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आगे हैं रोमांचक समय

बाजार में शानदार तेजी के दौर के बाद करेक्‍शन का मौका बन रहा है। हम आपको बता रहे हैं कि ऐसे में क्‍या करें

बाजार में शानदार तेजी के दौर के बाद करेक्‍शन का मौका बन रहा है। हम आपको बता रहे हैं कि ऐसे में क्‍या करें


एक इक्विटी निवेशक के लिए इनमें से कौन से हालात बेहतर हैं। बाजार में अनुमानित तेज गिरावट या बाजार में ऐसा उतार चढ़ाव जिसका अनुमान न लगाया जा सके। इसका जवाब वास्‍तव में मायने नहीं रखता है क्‍योंकि हमारे पास कोई च्‍वाइस नहीं है। फिर भी खुद से यह सवाल पूछने से भविष्‍य को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।

चीन में पुराने समय एक शाप दिया जाता था। आप रोमांचक जीवन जिएं। अब चीन के वायरस ने समूची दुनिया को काफी दिलचस्‍प बना दिया है। हमको यह पता लगाना होगा कि इस वायरस के बाद हम हालात का सामना कैसे करें। फरवरी 2020 में कारोबार और निवेशकों के लिए संभावनाएं डरावनी लेकिन अनुमानित लग रहीं थीं। ऐसा लग रहा था कि दुनिया भर के इन्‍वेस्‍टमेंट मार्केट में तेज गिरावट आएगी और वायरस की कहानी खत्‍म होने तक ऐसे ही हालात बने रहेंगे। यह कैसे खत्‍म होगा यह उस समय स्‍पष्‍ट नहीं था। मार्च इस उम्‍मीद पर खरा उतरा। लेकिन अप्रैल 2020 से यह कहानी बदल गई और इसके बाद चीजें अनुमान के विपरीत रहीं हैं।

मैं इसके कारणों में नहीं जाउंगा कि यह अभी क्‍यों हुआ लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कंपनियां और इंडीविजुअल्‍स जिस तरह की आर्थिक वास्‍तविकता का सामना कर रहे हैं और स्‍टॉक मार्केट के व्‍यवहार के बीच बड़ा फासला है। यह सही है कि रिकवरी के लिए रास्‍ता तैयार किया गया है और ग्‍लोबल इकोनॉमी का एक बड़ा हिस्‍सा इस रास्‍ते को तय करने के लिए कदम बढ़ा चुका है। हालांकि यह भी उतना ही सच है कि फरवरी 2020 के बाद से न सिर्फ बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि नुकसान अब भी जारी है। कई कंपनियां और सेक्‍टर्स हैं जहां हालात सामान्‍य हो चुके हैं। लेकिन ऐसी भी कंपनियां हैं जिनके भविष्‍य पर सवाल है।

सिर्फ यही नहीं यह सोचना गलत होगा कि पहली कैटेगरी को निवेशकों के लिहाज से नुकसान नहीं होगा। हर किसी ने समय गंवाया है। यहां तक कि जिन कंपनियों को बहुत कम नुकसान हुआ है वे भी कुछ साल पीछे चली गई हैं।


आर्थिक मोर्चे की हकीकत और इक्विटी मार्केट में अपेक्षाकृत अच्‍छे समय के बीच का विरोधाभास निवेशकों के लिए चिंता का सबब बन रहा है। कोई भी व्‍यक्ति जो स्‍टॉक कीमतों में तेजी के कारणों पर गौर कर रहा है वह इस बात को लेकर चिंतित है। जब भी स्‍टॉक कीमतों और आर्थिक वास्‍तविकता के बीच संघर्ष होता है तो आप जानते हैं कि कौन सा पक्ष जीतता है ? एक इंडीविजुअल को इसके बारे में क्‍या करना चाहिए ? क्‍या आपको इन हालात से डर कर भाग जाना चाहिए और तब वापस आना चाहिए जब हालात सामान्‍य हो चुके हों या आपको हिम्‍मत दिखानी चाहिए और हर दिन के हालात का सामना करना चाहिए ?


हमारे पाठक शायद इस बात की उम्‍मीद कर रहे हों कि हम इस सवाल का जवाब जवाब न देकर दे रहे हैं। वैल्‍यू रिसर्च की सोच है कि निवेश से जुड़ी किसी समस्‍या का समाधान जिसमे यह अनुमान जरूरी है कि क्‍या होगा का कोई मतलब नहीं है। मैं इसे इस तरह से स्‍पष्‍ट कर रहा हूं जिससे सब लोग आसानी से समझ सकें। क्‍या आपने यह अनुमान लगाने का प्रयास किया कि लोगों में से कौन ऐसा होगा कि उसे कोबिड होगा और वह आपके करीब आएगा और इसके आधार पर आप यह फैसला करेंगे कि मास्‍क पहना जाए या नहीं। मैं उम्‍मीद करता हूं कि ऐसा नहीं होगा। काम को लेकर भी यही सिद्धांत काम करता है। बाजार में तेज गिरावट आएगी, या बाजार लंबे समय तक एक ही रेंज में रह सकता है या जो भी हो। हम‍निवेशकों को अपने काम पर फोकस करने की जरूरत है। यानी सतर्कता के साथ सभी संभावनाओं पर विचार करते हुए निवेश करना।

आर्थिक मोर्चे की हकीकत और स्‍टॉक कीमतों के बीच जो फासला है उसको देखते हुए निवेशकों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि वे बचाव के मजबूत उपाय करें। निवेशकों को बाजार को इस तरह से लेना चाहिए जैसे कि वे कोविड हॉस्पिटल जा रहे हों। इसमें कपड़े का मास्‍क काम नहीं करेगा। आपको उच्‍च गुणवत्‍ता वाला एन95 मास्‍क और फेस शील्‍ड पहनना होगा। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि निवेश रणनीति और पोर्टफोलियो में कोई गलती न हो।

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