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रिटायरमेंट के लिए फ़िक्स्ड इनकम चुनने का सही तरीक़ा क्या है?

अपने पोर्टफ़ोलियो में स्थिरता लाने का सही तरीक़ा

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सारांशः मैं लार्ज, मिड, स्मॉल और फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड में SIP के ज़रिए निवेश करता हूं. डाइवर्सिफ़िकेशन के लिए गोल्ड और सिल्वर ETF में भी क़रीब 2% लगाया है. रिटायरमेंट गोल के लिए, जो अभी 10 साल से ज़्यादा दूर है, मैं डेट, आर्बिट्राज़ या हाइब्रिड फ़ंड जैसे फ़िक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट जोड़ना चाहता हूं. लंबे निवेश समय को देखते हुए क्या मुझे प्योर डेट फ़ंड, आर्बिट्राज फ़ंड, हाइब्रिड फ़ंड या इनका मिला-जुला विकल्प चुनना चाहिए? – सौमेश कुमार

लंबे समय तक पैसा बनाने पर फ़ोकस करने वाले ज़्यादातर म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों के लिए इक्विटी फ़ंड एक स्वाभाविक पसंद है. शॉर्ट टर्म में ये उतार-चढ़ाव भरे हो सकते हैं, लेकिन जो निवेशक टिके रहे उन्हें लॉन्ग-टर्म में अच्छा फ़ायदा मिला है.

लेकिन रिटायरमेंट के लिए निवेश करते वक़्त मक़सद बदल जाता है, ग्रोथ की जगह स्थिरता अहम हो जाती है. और इसी से एक ज़रूरी सवाल उठता है: रिटायरमेंट पोर्टफ़ोलियो के लिए कौन से फ़िक्स्ड इनकम विकल्प सबसे सही हैं?

इस संदर्भ में हम देखते हैं कि हमारे पाठक को एक बेहतर और भरोसेमंद रिटायरमेंट कॉर्पस बनाने के लिए हाइब्रिड फ़ंड, आर्बिट्राज फ़ंड या डेट फ़ंड में से किसकी ओर रुख़ करना चाहिए.

हाइब्रिड फ़ंड क्यों नहीं?

हाइब्रिड फ़ंड दोनों दुनिया का फ़ायदा देने की कोशिश करते हैं: इक्विटी हिस्सा ग्रोथ देता है और डेट का हिस्सा गिरावट के दौरान पोर्टफ़ोलियो को संभालता है.

लेकिन हमारे पाठक के मामले में, जिनके पास पहले से कई इक्विटी फ़ंड हैं, हाइब्रिड फ़ंड जोड़ने से पोर्टफ़ोलियो के प्रदर्शन पर कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ेगा.

यहां एक सवाल उठता है कि क्या कंज़र्वेटिव हाइब्रिड फ़ंड सही विकल्प नहीं होंगे? सुनने में अच्छा लगता है, लेकिन डेट में ज़्यादा हिस्सेदारी की वजह से इन पर डेट फ़ंड जैसा टैक्स लगता है. यानि कंज़र्वेटिव हाइब्रिड फ़ंड से हुई कमाई पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा. और इनका इक्विटी एक्सपोज़र इतना कम है कि ये इक्विटी टैक्सेशन के दायरे में नहीं आते.

आर्बिट्राज़ फ़ंड: अच्छे, लेकिन काफ़ी नहीं

आर्बिट्राज़ फ़ंड एक तरह के हाइब्रिड फ़ंड हैं जो अपनी कम से कम 65% रक़म इक्विटी में लगाते हैं और डेरिवेटिव के ज़रिए इसे हेज करते हैं. टैक्स के नज़रिए से ये इक्विटी फ़ंड की तरह माने जाते हैं, जो इन्हें छोटी अवधि के निवेश और ज़्यादा टैक्स स्लैब वाले निवेशकों के लिए आकर्षक बनाता है.

प्योर इक्विटी फ़ंड के मुक़ाबले ये कम उतार-चढ़ाव वाले होते हैं, लेकिन आर्बिट्राज़ फ़ंड का रिटर्न स्प्रेड के आकार और इनके निवेश की सट्टेबाज़ी वाली प्रकृति के साथ काफ़ी बदलता रहता है.

इनका रिटर्न भी कोई ख़ास नहीं रहा. जनवरी 2013 से औसत एक साल के डेली रोलिंग रिटर्न के हिसाब से आर्बिट्राज़ फ़ंड ने महज़ 6.6% रिटर्न दिया है.

शॉर्ट-ड्यूरेशन फ़ंड: एक बेहतर विकल्प

डेट म्यूचुअल फ़ंड इक्विटी फ़ंड जितना नहीं कमाते, लेकिन ये कम जोख़िम वाले और स्थिर होते हैं. कई कैटेगरी ने तो लंबे समय में कभी नेगेटिव रिटर्न नहीं दिया.

इनमें से शॉर्ट-ड्यूरेशन फ़ंड रिटायरमेंट पोर्टफ़ोलियो बनाने के लिए एक सही विकल्प के रूप में उभरे हैं. जनवरी 2013 से इस कैटेगरी ने औसतन एक साल का रोलिंग रिटर्न 7.6% दिया है. और सबसे अहम बात, उस पूरे दौर में किसी भी एक साल की अवधि में रिटर्न नेगेटिव नहीं रहा.

यही वो बात है जो मायने रखती है. शॉर्ट-ड्यूरेशन फ़ंड ने निवेशकों से स्थिरता के बदले रिटर्न की क़ुर्बानी नहीं मांगी. दोनों एक साथ मिले. इसीलिए ये लंबे समय के रिटायरमेंट पोर्टफ़ोलियो में फ़िक्स्ड इनकम के मुख्य हिस्से के लिए सबसे साफ़ विकल्प हैं.

ज़्यादा कंज़र्वेटिव छोर पर लिक्विड फ़ंड की अपनी अलग भूमिका है. इनका औसत एक साल का रोलिंग रिटर्न 6.5% है जो शॉर्ट-ड्यूरेशन फ़ंड से कम है, लेकिन इनका मक़सद अलग है: ये पोर्टफ़ोलियो के नॉन-इक्विटी हिस्से के सबसे आसानी से निकाले जा सकने वाले और सबसे स्थिर कोने में रहते हैं, उस रक़म के लिए जो हमेशा लिक्विड रहनी चाहिए. थोड़ा कम रिटर्न उस भरोसेमंद स्थिरता की वाजिब क़ीमत है.

आखिरी बात

दोबारा कहें तो, पाठक के पोर्टफ़ोलियो को किसी अतिरिक्त इक्विटी की ज़रूरत नहीं है, इसलिए प्योर इक्विटी या हाइब्रिड फ़ंड को दरकिनार किया जा सकता है. पोर्टफ़ोलियो को चाहिए स्थिरता, कम जोख़िम और ठीक-ठाक रिटर्न. और इसके लिए डेट फ़ंड, ख़ासकर शॉर्ट-ड्यूरेशन फ़ंड, सबसे सही विकल्प हैं क्योंकि ये लंबे समय में सीमित लेकिन स्थिर रिटर्न देते हैं.

अगर आप जानना चाहते हैं कि किन शॉर्ट-ड्यूरेशन फ़ंड में निवेश करें, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र देखें. यहां आपको हमारे एनालिस्ट द्वारा चुनी गई फ़ंड की लिस्ट मिलेगी, साथ ही फ़ंड के प्रदर्शन, लंबे और शॉर्ट टर्म के रिटर्न की गहरी जानकारी और पोर्टफ़ोलियो से जुड़ी व्यक्तिगत सलाह भी. ताकि आप अपना रिटायरमेंट कॉर्पस सही तरीक़े से बना सकें.

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ये भी पढ़ें: रिटायरमेंट के बाद किन म्यूचुअल फ़ंड्स में निवेश करें?

ये लेख पहली बार मार्च 19, 2026 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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