
फ़रवरी 25, 2022 की सुबह जब में इस पेज को लिख रहा हूं, तब रूस का यूक्रेन पर एक्शन का तीसरा दिन चल रहा है - या शायद मुझे आठवां साल कहना चाहिए - मगर क्योंकि मैं इस सबका एक्सपर्ट नहीं हूं इसलिए इसे रहने ही दूंगा। इसके बजाए मैं अपनी बात का फ़ोकस हमारे निवेश और बचत पर ही रखूंगा, और इस बात पर कि ये सब, इस घटना से कैसे प्रभावित होंगे।
ये बात साफ़ नज़र आती है कि दुनिया भर के मार्केट एक्सपर्ट मानते हैं कि ये बादल ज़्यादा दिन टिकने वाले नहीं हैं। यूएस के इक्विटी मार्केट पिछले कुछ हफ़्तों से गिर रहे हैं। हाल ही के दिनों में जैसे-जैसे इस संघर्ष की संभावना बढ़ रही थी, गिरावट उतनी ही तेज़ होती जा रही थी। मगर, एक्शन शुरु होने के एक दिन बाद मार्केट ऊपर उठ गए, जिसमें S&P 500 इंडैक्स ने 1.5 प्रतिशत की बढ़त रिकॉर्ड की, जो मायने रखती है। आपको इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि यूक्रेन की स्थिति का जनवरी में मार्केट के गिरने में कोई रोल नहीं है।
भारतीय मार्केट में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। फ़रवरी 24, 2022 को जब यूक्रेन में लड़ाई शुरु हुई, तो मार्केट क़रीब 5 प्रतिशत गिर गए, जो लंबे अर्से बाद एक ही दिन में होने वाली काफ़ी बड़ी गिरावट है। इसके ठीक अगले दिन, दुनिया भर के मार्केट की तरह, यहां भी मार्केट में फिर से उत्साह वापस आ गया है। जैसा चीनी वायरस के समय में हुआ था, इस लड़ाई से पैदा हुई धुंध को छटने में कुछ हफ़्ते या कम-से-कम कुछ दिन तो लग ही जाएंगे और उसके बाद ही आगे का रास्ता पता चलेगा। मगर इस उत्साह की वजह क्या है?
मैं इस पर अपनी राय आपसे शेयर करता हूं। वैसे मैं ग़लत भी हो सकता हूं, मगर मुझे लगता है कि वॉल स्ट्रीट और निवेश की दुनिया के दूसरे महारथी माने रहे हैं कि यूरोप का संकट, उस लीक्विडिटी की कमी को टाल देगा जिसके बारे में आशंका व्यक्त की जा रही थी। याद कीजिए, पिछले कुछ हफ़्तों में मोटे तौर पर आने वाली इस वैश्विक गिरावट की वजह थी, धन की कमी का अंदेशा। जैसा मैंने कुछ महीने पहले लिखा था, यूनाईटेड स्टेट्स में मंहगाई 40 साल के ऊंचे स्तर पर थी।
इसमें कोई शक़ नहीं है कि इसकी वजह वो कल्पनातीत आंकड़ा है, जिसमें नए डॉलर छापने की सनक फ़ेडरल रिज़र्व पर पिछले कुछ साल के दौरान छाई रही है। 2008 में, यूनाईटेड स्टेट्स की डॉलरों की सप्लाई 7.5 ट्रिलियन थी। 2019 तक, ये दोगुने से भी ज़्यादा हो गई थी। और अब तो बढ़ कर, 21 ट्रिलिटयन यूएस डॉलर पर पहुंच गई है। 2020 के अंत में, किसी ने कैलकुलेट किया था कि चलन में मौजूद सारे डॉलरों का 20 प्रतिशत, पिछले 10 महीने के दौरान ही छापा गया है। मैं पक्के तौर पर कह सकता हूं कि ये आंकड़ा अब और भी बड़ा होगा।
अब, ऐसा लगता है कि वॉल स्ट्रीट ने तय किया है एक और संकट के खड़े होने की वजह से पैसों की ये बाढ़ नहीं रुकेगी, कम-से-कम कुछ और समय तक तो बरक़रार रहेगी ही। इसीलिए मार्केट फिर से ऊपर जा रहे हैं। ज़ाहिर है, इसका अनुमान लगाने का कोई तरीक़ा नहीं है। बाईडेन सरकार मंहगाई को लेकर काफ़ी चिंतित है। रूस के ख़िलाफ़ बड़े सैंक्शन लगाए जाने के बावजूद, ये बात महत्वपूर्ण है कि यूएस ने मंहगाई की चिंताओं के चलते रूस के पैट्रोलियम और गैस को ऑपरेशन को पहले की तरह ही चलते रहने दिया है।
तो, निवेशकों का इस ख़बर पर क्या नज़रिया होना चाहिए? मैं तो कहूंगा कि आप ख़बरें पढ़ते रहिए पर अपने निवेश के नज़रिए पर इसका असर मत पड़ने दीजिए। आपके और मेरे पास भविष्य में झांकने का कोई तरीक़ा नहीं है और ये समझने का कि ग्लोबल लीक्विडिटी या युद्ध या ब्लादिमीर पुतिन या जो बाइडेन की मनःस्थिति को लेकर क्या होने वाला है। हालांकि, महत्वपूर्ण ये याद रखना है कि हमें ये सब जानने की कोई ज़रूरत नहीं है अगर हम वो सटोरिए नहीं हैं जो कुछ ही दिनों के अंतराल में स्टॉक ख़रीदने-बेचने का काम करते हैं।
ये कॉलम, मार्च 2022, में आने वाले ‘वैल्थ इनसाईट’ के संस्करण से है।