मस्‍क के ट्वीट को लेकर चिंतित नहीं होते और ऐसी खबरों पर ध्‍यान ही नहीं देते। अगर कोई स्‍टॉक 10 या 20 फीसदी या इससे भी अधिक गिरता तो वे अपनी रणनीति पर फिर से विचार करते और फिर और ज्‍यादा स्‍टॉक खरीदते। अगर आप कुछ ऐसे स्‍टॉक्‍स पर गौर करें जिन्‍होंने निवेशकों के लिए बहुत ज्‍यादा रकम कमाई हो तो उनके साथ ऐसा भी हुआ है जब उन्‍होंने अपनी कीमत का एक बड़ा हिस्‍सा गवां दिया है। दिन की खबरों पर गौर करने वाले निवेशक निवेश बेच देंगे और नुकसान उठाएंगे।

वास्‍तव में मैंने हमेशा यह देखा है कि ज्‍यादातर निवेशकों की समस्‍या उन बातों से पैदा होती है जो उन्‍होंने महीनों और सालों से की है या नहीं की है। इसी तरह से इन समस्‍याओं को हल करने का सही तरीका ऐसे कदम उठाना है तो महीनों और सालों के लिहाज से सही हों। आप ऐसे किसी व्‍यक्ति से नहीं मिलेंगे जिसके निवेश का प्रदर्शन इसलिए खराब रहा हो क्‍योंकि उसने घटनाओं को ट्रैक नहीं किया और इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी। दूसरे शब्‍दों में कहें तो जब तक आप खबरों को नजरअंदाज करना नहीं सीख जाते तब तक आपके निवेश के तरीके में शायद कुछ गलत है।

साफ है कि यहीं पर वैल्‍यू रिसर्च आता है। दिन की खबरों पर आधारित निवेश की स्‍टाइल से परहेज करने के लिए वैल्‍यू रिसर्च स्‍टॉक एडवाइजर पर स्‍टॉक रिकमेंडेशन देखें। जब हमारा स्‍टॉक गिरता है तो हम आपको बताते हैं कि क्‍या हो रहा है और क्‍यों हो रहा है। हम यह भी बताते हैं कि आपको इस स्‍टॉक में निवेश क्‍यों बनाए रखना चाहिए। हम अपना होमवर्क करते हैं जिससे आपको खबरों को लेकर घबराहट न हो।

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